प्रेमी-प्रेमिका को फांसी की सजा:कोर्ट ने कहा- मां बच्चों की परवरिश करती है तुमने हत्या की.
पटना।मधुबनी.’कोर्ट ने न्याय किया है, अब बस उन दोनों को जल्द से जल्द फांसी पर चढ़ाया जाए, ताकि मेरे दोनों बच्चों की आत्मा को शांति मिले। उसे आज नहीं तो कल सजा मिलनी ही थी। 2018 में मेरी शादी अनीता से हुई। मुझे इस बात का अंदेशा भी नहीं था कि वो मेरे बच्चों को इतनी बेरहमी से मार देगी।
मैं काम के सिलसिले में उन दिनों कोलकाता में रहता था। जब मुझे इस घटना की सूचना मिली तो मैं तुरंत घर पहुंचा था। तबतक सब कुछ बिखर चुका था।’ये दर्द है मधुबनी के झंझारपुर के अंधरामठ थाना क्षेत्र के नहरी गांव निवासी प्रमोद कुमार साफी का, जो अपने बच्चों को याद करते हुए रो पड़े….
दरअसल, दो बच्चों के हत्याकांड में झंझारपुर व्यवहार न्यायालय ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। लव अफेयर में बाधा बन रहे अपने ही 4 साल के बेटे प्रिंस कुमार और डेढ़ साल की बेटी सृष्टि कुमारी की मां अनिता कुमारी ने प्रेमी जय प्रकाश मंडल के साथ मिलकर हत्या कर दी, फिर दोनों शवों को बलान नदी में फेंक दिया था।
इस मामले में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय अभिषेक रंजन ने आरोपी मां और उसके प्रेमी को फांसी की सजा सुनाई है। जज ने फैसला सुनाते हुआ कहा- ‘मां पर अपने बच्चों की सुरक्षा और परवरिश की जिम्मेदारी थी, लेकिन उसने अपने प्रेमी के साथ मिलकर दोनों मासूमों की निर्मम हत्या कर दी।’कोर्ट ने इस अपराध को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मानते हुए फांसी की सजा दी है। झंझारपुर कोर्ट के इतिहास में यह पहला केस है, जिसमें दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।
कोर्ट ने 50-50 हजार का लगाया जुर्माना
कोर्ट ने दोनों दोषियों को IPC की धारा 302 के तहत फांसी की सजा सुनाने के साथ साथ 50-50 हजार रुपए का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर छह-छह महीने की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।वहीं, धारा 201/34 के तहत सात-सात साल के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपए जुर्माना लगाया है। जुर्माना नहीं देने पर तीन-तीन महीने की अतिरिक्त कारावास का आदेश दिया है।
अपराध अत्यंत क्रूर, अमानवीय और समाज को झकझोरने वालाः कोर्ट
कोर्ट में सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक देव शंकर झा ने इस घटना को अंतरात्मा को झकझोर देने वाला अपराध बताते हुए कहा कि आरोपियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।कोर्ट ने गवाहों और पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए सबूतों के आधार पर दोनों को दोषी माना है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह अपराध अत्यंत क्रूर, अमानवीय और समाज को झकझोर देने वाला है। इस कारण यह मामला ‘दुर्लभतम से भी दुर्लभ’ (Rarest of Rare) श्रेणी में आता है, जिसमें मृत्युदंड ही न्यायोचित सजा है।
साथ रहने की चाहत में रची बच्चों की हत्या की साजिश
3 जुलाई 2023 को प्रमोद की पत्नी अनीता अपने दोनों मासूम बच्चों को साथ लेकर मायके जाने के बहाने घर से निकली। लेकिन, बलान नदी के खाप पुल के पास जयशंकर मंडल मिला और यहीं दोनों बच्चों की गला घोंटकर हत्या के बाद शवों को नदी में फेंक दिया गया।पुल के पास कुछ ग्रामीण खेतों में काम कर रहे थे। इन लोगों को दोनों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। शक होने पर लोगों ने पीछा कर अनीता देवी और जयशंकर मंडल को पकड़ लिया। इसके बाद दोनों की पिटाई की और पुलिस के हवाले कर दिया।
हत्या के 7 दिन बाद मिला बेटी का शव
इस मामले में प्रमोद कुमार साफी की शिकायत पर घोंघरडीहा थाना में कांड संख्या 114/2023 दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर शव की तलाश शुरू की। घटना के 7 दिनों बाद 10 जुलाई 2023 को सृष्टि कुमारी का शव मिला। लेकिन बेटे प्रिंस कुमार का शव आज तक नहीं मिला है।
किसी भी रिश्ते से ऊपर मासूम बच्चों का जीवन
कोर्ट का फैसला आने के बाद लोगों ने कहा कि किसी भी रिश्ते, स्वार्थ या प्रेम संबंध से ऊपर मासूम बच्चों का जीवन और उनकी सुरक्षा है। कोर्ट का फैसला समाज में एक नजीर के रूप में देखा जा रहा है।घटना के दिन स्थानीय लोगों ने अनीता की पिटाई की थी, तब उसे हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था।
‘दोनों बच्चों की हत्या का दुख अब तक है’
प्रमोद ने बताया कि इस हत्याकांड के बाद दूसरी शादी कर ली है। मेरा 6 महीने का एक बेटा है। इसके बावजूद पहली पत्नी की करतूत और अपने मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत का जख्म आज भी दिल में है।फैसले के बाद उन्होंने अदालत के प्रति आभार जताते हुए कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास था कि देर-सवेर न्याय जरूर मिलेगा। अब मेरी बस यही मांग है कि सजा जल्द से जल्द मिल जाए।’
कोर्ट का फैसला न्यायसंगत है
विशेष लोक अभियोजक के सहयोगी अधिवक्ता जगदीश प्रसाद यादव ने कहा कि जिन बच्चों के पालन-पोषण और सुरक्षा की जिम्मेदारी मां पर होती है। उसी मां ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर दो मासूमों की गला घोंटकर हत्या कर दी। यह जघन्य अपराध है और कोर्ट ने इस मामले में न्यायसंगत फैसला सुनाया है।वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता बालेश्वर गुदमैता और शिवचंद्र कुमार ने कहा कि न्यायालय का फैसला सर्वोपरि है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय अभिषेक रंजन ने हत्याकांड को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का मामला मानते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।
फैसले के बाद दोनों दोषियों को झंझारपुर उपकारा से किसी केंद्रीय कारागार में ट्रांसफर किया जाएगा। इसकी वजह है कि उपकारा में पांच साल से अधिक सजा पाने वाले कैदियों को रखने का प्रावधान नहीं है।कानूनी प्रक्रिया के तहत फांसी की सजा से जुड़े सभी आदेश, निर्णय और अभिलेख पटना हाईकोर्ट भेजे जाएंगे। न्यायालय ने विशेष दूत के माध्यम से सभी दस्तावेज हाईकोर्ट भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कोर्ट ने 28 पन्नों के निर्णय में दोषी ठहराया
हाईकोर्ट की पुष्टि के बाद ही फांसी की सजा पर अंतिम मुहर लगेगी और आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। न्यायालय के 28 पृष्ठों के निर्णय में दोनों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और 34 के तहत दोषी ठहराया गया है। दोनों अभियुक्त 10 जुलाई 2023 से झंझारपुर उपकारा में बंद हैं।
अब पढ़िए दोनों की प्रेम कहानी…
ग्रामीणों ने बताया कि साल 2018 में प्रमोद कुमार साफी की शादी हुई। शादी के कुछ दिनों के बाद वो कोलकाता चला गया। इसके बाद प्रमोद की पत्नी घर में अकेले रह रही थी। इसी दौरान गांव के बाजार में उसकी मुलाकात जयप्रकाश मंडल से हुई। फिर दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगीं।अनीता ने जयप्रकाश के साथ रहने की इच्छा जताई, लेकिन इस रिश्ते में दोनों बच्चे बाधा बन रहे थे। फिर दोनों ने बच्चों को रास्ते से हटाने की साजिश रची और दोनों की हत्या कर दी।सोर्स :दैनिक भास्कर।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
