विधानसभा और परिषद से 20 साल बाद विदा हुए नीतीश और नितिन,खरमास बाद नई सरकार संभव
पटना.बिहार की राजनीति में सोमवार को एक बड़े अध्याय का अंत और नए सफर का आगाज हुआ। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। दोनों नेता अब राज्यसभा के सदस्य के रूप में दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे।
सोमवार को इस्तीफा देने का आखिरी दिन था, क्योंकि चुनाव जीतने के 14 दिनों के भीतर पुराने सदन की सदस्यता छोड़ना अनिवार्य है। उम्मीद थी कि दोनों नेता खुद आएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नीतीश कुमार का इस्तीफा जदयू नेता संजय सिंह ‘गांधी’, मंत्री विजय कुमार चौधरी और ललन सर्राफ लेकर पहुंचे। सभापति अवधेश नारायण सिंह ने इसे तुरंत मंजूर कर लिया। वहीं, नितिन नवीन असम के चुनाव में व्यस्त थे, इसलिए उनका इस्तीफा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी लेकर आए। मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय ने नितिन की सीट (बांकीपुर) के रिक्त होने की अधिसूचना जारी की।
नीतीश-नितिन 2006 से सदनों के सदस्य रहे : नीतीश और नितिन कमोबेश एक ही समय में दोनों सदनों के सदस्य बने। नीतीश 7 मई 2006 को परिषद के सदस्य बने। और नितिन 27 अप्रैल 2006 को। तब से दोनों लगातार सदस्य रहे। नीतीश 2006 के बाद 2012, 2018 और 2024 में परिषद के लिए निर्वाचित हुए। नितिन, 27 अप्रैल 2006 को पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से जीते। उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा यहां से जीतते थे। उनके निधन के चलते उपचुनाव हुआ। नितिन जीते। फिर यह क्षेत्र उन्हीं के नाम सी हो गई। अब क्षेत्र बांकीपुर कहलाता है। नितिन के रविवार को इस्तीफा देने की बात थी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ.प्रेम कुमार भी पहुंच गए थे। पूर्वाह्न 8.40 बजे इस्तीफा देने का समय था। किंतु असम में कई चुनावी कार्यक्रमों के चलते नितिन वहां (असम) चले गए। सोमवार को भी वापसी संभव नहीं हुई। इसलिए उनका इस्तीफा भाजपा अध्यक्ष लेकर गए।
दिनभर गहमागहमी … आंसुओं से लेकर विरोध तक
दोपहर 12:30 बजे (अशोक चौधरी हुए भावुक)
नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर के बीच जदयू नेता अशोक चौधरी मीडिया से बात करते हुए भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि नीतीश जी का जाना बिहार के लिए एक युग का अंत है, उनकी आंखों में आंसू साफ देखे गए।
दोपहर 01:15 बजे (पटना विवि में हंगामा)…नीतीश का इस्तीफा लेकर संजय गांधी सदन पहुंचे
पटना विश्वविद्यालय के छात्रों ने नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के फैसले का विरोध किया। छात्रों का कहना था कि शिक्षा और रोजगार के वादे अधूरे छोड़ कर सीएम जा रहे हैं। कुछ छात्रों ने उनके समर्थन में भी नारे लगाएं।
दोपहर 02:45 बजे (बयानबाजी का दौर)…नितिन नवीन का इस्तीफा लेकर संजय सरावगी आए
विपक्ष ने इसे ‘भागने’ का नाम दिया, तो सत्ता पक्ष ने इसे राष्ट्रीय राजनीति में बिहार का दबदबा बताया। राजद ने तंज कसा कि बिहार में भाजपा की राजनीति सफल हो गई है। उसने जनादेश को धोखा दिया है।
शाम 04:00 बजे (खरमास की चर्चा) : सचिवालय की गलियारों में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चा तेज हो गई। 14 अप्रैल को खरमास खत्म होने के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार या नई घोषणाओं के आसार पर हर जगह खूब चर्चा चली।
क्यों जरूरी था आज ही इस्तीफा?
संविधान के नियमों के मुताबिक, यदि कोई सदस्य दूसरे सदन (जैसे राज्यसभा) के लिए चुन लिया जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर पुराने सदन से इस्तीफा देना होता है। यह समय सीमा 30 मार्च को समाप्त हो रही थी। यदि आज इस्तीफा नहीं होता, तो राज्यसभा की सदस्यता खतरे में पड़ सकती थी। नई सरकार के गठन की तारीखों को लेकर सस्पेंस बरकरार है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 14 अप्रैल तक यह खरमास है, जिसमें शुभ कार्य वर्जित होते हैं। हालांकि, राजनीति में यह तर्क भी दिया जा रहा है कि शपथ ग्रहण जैसे कार्यों के लिए खरमास बाधा नहीं है। फिर भी, संभावना है कि 14 अप्रैल के बाद ही नई सरकार की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।
10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य की शपथ लेंगे
नीतीश कुमार व नितिन नवीन 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। इनके साथ रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा, केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर तथा भाजपा के शिवेश कुमार भी शपथ लेंगे। ये सभी 16 मार्च को राज्यसभा का चुनाव जीते। शिवेश के मुताबिक, राज्यसभा सचिवालय ने उन्हें 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण होने की जानकारी दी है।
पीले लिफाफे पर रही नजर : जदयू के वरीय नेताओं से ज्यादा चर्चित पीला लिफाफा था। यह संजय सिंह गांधी के हाथ में था। सबकी नजरें इसी पर थी। संजय ने मीडियाकर्मियों के आग्रह पर इसके अंदर रखे एक पन्ने को निकाला। नीतीश द्वारा विधानपरिषद के सभापति को संबोधित इस पन्ने पर एक लाइन लिखी थी-मैं इसके द्वारा तिथि 30-03-2026 से सदन से अपने स्थान का त्यागपत्र देता हूं।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
