Begusarai

तिरंगे में लिपटकर घर लौटा जवान, बेटी बोली- पापा को हॉस्पिटल से वापस लाइये,हुआ अंतिम संस्कार

बेगूसराय के रतनपुर में शुक्रवार की सुबह एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया. तिरंगे में लिपटा बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह का पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर पहुंचा तो चार साल की बेटी दीक्षा गौतम अपने पिता को ढूंढती रही. मासूम बार-बार कहती रही, “पापा ड्यूटी जाने के बाद हॉस्पिटल चले गए, पापा को वहां से लाइये. पापा मुझसे बहुत प्यार करते हैं.” पिता की मौत की सच्चाई से अनजान बच्ची की ये बातें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं.

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जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात 45 वर्षीय बीएसएफ जवान मनीष कुमार सिंह का इलाज के दौरान निधन हो गया था. शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे उनका पार्थिव शरीर रतनपुर स्थित पैतृक आवास वार्ड नंबर-21 पहुंचा. जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर घर पहुंचा, परिवार में चीख-पुकार मच गई. पत्नी रीना कुमारी और दोनों बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था.

 

 

2004 में BSF में हुए थे भर्ती

परिजनों के अनुसार, मनीष कुमार सिंह वर्ष 2004 में बीएसएफ की 157वीं बटालियन में भर्ती हुए थे. इसके बाद से वह लगातार देश की सेवा में जुटे रहे. वर्तमान में उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में थी.

 

ड्यूटी के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उनका इलाज चल रहा था. इसी दौरान उनका निधन हो गया. जवान की मौत की खबर मिलते ही रतनपुर में शोक की लहर दौड़ गई. सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पैतृक आवास पहुंचने लगे.

 

 

मनीष की दो बेटियां हैं

मनीष के परिवार में पत्नी रीना कुमारी और दो बेटियां हैं. बड़ी बेटी 13 वर्षीय मुस्कान गौतम नौवीं कक्षा में पढ़ती है, जबकि छोटी बेटी दीक्षा गौतम चार साल की है और प्ले स्कूल जाती है.पिता के पार्थिव शरीर के सामने दीक्षा बार-बार उन्हें वापस लाने की बात कहती रही. उसकी मासूम पुकार सुनकर वहां मौजूद लोग भी अपने आंसू नहीं रोक सके. किसी के पास उस छोटी बच्ची को यह समझाने के लिए शब्द नहीं थे कि उसके पिता अब कभी वापस नहीं आएंगे.

 

 

पत्नी-बेटी ने दिया जवान को कंधा

मनीष कुमार सिंह की अंतिम यात्रा का दृश्य भी बेहद भावुक रहा. पत्नी रीना कुमारी ने अपने पति के पार्थिव शरीर को कंधा देकर अंतिम विदाई दी. वहीं बड़ी बेटी मुस्कान गौतम ने भी पिता के पार्थिव शरीर को कंधा दिया.

 

मां और बेटी को पति और पिता को अंतिम विदाई देते देख वहां मौजूद लोगों की आंखें छलक उठीं. परिवार के लिए यह ऐसा पल था, जिसकी पीड़ा शायद जीवनभर उनके साथ रहेगी.

 

 

हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए लोग

रतनपुर से जवान की अंतिम यात्रा निकली तो बड़ी संख्या में स्थानीय लोग हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए. लोगों ने भारत माता की जय और मनीष कुमार सिंह अमर रहें के नारों के साथ अपने वीर जवान को अंतिम सलाम किया.

 

अंतिम यात्रा रतनपुर से सिमरिया गंगा घाट के लिए रवाना हुई. रास्ते में जगह-जगह लोग जवान के अंतिम दर्शन के लिए खड़े रहे. रतनपुर से सिमरिया तक लोगों की भीड़ देखने को मिली. शव यात्रा के पहुंचने पर कई जगह लोगों ने फूलों की बारिश कर जवान को श्रद्धांजलि दी.

 

अंतिम यात्रा में शामिल हुए लोग

अंतिम यात्रा के दौरान बेगूसराय पुलिस की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे. सिमरिया गंगा घाट पहुंचने के बाद आसपास के इलाकों से भी बड़ी संख्या में लोग वहां जुट गए. हर कोई देश की सेवा करने वाले अपने इलाके के इस जवान को अंतिम विदाई देने पहुंचा था.

 

सिमरिया गंगा घाट पर गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार

सिमरिया गंगा घाट पर मनीष कुमार सिंह का अंतिम संस्कार किया गया. तिरंगे में लिपटे जवान को अंतिम विदाई देते समय परिवार के साथ पूरा इलाका भावुक नजर आया.

 

एक ओर देश की सेवा में अपना जीवन समर्पित करने वाले मनीष कुमार सिंह को सम्मान और गर्व के साथ अंतिम विदाई दी जा रही थी, वहीं दूसरी ओर उनकी चार साल की बेटी की मासूम आवाज लोगों के जेहन में गूंज रही थी, “पापा मुझसे बहुत प्यार करते हैं.”

 

पूरे इलाके में शोक

मनीष की अंतिम विदाई सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे रतनपुर के लिए भावुक कर देने वाला पल रहा. एक परिवार ने अपना बेटा, पति और पिता खो दिया, वहीं इलाके ने देश की सेवा करने वाले अपने एक जवान को हमेशा के लिए विदा कर दिया.

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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