Samastipur

सपनों पर भारी गैस की किल्लत,समस्तीपुर में छात्रों को गैस रिफिलिंग में भारी मुश्किल 

समस्तीपुर.कमर्शियल गैस की सप्लाई नहीं आने से छात्रों को गैस रिफिलिंग में भारी मुश्किल हो रही है। इस संकट ने शहर में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को असमंजस में डाल दिया है। होटल का खाना महंगा होने के कारण खाया नहीं जा सकता है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पीजी और निजी होस्टल खाली होने लगे हैं और छात्र वापस गांव की ओर रुख कर रहे हैं।छात्रों का कहना है कि पहले जहां गैस 100 से 150 रुपये प्रति किलो में मिल जाती थी, वहीं अब इसकी मिलना ही मुश्किल हो गया है। अधिकांश छात्र पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर का उपयोग करते हैं, जिसे भराना अब उनके अभिभावकों के लिए भारी पड़ रहा है।“पढ़ाई जरूरी है, लेकिन पेट की आग उससे भी बड़ी हकीकत है,” सोनवर्षा चौक पर रह रहे छात्र अविनाश, राहुल और अनिमेष ने व्यथा व्यक्त करते हुए बताया। एकाध जगह चुपके से रिफिलिंग होती भी है तो मनमानी दर वसूली जा रही है।

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स्थानीय स्तर पर कुछ लोग इस संकट को ‘आपदा में अवसर’ में बदलते नजर आ रहे हैं। मजबूरी में छात्र घर जाने को विवश हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब अभिभावकों के लिए गैस की इस समस्या से निकलना मुश्किल है। प्लास्टिक वाले 10 किलो के सिलेंडर की आपूर्ति ठप समस्तीपुर में 10 किलो के प्लास्टिक गैस सिलेंडर की आपूर्ति बंद होने से उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पहले यह सिलेंडर आसानी से उपलब्ध था, लेकिन अब अचानक नहीं मिल रहा। छोटे परिवार और छात्रों के लिए यह किफायती विकल्प था। आपूर्ति ठप होने से महंगे सिलेंडर पर निर्भरता बढ़ गई है। प्रशासन के दावे के विपरीत परेशानी बनी हुई है।

 

छात्रों का गड़बड़ा रहा बजट बिथान, सिंघिया और हसनपुर जैसे सुदूर इलाकों से आए छात्रों का कहना है कि मध्यमवर्गीय परिवार के लिए महीने में सिर्फ गैस पर हजारों खर्च करना नामुमकिन है। मोहनपुर और मुसापुर के लॉजों से पलायन कर रहे छात्रों के दर्द का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे कहते हैं रोटी तो मिलेगी, पढ़ाई का क्या है, वह तो फिर कभी हो जाएगी।

 

रोज-रोज होटल में खाने का खर्च उठाना मुश्किल बिथान, सिंघिया, हसनपुर, विभूतिपुर, बसही भिंडी, मोरवा, ताजपुर समेत कई इलाकों के छात्रों आबिद हुसैन,इलताफ और राकेश ने साफ कहा कि वे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों से आते हैं। ऐसे में महंगे होटल का खर्च उठाना उनके अभिभावकों के बस की बात नहीं है। छात्रों गांव में जलावन से खाना बन जाएगा, पढ़ाई भी किसी तरह हो जाएगी, लेकिन यहां रहना अब मुश्किल है।

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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