बेगूसराय के कांवर झील में सालों बाद फिर लौटेगा पानी और परिंदों का संसार
बेगूसराय.आने वाले समय में कांवर झील की तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आ सकती है। झील में साल भर पानी बनाए रखने, पक्षी आश्रयणी को पुनर्जीवित करने और ईको-पर्यटन की संभावनाएं बढ़ाने को लेकर प्रशासन ने ठोस कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत बूढ़ी गंडक नदी के बाएं तटबंध से अधिशेष जल को लिफ्ट कर आरसीसी नाले के माध्यम से कांवर झील तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही झील के करीब डेढ़ किलोमीटर क्षेत्र में उड़ाही कराई जाएगी।
हरसन पुल के पास चेक डैम का निर्माण किया जाएगा, जिससे वेटलैंड क्षेत्र में पूरे साल जल स्तर बना रहे। इसके अतिरिक्त अन्य स्थानों पर भी चेक डैम बनाए जाएंगे, ताकि झील में जल स्तर को दो से चार मीटर तक नियंत्रित और संरक्षित रखा जा सके। फिलहाल चेक डैम निर्माण को लेकर पानी कम होने का इंतजार किया जा रहा है। संबंधित जेई के अनुसार, अभी प्रस्तावित स्थल पर पांच से छह फीट पानी है, जल स्तर घटते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि कांवर झील क्षेत्र में जलीय पुनरुत्थान के साथ-साथ जयमंगलागढ़ जैसे स्थलों को ईको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। डीएम ने साफ कहा कि यह परियोजना पर्यावरण से जुड़ी है, इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग आपसी समन्वय से कार्य करेंगे। समीक्षा के दौरान सामने आया कि वर्ष 1987 के सर्वे में कांवर झील का क्षेत्रफल वर्तमान से कहीं अधिक था। उस समय झील में जल प्रवाह भी बेहतर था। वर्तमान सर्वे में पाया गया कि समय के साथ वेटलैंड क्षेत्र सिमट गया है, मखमली घास बढ़ गई है और झील की गहराई भी कम हो गई है। अब पानी का प्रवाह 500 से 1000 मीटर में ही रुक-रुक कर हो रहा है, जिससे सतत जल प्रवाह संभव नहीं हो पा रहा। इन्हीं सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह आकलन किया जा रहा है कि झील के वेटलैंड क्षेत्र को कितने बड़े क्षेत्रफल में पुनः विकसित किया जा सकता है। इसके आधार पर भविष्य की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे कांवर झील फिर से जीवंत हो सके।
झील किनारे बसे लोगों के पुनर्वास की तैयारी, जमीन चिह्नित कांवर झील पक्षी आश्रयणी के जीर्णोद्धार, संरक्षण, जल प्रबंधन, भूमि सर्वेक्षण, अतिक्रमण हटाने और ईको-पर्यटन विकास को लेकर सोमवार को डीएम श्रीकांत शास्त्री ने अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। यह परियोजना मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान प्रस्तावित की गई थी, जिसे पूर्व डीएम तुषार सिंगला ने आगे बढ़ाया था। बैठक में डीएम ने भूमि सर्वेक्षण और अतिक्रमण से जुड़े बिंदुओं की समीक्षा की। अनुमंडल पदाधिकारी ने बताया कि झील क्षेत्र में बसे लोगों के पुनर्वास के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। इस पर डीएम ने अग्रेतर कार्रवाई तेज करने का निर्देश दिया, ताकि विकास कार्यों में कोई बाधा न आए।
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