स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति लोगों को किया था जागरूकभितिहरवा आश्रम में लगी कस्तूरबा गांधी की प्रतिमा
चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और साफ-सफाई के लिए भी काफी कुछ किया। वे मानते थे कि इन सब की कमी उनके गुलाम बने रहने की एक बड़ी वजह है। लोग जब तक पढ़ेंगे-लिखेंगे नहीं, स्वस्थ नहीं होंगे और अपने अधिकारों को नहीं जानेंगे। उन्हें असली आजादी नहीं मिलेगी। इस विचार से उन्होंने तीन स्कूल खोले। इनमें पूर्वी चंपारण में दो और एक पश्चिम चंपारण के भितिहरवा में था। भितिहरवा सबसे महत्वपूर्ण था। यहां की बागडोर स्वयं कस्तूरबा गांधी और उनके प्रिय सहयोगी डा. देव के हाथों में थी। कस्तूरबा गांधी का मुख्य काम इलाके की स्त्रियों से मिलना-जुलना और उन्हें स्वास्थ्य और शिक्षा के प्रति जागरूक करना था।
गांधीजी के विचारों को लेकर गांव-गांव पहुंचीं
कस्तूरबा गांधी 24 नवंबर, 1917 को भितिहरवा पहुंची थीं। करीब छह महीने यहां रहीं और गांधीजी के विचारों को लेकर गांव-गांव पहुंचीं। उन्होंने एक बड़ी आबादी को शिक्षा से जोड़ा। 20 नवंबर, 1917 को भितिहरवा में स्थापित स्कूल को उनकी निगरानी में आसपास के गांवों के लोगों ने बनाया था। पहली बार इसे फूस से बनाया गया, जिसमें अंग्रेजों ने आग लगा दी थी। बाद में कस्तूरबा के प्रयास से उसे ईंट-गारे और खपरैल से खड़ा किया गया। अब सरकार ने खपरैल के भवन को बेहतर आकार देकर संरक्षित किया और गांधी स्मृति संग्रहालय में बदल दिया है। यहां बुनियादी शिक्षा की पुर्नकल्पना परियोजना के तहत कक्षा एक से आठ तक की शिक्षा भी दी जा रही है।
अभियान में स्थानीय महिलाओं को जोड़ा
भितिहरवा निवासी स्वतंत्रता सेनानी मुकुटधारी प्रसाद चौहान के पौत्र चंदन चौहान व सेवानिवृत्त शिक्षक शिवशंकर चौहान का कहना है कि कस्तूरबा गांधी के छह माह के प्रवास के दौरान आसपास की महिलाओं में शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता उत्पन्न हुई। खुद मुकुटधारी बाबू की मां ने इस अभियान से जुड़कर तंबाकू निषेध के लिए नशामुक्ति अभियान चलाया गया था। पूर्व सरपंच दिनेश प्रसाद यादव, रामबाबू चौरसिया का कहना है कि कस्तूरबा गांधी के ऊपर भितिहरवा में काम करने की जरूरत है। उनकी स्मृतियों को संजोने व संवारने की जरूरत है। यहां उनकी इस्तेमाल की हुई चक्की, स्कूल की मेज, घंटी, कुआं समेत कई यादगार निशानियां हैं। इसे देखने प्रतिदिन करीब 200 पर्यटक पहुंचते हैं। गांधी स्मारक संग्रहालय के प्रभारी शिवकुमार मिश्र का कहना है कि भितिहरवा में कस्तूरबा गांधी के योगदान पर बहुत कम काम हुआ है, लेकिन उनके अवदान और कार्यों को ऐतिहासिक महत्व के दृष्टिकोण से देखने और काम करने की जरूरत है।
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