सरकारी स्कूल से महंगी प्राइवेट स्कूलों की किताब:5 क्लास के किताब का दाम पांच हजार
समस्तीपुर में अप्रैल का महीना शुरू होते ही सरकारी और निजी विद्यालयों में नया सेशन शुरू हो गया है। इसके साथ ही किताब दुकानों पर भीड़ भी जुट रही है। लोग निजी स्कूल में महंगी किताबों पर सवाल भी उठा रहे हैं।लोगों का कहना है कि जब देश में एक शिक्षा नीति हो सकती है, तो सरकारी और निजी विद्यालयों में एक किताब क्यों नहीं हो सकती है। अभिभावकों ने कहा कि और तो और ज्यादातर निजी स्कूलों में ही किताब के लिए काउंटर बनाया गया है। कुछ स्कूलों का दुकान फिक्स कर रखा गया है। उसी दुकान में सभी किताबें मिलती है।
5 हजार रुपए बुक की कीमत
शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र के रहने वाले मो. एयाज बताते हैं कि उनके दो बच्चे हैं ।उनकी बेटी केंद्रीय विद्यालय में हैं। जहां एनसीईआरटी बुक से बच्चों की पढ़ाई होती है। दसवीं क्लास के लिए उन्होंने एनसीईआरटी की किताब खरीदी तो उन्हें दस किताबों के लिए एक हजार रुपए देना पड़ा। लेकिन उनका बेटा निजी स्कूल में वर्ग पांच में पढ़ता है।
बेटे का बुक लेने के लिए पहुंचा हूं, तो उनके बुक की कीमत 5 हजार रुपए लग रही है। वह भी निजी विद्यालय में हर साल किताबें बदल दी जाती है। जिससे अभिभावकों पर बोझ बढता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब देश में एक शिक्षा नीति लागू हो सकता है, तो सभी स्कूलों में एक किताब एनसीईआरटी से पढ़ाई क्यों नहीं होती।
लोगों का कहना है कि किताबें महंगी बिक रही है।
शहर के ही इस्तेयाक खान ने बताया कि वह वर्ग एक और वर्ग फोर का बुक लेने के लिए किताब दुकान पर पहुंचे हैं। दोनों क्लास के किताबों का दाम आठ हजार रुपए लग रहा है। जबकि इसी वर्ग के एनसीईआरटी की बुक छह से सात सौ रुपए में मिल जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस पर कठोर निर्णय लेना चाहिए। जब आगे चल कर सभी स्कूलों में एनसीईआरटी बुक से पढ़ाई होनी है, तो वन क्लास से ही क्यों नहीं, बच्चों को एनसीईआरटी से पढ़ाया जा रहा है। सरकार को जन हित में यह निर्णय लेना चाहिए।
क्लास एनसीईआरटी बुक की कीमत निजी स्कूल के किताबों की कीमत
1 300 3000
2 300 3500-4000
3 400 4000
4 400 4500-5500
5 600 5500-6000
6 600 6000-6500
7 650 6300-6800
8 700 7000-7200
9 900 7000- 8000
10 1000 8000- 9500
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
