जिस भाई का अंतिम संस्कार किया, वह जिंदा निकला:नशे की हालत में मिला
पटना.किशनगंज में एक युवक ने अज्ञात शव को अपने मृत भाई समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। जबकि उसका असली भाई पश्चिम बंगाल के पंजीपाड़ा इलाके में नशे की हालत में जीवित मिला।बताया जा रहा है कि युवक तीन दिनों से लापता था और परिजन उसकी तलाश कर रहे थे। इसी बीच शुक्रवार सुबह मोती बाग पुलिस थाने से परिजनों को एक शव मिलने की सूचना दी गई। पहचान के लिए परिजनों को बुलाया गया।
शव की क्षत-विक्षत हालत देखकर परिजनों ने कपड़ों और चेहरे के एक हिस्से के आधार पर उसे अपने भाई के रूप में पहचान लिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने परिजनों के साथ मिलकर शव का अंतिम संस्कार कर दिया।तीन दिन बाद घर लौटे युवक की पहचान मोती बाग थाना क्षेत्र के अमर चौहान के रूप में हुई।
सदर थानाध्यक्ष अभिषेक रंजन ने बताया कि सदर अस्पताल में परिजनों ने शव को अपने भाई के रूप में पहचान की थी। इसके बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया था।शव का अंतिम संस्कार करने के बाद परिजन खुद थाने पहुंचे और बताया कि उनसे पहचान करने में गलती हो गई।खगड़ा तीन नंबर रेलवे फाटक के पास वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से कटकर अज्ञात युवक की मौत हो गई। इसी को अमर चौहान बताया गया।
तीन दिन से लापता, ट्रेन हादसे में मिली लाश
किशनगंज के सदर थाना क्षेत्र के रहने वाले अमर चौहान तीन दिनों से लापता था। परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे। इसी दौरान गुरुवार की देर रात खगड़ा तीन नंबर रेलवे फाटक के पास वंदे भारत स्लीपर ट्रेन से कटकर एक युवक की मौत हो गई।मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने आशंका जताते हुए अमर चौहान के परिजनों को सूचना दी कि पुलिसकर्मियों ने कहा, कि एक डेड बॉडी मिली है, आकर उसकी पहचान करें। सूचना मिलते ही परिजन सदर अस्पताल पहुंचे, जहां शव को पोस्टमॉर्टम के लिए रखा गया था।
क्षत-विक्षत शव की ऐसे हुई पहचान
अस्पताल में परिजनों को जो शव दिखाया गया, वह पूरी तरह क्षत-विक्षत हालत में था। अमर चौहान के भाई ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के दौरान उन्हें शव पूरी तरह नहीं दिखाया गया। केवल साइड से चेहरा देखने पर वह उन्हें अपने भाई जैसा लगा।कपड़े भी मिलते-जुलते थे और मृतक के पास कोई पहचान पत्र नहीं था। इसी आधार पर उन्होंने शव को अपने भाई का मान लिया। चूंकि शव की स्थिति बेहद खराब थी,
इसलिए घर के अन्य सदस्यों को भी नहीं दिखाया गया। इसके बाद परिजनों ने पुलिस की मौजूदगी में शव को अपने भाई के रूप में स्वीकार कर लिया।
हिंदू रीति-रिवाज से कर दिया अंतिम संस्कार
शव की पहचान होने के बाद पुलिस ने पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद शुक्रवार को परिजनों ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शव का अंतिम संस्कार कर दिया।पूरे परिवार में शोक का माहौल था और सभी ने यही मान लिया कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने तक किसी को भी इस बात का अंदेशा नहीं था कि जिस शव को जलाया गया, वह दरअसल किसी और का था।
फोन कॉल ने बदली पूरी कहानी
अंतिम संस्कार के कुछ ही समय बाद परिजनों को मोहम्मद सैफुल नाम के एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने पूरे मामले को पलटकर रख दिया। सैफुल ने बताया कि अमर चौहान जीवित है और पश्चिम बंगाल के पंजीपाड़ा इलाके में मौजूद है।यह सुनते ही परिजनों में खुशी की लहर दौड़ गई। वे तुरंत वहां पहुंचे और अमर चौहान को वापस लेकर आए। परिवार के अनुसार, वह नशे की हालत में वहां पड़ा हुआ था।
घर लौटने के बाद उसे सबसे पहले थाने ले जाया गया, जहां पुलिस ने उसका बयान दर्ज किया। इस तरह साफ हो गया कि परिजनों ने गलती से किसी अज्ञात व्यक्ति के शव को अपना समझकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
अज्ञात शव की यूडी केस दर्ज कर जांच की जा रही
सदर थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार रंजन ने बताया कि सदर अस्पताल में परिजनों ने शव को अपना भाई बताकर पहचान की थी, जिसके बाद पोस्टमॉर्टम कराकर शव उन्हें सौंप दिया गया।अंतिम संस्कार के बाद परिजन खुद थाने पहुंचे और बताया कि पहचान में उनसे गलती हो गई। उन्होंने कहा कि अमर चौहान जिंदा है और पंजीपाड़ा में मिला है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
