दलसिंहसराय शहर में कलश यात्रा के साथ ‘श्रीमद् भागवत कथा’ का हुआ शुभारंभ
दलसिंहसराय शहर में ‘श्रीमद् भागवत कथा’ का शुभारंभ धार्मिक विधि-विधान के साथ हुआ.कथा का आयोजन अशर्फी भवन,अयोध्या धाम (उत्तर प्रदेश) के पूज्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज के पावन सान्निध्य में किया जा रहा है.कार्यक्रम का यजमानत्व नगर के प्रतिष्ठित व्यवसायी रघुनाथ प्रसाद गुप्ता, सरोज गुप्ता एवं उनका परिवार कर रहा है.कथा आरंभ से पूर्व शहर के मनोकामना मंदिर परिसर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई,
जिसमें श्रद्धालु महिलाएं सिर पर कलश रख भजन संकीर्तन करते हुए मुख्य बाज़ार मार्ग से गुजरती हुई अम्बे टॉकिज कैंपस स्थित कथा स्थल तक पहुचीं.गाजे-बाजे, मंगल ध्वनियों और जयघोष से पूरा नगर भक्तिमय हो उठा. इस पावन यात्रा में स्थानीय जनप्रतिनिधि, व्यापारी वर्ग तथा समाजसेवी संगठनों ने सक्रिय भागीदारी निभाई.
कथा स्थल को आकर्षक फूलों, झालरों और रोशनी से सुसज्जित किया गया था.आयोजकों में आशीष कुमार (गोपू जी), डॉ. आनंद कुमार गुप्ता (कन्हैया जी),अश्वनी कुमार (गोल्डी जी),अनुराधा गुप्ता एवं ओम प्रकाश वर्मा ने श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्था की. शाम 5 बजे आरती के साथ स्वामी श्रीधराचार्य जी महाराज की उपस्थिति में कथा का विधिवत शुभारंभ हुआ. महाराज श्री ने प्रथम दिवस के प्रवचन में भागवत पुराण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह मानव जीवन को ईश्वरमय बनाने का मार्गदर्शक ग्रंथ है.
उन्होंने कहा कि जब समाज में नैतिकता, करुणा और भक्ति की चेतना बढ़ती है, तभी सच्चे अर्थों में रामराज्य की स्थापना होती है.पहले दिन की कथा में भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप एवं ब्रज की लीलाओं से संबंधित प्रसंगों का रसपान किया.कथा के दौरान भजनों और कीर्तनों की मधुर गूंज वातावरण में गूँजती रही.महिलाएं पारंपरिक पोशाकों में, बच्चे और युवा वर्ग भक्ति में लीन नजर आए.कथा प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित की जाएगी तथा इसका समापन 13 दिसम्बर (शनिवार) को होगा.आयोजकों के अनुसार इस धार्मिक उत्सव का उद्देश्य समाज में भाईचारा, सद्भावना और धर्म के प्रति आस्था को प्रबल करना है.
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