समस्तीपुर:बरसात में मुर्गी फार्म की सफाई जरूरी, लापरवाही पड़ सकती है भारी:डॉ. तिवारी
समस्तीपुर।पूसा.बरसात के मौसम में मुर्गीपालन करने वाले किसानों को मुर्गियों के साथ उनके आवासीय परिसर की साफ-सफाई, रखरखाव पर खास ध्यान देना होगा। थोड़ी लापरवाही से उत्पादन घट सकता है। पूरे फार्म में संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है। यह जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान सह वरीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. आर.के. तिवारी ने दी। उन्होंने बताया कि बारिश में आर्द्रता बढ़ती है। इससे मुर्गियों में कॉक्सीडियोसिस, डायरिया, श्वसन रोग, पॉक्स जैसी संक्रामक बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। वैज्ञानिक सलाह के अनुसार प्रबंधन करने पर बीमारी से बचाव होगा। उत्पादन भी बेहतर मिलेगा। डॉ. तिवारी ने कहा कि फार्म में जलजमाव नहीं होने दें।
शेड हमेशा सूखा रखें। बारिश से बचाव के लिए फार्म की खिड़कियों को अस्थायी रूप से ढकें। कुन्नी गीली हो जाए तो तुरंत बदलें। बारिश शुरू होने से पहले मुर्गी फार्म की मरम्मत करा लें। किसी भी स्थिति में बारिश का पानी शेड के अंदर न जाए। मुर्गी शेड जलजमाव वाले स्थान से कम से कम पांच मीटर दूर होना चाहिए। आसपास पानी जमा हो रहा हो तो तुरंत निकासी कराएं। फार्म परिसर की नियमित सफाई जरूरी है। झाड़ियां और गंदगी से संक्रामक कीट पनपते हैं। अधिक बारिश होने पर शेड की खिड़कियों को जूट की बोरी, तिरपाल या प्लास्टिक शीट से ढक दें। मौसम साफ होने पर इन्हें हटा दें।
डॉ. तिवारी ने बताया कि बरसात में मुर्गियों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी करें। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर जोर दें। मुर्गियों को स्वच्छ पानी देना जरूरी है। एक हजार लीटर पानी में दो ग्राम ब्लीचिंग पाउडर मिलाएं। निर्धारित मात्रा में क्लोरीन टैबलेट भी मिलाई जा सकती है। ठंडे और नम वातावरण में अधिक ऊर्जा युक्त संतुलित आहार दें। विकास प्रभावित नहीं होगा। कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों या नजदीकी पशु चिकित्सकों के संपर्क में रहें। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार दवाएं दें। जरूरी टीकाकरण कराएं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। उत्पादन बेहतर रहेगा।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
