बिहार में 86 दिनों बाद खत्म हुई बिहार राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल:आश्वासन के बाद माने
पटना.बिहार में जमीन-जायदाद, दाखिल-खारिज और प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कार्यों के लिए परेशान हो रहे आम लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है.पिछले 86 दिनों से जारी राजस्व कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह और बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ (संयुक्त संघर्ष मोर्चा) के प्रतिनिधियों के बीच हुई बातचीत के बाद कर्मचारियों ने काम पर लौटने का निर्णय लिया है।राज्यभर के अंचल कार्यालयों में लंबे समय से कामकाज प्रभावित होने के कारण लाखों आवेदन लंबित पड़े थे।
अब सोमवार से राजस्व कर्मचारी अपने-अपने कार्यालयों में योगदान देंगे, जिससे दाखिल-खारिज, परिमार्जन, जाति-आय-निवास प्रमाण पत्र और भू-लगान वसूली जैसे कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
9 फरवरी से हड़ताल पर थे कर्मचारी
बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ के बैनर तले प्रदेशभर के हजारों राजस्व कर्मचारी 9 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे।कर्मचारियों का आरोप था कि सरकार उनकी लंबे समय से लंबित 17 सूत्री मांगों को नजरअंदाज कर रही है। कई दौर की बातचीत विफल रहने के बाद हड़ताल लगातार जारी रही, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा। बैठक में कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के बीच लंबी चर्चा हुई, जिसके बाद गतिरोध समाप्त करने पर सहमति बनी।
वार्ता में क्या-क्या हुआ तय
सरकार और कर्मचारी संघ के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया कि विभागीय स्तर पर लंबित मांगों का निष्पादन एक सप्ताह के भीतर किया जाएगा, जबकि सरकार स्तर की मांगों पर एक माह के भीतर निर्णय लिया जाएगा।हड़ताल के दौरान जिन कर्मचारियों पर निलंबन या विभागीय कार्रवाई की गई थी, उसे वापस लेने के लिए सभी जिलाधिकारियों और समाहर्ताओं को निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके अलावा हड़ताल अवधि को अवकाश में समायोजित करने पर भी सहमति बनी, ताकि कर्मचारियों के वेतन पर प्रतिकूल असर न पड़े।
संघ की ओर से यह भी निर्णय लिया गया कि सभी राजस्व कर्मचारी आगामी सोमवार से अपने-अपने अंचल कार्यालयों में अनिवार्य रूप से योगदान देंगे।
आखिर क्यों नाराज थे राजस्व कर्मचारी?
राजस्व कर्मचारियों का कहना था कि उन पर लगातार कार्यभार बढ़ता जा रहा है, लेकिन सुविधाएं और संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में वेतन बढ़ाना, ग्रेड पे में सुधार, समयबद्ध प्रोन्नति और कार्यस्थल पर बेहतर संसाधनों की व्यवस्था शामिल थी।कर्मचारियों ने यह भी मांग रखी थी कि अंचल कार्यालयों में पर्याप्त संख्या में लैपटॉप, इंटरनेट सुविधा और डेटा एंट्री ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाएं, ताकि डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से जुड़े कार्य सुचारू रूप से चल सकें।
इसके अलावा फील्ड ड्यूटी के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ते प्रशासनिक दबाव को कम करने की मांग भी लंबे समय से की जा रही थी। कर्मचारियों का कहना था कि राज्य में लगभग 4,325 नए राजस्व कर्मचारियों की नियुक्ति होने के बावजूद कार्य का बोझ कम नहीं हुआ है और पुराने तथा नए कैडर के बीच समन्वय की भी समस्या बनी हुई है।
86 दिनों तक चले इस आंदोलन का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा। अंचल कार्यालयों में कामकाज लगभग ठप हो गया था, जिससे जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में भारी देरी हुई।दाखिल-खारिज के लाखों आवेदन लंबित हो गए, जिसके कारण जमीन खरीदने वाले लोगों को मालिकाना हक मिलने में परेशानी हुई। वहीं परिमार्जन और डिजिटल रिकॉर्ड सुधार का काम भी पूरी तरह प्रभावित रहा।
जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र नहीं बनने से छात्रों, नौकरी अभ्यर्थियों और आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई छात्रों के कॉलेज एडमिशन और सरकारी योजनाओं से जुड़े आवेदन भी प्रभावित हुए।इसके अलावा भू-लगान वसूली और अन्य राजस्व कार्य बाधित होने से सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग छोटे-छोटे कामों के लिए लगातार अंचल कार्यालयों का चक्कर लगाते रहे।
संघ के नेताओं ने कहा कि सरकार की ओर से सकारात्मक पहल और लिखित आश्वासन मिलने के बाद कर्मचारियों ने जनहित को देखते हुए हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
