गुजरात की दवा कंपनियों से आ रहे नशे के इंजेक्शन, बिहार की राजधानी बना सप्लाई जंक्शन
पटना.नशे के आदी युवक बूप्रेनोरफीन और एविल इंजेक्शन को मिलाकर ले रहे हैं। पुलिस के हत्थे चढ़े कुछ नशेड़ियों ने बताया कि दोनों मिलाकर लेने से किक मिलता है। ड्रग की टीम अपनी रिपोर्ट में लिखती है-सिनर्जिस्टिक इफेक्ट (नशे के प्रभाव को कई गुना बढ़ाना) पैदा करने के लिए नशेड़ी ऐसा करते हैं।
पटना पुलिस और ड्रग विभाग की टीम ने इस साल अबतक छह बड़ी कार्रवाइयां कर 35 हजार से ज्यादा नशीले इंजेक्शन जब्त किए हैं। इसकी खेप गुजरात की फार्मा कंपनियों से सीधे माफियाओं तक पहुंच रही हैं। ये माफिया अहमदाबाद की आयकॉन बायो साइंसेस, बड़ौदा की रेडिएंट, अहमदाबाद की नूइडियन फार्मास्यूटिकल्स और थेमिस मेडीकेयर से थोक में इंजेक्शन मंगा बिहार और अन्य राज्यों में अवैध धंधा कर रहे हैं। इन कंपनियों को बिहार के ड्रग विभाग ने कई बार पत्र लिखकर बताने को कहा है कि वे अपनी दवाएं किसे भेज रहे हैं, लेकिन वे जवाब नहीं कर रही हैं।
चार खिलाड़ी : पुलिस की नजर में फरार, पर नशे के बाजार के सरदार
पटना पुलिस की नजर में जो ड्रग्स माफिया फरार हैं, वे पटना में ही बैठकर धंधा कर रहे हैं। 2025 और 2026 में जब्त नशे के इंजेक्शन की खेप नालंदा के अमरजीत शर्मा, ब्रजेश, हरेंद्र पांडेय या देवधर गौतम के थे। चारों करीब दो साल से फरार हैं। लेकिन, इनका गिरोह बिहार के साथ अन्य राज्यों में भी इंजेक्शन की खेप पहुंचा रहा है।
इस साल छह कार्रवाई, 35 हजार इंजेक्शन जब्त, 10 धंधेबाज गिरफ्तार
अमरजीत शर्मा : दवा दुकान खोलकर नशे के इंजेक्शन का धंधा करता था। इसकी दुकान पर ड्रग विभाग की टीम ने 2025 में कार्रवाई की थी। जून 2025 में दुकान का लाइसेंस रद्द कर दिया गया। उसके बाद से वह फरार है। सूत्रों की मानें तो इसने नेपाल और रांची में ठिकाना बना रखा है। वहीं से नशे का धंधा कर रहा है। दिसंबर 2025 में नशे के इंजेक्शन की खेप बेंगलुरु भेजी थी, जिसे पुलिस जब्त कर लिया था। जनवरी में बेंगलुरु पुलिस ने पटना में उसके घर पर छापा मारा था। वह झारखंड भी नशे की खेप भेजता है।
ब्रजेश और हरेंद्र : ब्रजेश और हरेंद्र नालंदा के हिलसा थाना इलाके के रहने वाले हैं, लेकिन ठिकाना पटना ही है। पिछले एक हफ्ते में पटना के मुसल्लहपुर, रामकृष्णानगर और बहादुरपुर में जो माल पकड़े गए वे इनके ही थे।
देवधर : यह हरेंद्र पांडेय के लिए ही काम करता है। रामकृष्णानगर के पते पर ब्रजेश और हरेंद्र ने ड्रग लाइसेंस लिया था। इसी पर नशे का इंजेक्शन मंगाते थे। 2025 में लाइसेंस कैंसिल कर दिया गया। ये कैंसिल लाइसेंस पर ही बूप्रेनोरफीन और एविल इंजेक्शन मंगाते हैं। कंपनी लाइसेंस के पते पर दवा भेजती है। ये ट्रांसपोर्टर से मिलीभगत कर वहीं से रिसीव कर लेते हैं।
20 फरवरी, कदमकुआं 262 इंजेक्शन जब्त, दो गिरफ्तार
16 फरवरी, रामकृष्णानगर 10,500 इंजेक्शन जब्त, गिरफ्तारी नहीं
7 मार्च, पीरबहोर 180 इंजेक्शन जब्त, एक गिरफ्तार
19 मार्च, रामकृष्णानगर20,330 इंजेक्शन जब्त, एक गिरफ्तार
2 अप्रैल, बहादुरपुर20,080 इंजेक्शन जब्त, छह गिरफ्तार
2 अप्रैल, मुसल्लहपुर 232 इंजेक्शन जब्त, दो गिरफ्तार
जवाब नहीं दे रहीं कंपनियां
हाल की कार्रवाइयों में गुजरात की कंपनियों के इंजेक्शन मिले हैं। हमने उन कंपनियों कई बार पत्र लिखकर सप्लाई की जानकारी मांगी है, लेकिन वे जवाब नहीं दे रही हैं।-चुनेंद्र महतो, असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर, पटना
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
