Patna

जन्म से एक घंटे तक नवजात शिशुओं की गहन देखभाल जरूरी: एसीएमओ

पटना।सासाराम/ 15 फरवरी। शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए सरकार लगातार कार्य कर रही है और नवजात शिशु को बेहतर देखभाल प्रबंधन की वजह से शिशु मृत्यु दर में भी कमी आती दिखाई दे रही है। शिशु मृत्यु दर में कमी लाने को उद्देश्य से सासाराम सदर अस्पताल के ओपीडी स्थित सभा कक्ष में नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (एनएसएसके) के तहत एएनएम को प्रशिक्षण प्रदान किया गया जिसमें जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के साथ सांस लेने में तकलीफ एवं कमजोर बच्चों को तत्काल प्राथमिक उपचार प्रदान करने की जानकारी दी गई।

Dss WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
bihar whatsapp Channel Join Now

 

 

इसमें बताया गया कि गोल्डन पीरियड के दौरान किस तरह से बच्चों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से एसएनसीयू भेजा जाए और जरूरत पड़ने पर सीएनसीयू से किस तरह से उच्च इलाज के लिए रेफर किया जाए। साथ ही प्रसव के दौरान बरनी जाने वाली सावधानियां के बारे में भी जानकारी दिया गया। उन्हे बताया गया की प्रसव के दौरान कई विशेष सावधानियां बरतने की भी आवश्यकता है ताकि जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वास्थ्य रहें। प्रशिक्षण कार्यक्रम में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सह शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ अशोक कुमार, डॉ कंचन, डॉ राघवेन्द्र कुमार ने जन्म के दौरान नवजात शिशुओं के बेहतर देखभाल प्रबंधन से शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए कई जानकारी उपलब्ध करायी।

 

 

 

एक घंटा गहन देखभाल की जरूरत

डॉक्टर अशोक कुमार ने सभी प्रशिक्षण ले रही एवं को बताया कि प्रसव के दौरान नवजात शिशु को शुरुआती 1 घंटे में ज्यादा देखभाल की आवश्यकता होती है इस दौरान यह देखना जरूरी है कि बच्चा सही से सांस ले रहा है कि नहीं, बच्चों का हार्ट बीट सही चल रहा है या नहीं या बच्चा कहीं नीला तो नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि 1 घंटे के भीतर इस तरह के लक्षण कुछ दिखाई दे तो तुरंत बच्चों को उचित उपचार प्रदान करें। डॉ अशोक कुमार ने बताया कि बच्चा यदि पूरी तरह से स्वस्थ हो तो 1 घंटे के भीतर स्तनपान करवाना भी एक जरूरी प्रक्रिया होती है।

रेफर करते समय भी रेखें ख्याल

डॉ अशोक कुमार ने प्रशिक्षण ले रही एएनएम को बताया कि नवजात शिशु को सांस लेने की समस्या एवं हार्ट बीट में समस्या होने पर उसे तुरंत एनएसयूसी (न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट केयर) में रखकर उसका इलाज करें। यदि बच्चे में सुधार ना हो तो उसे तुरंत एसएनसीयू के लिए रेफर करें। रेफर करते समय कई बातों का ध्यान रखना अति आवश्यक है जिसमें यह सुनिश्चित करना है कि मां ने ठीक से बच्चे को पकड़ा है कि नहीं, ऑक्सीजन ठीक से लगा है कि नहीं। उन्होंने बताया कि रेफर करते समय बेहतर ट्रांसपोर्टेशन भी नवजात शिशु के लिए अति आवश्यक है। इसलिए बच्चों को रेफर करते समय ट्रांसपोर्टेशन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

error: Content is protected !!