दलसिंहसराय:माइक्रो फाइनेंस कंपनियां बन चुकी हैं शोषण का औजार:सुभाषिनी
दलसिंहसराय,अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा) का दो दिवसीय 14वां बिहार राज्य सम्मेलन बुधवार को दलसिंहसराय के रामाश्रय बालेश्वर कॉलेज में झंडोतोलन के साथ शुरू हुआ. अध्यक्षता एडवा की बिहार प्रदेश अध्यक्ष नीलम देवी जबकि स्वागताध्यक्ष के रूप में विभूतिपुर विधायक अजय कुमार ने किया.जिला कमेटी सदस्य विधानचंद्र कोषाध्यक्ष रहे.
सम्मेलन में राज्य और देशभर से एडवा से जुड़ीं वरिष्ठ नेता, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रतिनिधि शामिल हुए. सम्मेलन के पहले ही सत्र में महिलाओं के सामने मौजूद आर्थिक संकटों और सरकारी नीतियों के प्रभाव पर गंभीर चर्चा हुई.
मुख्य वक्ता,एडवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली सहगल ने अपने संबोधन में कहा कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियां गरीब महिलाओं की सहायता के नाम पर उनके शोषण का बड़ा औजार बन चुकी हैं.उन्होंने कहा कि ऊंचे ब्याज दरों और अपमानजनक तरीकों से की जा रही वसूली गरीब महिलाओं को कर्ज़ के ऐसे जाल में फंसा रही है,जिससे निकलना लगभग असंभव हो गया है.उन्होंने इसे “वित्तीय समावेशन” का भ्रम बताते हुए कहा कि यह असल में गरीब महिलाओं की मजबूरी पर मुनाफाखोरी का कारोबार है.सुभाषिनी अली ने राज्य और केंद्र सरकार से मांग की कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियों पर कठोर नियंत्रण लगाया जाए, ब्याज दर की अधिकतम सीमा तय हो, और जबरन वसूली को आपराधिक अपराध घोषित किया जाए.
साथ ही उन्होंने कहा कि सार्वजनिक बैंकों, सहकारी संस्थानों और स्वयं-सहायता समूहों के माध्यम से सम्मानजनक ऋण व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए.राष्ट्रीय महासचिव मरियम ढावले ने कहा कि “महिला सशक्तिकरण” का अर्थ तभी सार्थक होगा जब महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बराबरी के अवसर मिलें. उन्होंने सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि पूंजीपतियों को फायदा पहुँचाने वाली योजनाएँ गरीब महिलाओं को और हाशिए पर धकेल रही हैं. उन्होंने कहा कि हाल में मनरेगा में किए गए संशोधन ने ग्रामीण महिलाओं के रोजगार का एक प्रमुख स्रोत छीन लिया है.अब जॉब कार्ड होते हुए भी बहुत-सी महिलाओं को काम नहीं मिल पा रहा.इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है और महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को झटका लगा है.मरियम ढावले ने एडवा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे गाँव-गाँव तक पहुँचकर महिलाओं को इन शोषणकारी नीतियों और योजनाओं के खिलाफ जागरूक करें तथा सामूहिक संघर्ष को तेज़ करें.
राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद पी.के. श्रीमता ने कहा कि देशभर की महिलाएँ आज बढ़ती गरीबी, महंगाई और असुरक्षा से जूझ रही हैं. उन्होंने कहा कि आर्थिक नीतियों में महिला हितों की प्राथमिकता सुनिश्चित किए बिना समानता की बात अधूरी है. एडवा महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और रोजगार की गारंटी के लिए राज्यव्यापी आंदोलन को और तेज़ करेगी.राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामपरी ने कहा कि समाज में व्याप्त पितृसत्तात्मक सोच आज भी महिलाओं की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है.कानून बन जाने के बाद भी जब तक सोच नहीं बदलेगी, वास्तविक बदलाव संभव नहीं.
विभूतिपुर विधायक अजय कुमार ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि आर्थिक शोषण और रोजगार की असमानता अभी भी गंभीर चुनौती है.उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे विधानसभा में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएँगे.
समापन सत्र में अध्यक्ष नीलम देवी ने कहा कि एडवा गरीब, मजदूर और शोषित महिलाओं के अधिकार की लड़ाई लगातार जारी रखेगी. उन्होंने सभी अतिथियों और प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए सम्मेलन के सफल संचालन की घोषणा की.मौके पर सैकड़ो महिला मौजूद थी.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
