पोल और बैरिकेडिंग को बताया हादसे की वजह, अशोकधाम हादसा में अफसरों को क्लीन चिट
लखीसराय.भीड़ नियंत्रण में फेल प्रशासनिक व्यवस्था पर रिपोर्ट पूरी तरह मौन; बिजली विभाग और भवन प्रमंडल पर मढ़ा मौतों का दोष.अशोकधाम मंदिर में बीते सोमवार (17 अगस्त) को हुई दर्दनाक भगदड़ की जिलास्तरीय जांच रिपोर्ट आ गई है। एडीएम नीरज कुमार की अध्यक्षता में गठित जांच दल ने अपनी रिपोर्ट डीएम शैलेंद्र कुमार को सौंप दी है।
इस रिपोर्ट में हादसे के लिए जिम्मेदार बड़े प्रशासनिक अफसरों या मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों को पूरी तरह बचा लिया गया है। रिपोर्ट में प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट को क्लीन चिट देते हुए सारा दोष बिजली विभाग और भवन प्रमंडल पर मढ़ दिया गया है।जांच दल ने बिजली का पोल गिरने और कमजोर बैरिकेडिंग को हादसे की पहली और प्रमुख वजह माना है। रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर परिसर में बिजली का पोल गिरने से श्रद्धालुओं के बीच अचानक अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद भीड़ का दबाव तेजी से बढ़ा।
बैरिकेडिंग कमजोर थी वह भीड़ के दबाव को झेल नहीं सकी। जांच टीम ने इन दोनों विभागों को घोर लापरवाही का दोषी पाया है। पोल की मजबूती और बैरिकेडिंग की स्थिति को लेकर विभागीय जिम्मेदारी सही से तय नहीं की गई थी। पूरी रिपोर्ट में भीड़ को नियंत्रित करने में प्रशासनिक विफलता पर कोई चर्चा नहीं की गई है।
जांच रिपोर्ट की 5 बड़ी बातें
अफसरों को अभयदान: मंदिर परिसर और व्यवस्था से जुड़े किसी भी प्रशासनिक अधिकारी या ट्रस्ट पदाधिकारी की प्रत्यक्ष लापरवाही तय नहीं की गई।
दो विभागों पर ठीकरा: भवन प्रमंडल और बिजली विभाग को हादसे के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार और प्रथम दृष्टया दोषी माना गया।
तात्कालिक कारणों पर फोकस: हादसे के गहरे प्रशासनिक कारणों की जांच करने के बजाय केवल पोल गिरने और कमजोर बैरिकेडिंग पर ही ध्यान केंद्रित रखा गया।
सात बिंदुओं की पड़ताल: जांच टीम ने बिजली पोल गिरने की वजह, तैनात कर्मियों की भूमिका, हादसे को रोकने के उपायों सहित कुल सात बिंदुओं को परखा।
सुरक्षा बलों पर चुप्पी: भगदड़ के समय प्रवेश और निकास मार्ग पर तैनात बलों की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
जांच टीम ने अशोकधाम हादसे की रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। रिपोर्ट में घटना के कारणों के साथ संबंधित बिंदुओं को शामिल किया गया है। अब डीएम के स्तर से रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद जिम्मेदारी और कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी। – नीरज कुमार, एडीएम, लखीसराय
रिपोर्ट में छिपे अनसुलझे सवाल
जांच रिपोर्ट ने हादसे के सबसे महत्वपूर्ण पहलू ‘भीड़ प्रबंधन’ को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। हादसे के समय मंदिर में श्रद्धालुओं की कुल संख्या कितनी थी और प्रवेश मार्ग पर भीड़ को रोकने के लिए क्या योजना थी, इसका कोई आकलन रिपोर्ट में नहीं है।बैरिकेडिंग के कमजोर होने की बात तो कही गई है, लेकिन इतनी बड़ी भीड़ के आने की पूर्व सूचना के बावजूद वहां सुरक्षा और पुलिस बल के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे, यह सवाल अनुत्तरित ही रह गया है। जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं और घायलों के परिजनों के लिए यह रिपोर्ट न्याय से दूर केवल कागजी खानापूर्ति नजर आती है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
