मच्छर पचा जा रहे कीटनाशक, फॉगिंग बेअसर: मलेरिया रिसर्च के शोध में खुलासा
पटना।बिहार में मच्छर अब ‘स्मार्ट’ हो गए हैं। पटना के साथ-साथ सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जिलों के मच्छर अब कीटनाशकों को भी आसानी से पचा रहे हैं। शोध के अनुसार, पटना के 80 प्रतिशत मच्छर फॉगिंग के बाद भी नहीं मर रहे हैं। राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (RMRIMS) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मलेरिया रिसर्च के अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मच्छरों ने अपने शरीर के भीतर रसायनों के खिलाफ एक जेनेटिक कवच (L1014F म्यूटेशन) तैयार कर लिया है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, कालाजार और मलेरिया उन्मूलन के दौरान कीटनाशकों के अत्यधिक छिड़काव ने मच्छरों के डीएनए (DNA) को बदल दिया है। मच्छरों के ‘वोल्टेज सेंसिटिव सोडियम चैनल जीन’ में बदलाव होने से उनमें ‘नॉकडाउन रेजिस्टेंस’ (KDR) विकसित हो गया है। अब उनकी बाहरी परत इतनी मोटी हो चुकी है कि रसायन शरीर के भीतर प्रवेश नहीं कर पाते, और यदि थोड़ा अंश चला भी जाए, तो उनका मेटाबॉलिज्म उसे तुरंत न्यूट्रलाइज (बेअसर) कर देता है।
मच्छर क्यों नहीं मर रहे?
म्यूटेशन: डीएनए में बदलाव के कारण पारंपरिक कीटनाशक बेअसर हो गए हैं।
मोटी बाहरी परत: रसायनों को शरीर में घुसने से रोकने के लिए प्राकृतिक सुरक्षा तंत्र।
मेटाबॉलिक रेजिस्टेंस: शरीर के भीतर मौजूद विशेष एंजाइम जहर को निष्क्रिय कर देते हैं।
बिहार में ‘सुपर मॉस्किटो’ के डेंजर जोन
श्रेणी प्रभावित जिले म्यूटेशन का प्रभाव / स्थिति
रेड जोन पटना, सारण, वैशाली, मुजफ्फरपुर फॉगिंग का असर 90% तक खत्म हो चुका है। मच्छर दवाओं के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी हैं।
ऑरेंज जोन भागलपुर, दरभंगा, पूर्णिया, बेगूसराय मच्छर अब दोपहर की गर्मी (40-42°C) और गंदे पानी में भी सक्रिय रहते हैं।
येलो जोन मधेपुरा, सीवान, गया, सहरसा मच्छरों के शरीर में दवाओं को बेअसर करने वाले विशेष एंजाइम विकसित हो गए हैं।
व्यवहार में बदलाव:
पहले मच्छर केवल सुबह और शाम को सक्रिय होते थे, लेकिन अब वे भीषण गर्मी में भी सक्रिय रहते हैं।
साफ पानी में पनपने वाला एडीज मच्छर अब नालियों और गंदगी में भी अंडे दे रहा है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: अगली पीढ़ी में ट्रांसफर हो रही यह ‘ताकत’
“मच्छरों में KDR म्यूटेशन तेजी से बढ़ रहा है। इसका मतलब है कि पारंपरिक कीटनाशक अब बेकार हो रहे हैं। अगर नियंत्रण की रणनीति तुरंत नहीं बदली गई, तो मच्छर जनित बीमारियों को रोकना नामुमकिन हो जाएगा।”— डॉ. विजय कुमार, पूर्व निदेशक, RMRIMS
“चिंता की बात यह है कि मच्छरों ने जो प्रतिरोधक क्षमता विकसित की है, वह अब उनकी अगली पीढ़ी में भी ट्रांसफर हो रही है। यह स्थिति सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद गंभीर है।”— डॉ. वी. कृष्णमूर्ति, वैज्ञानिक (वेक्टर बायोलॉजी)
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
