बिहार की सबसे बड़ी काली प्रतिमा,400 सालों से पीपल के नीचे होती है 32 फीट ऊंची मूर्ति की स्थापना
पटना.भागलपुर जिले के बहवलपुर गांव में दिवाली पर बिहार की सबसे बड़ी 32 फीट ऊंची काली प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यह परंपरा पिछले चार सौ वर्षों से चली आ रही है। इस वर्ष 20 अक्टूबर की रात 12 बजे प्रतिमा को वेदी पर स्थापित किया जाएगा।
दर्शन के लिए बिहार, झारखंड सहित अन्य क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। रात 12 बजे से सुबह सात बजे तक माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। महाकाली बहवलपुर पूजा समिति के मेढ़पति अजय सिंह ने बताया कि पूरे बिहार में यह सबसे बड़ी प्रतिमा स्थापित होती है। यहां 1001 पाठे की बलि दी जाती है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार लगभग चार सौ वर्ष पूर्व गांव के ही काली सिंह नामक व्यक्ति को मां काली ने सपने में दर्शन दिए थे। मां ने उन्हें पीपल के पेड़ के नीचे स्थापित करने का निर्देश दिया था। शुरुआत में काली सिंह ने इसे हल्के में लिया, जिसके बाद गोडियानी नदी में स्नान करते समय वे बेहोश हो गए। होश आने पर उन्होंने गांव में मां काली को स्थान दिया।
बगीचे में मां का दरबार
पीपल के पेड़ के नीचे मां का पिंड स्थापित है। चारों ओर आम का बगीचा है। बगीचा रहने के कारण यहां का माहौल भक्ति और शांति से परिपूर्ण है।मंदिर प्रांगण मे पूजा पंडाल और रंग बिरंगे लाइट से सजाया गया है। यहां तीन दिनों तक मेला का आयोजन होता है।
40 साल से प्रतिमा बना रहे हैं रूदल
गांव में स्थापित होने वाली बम काली की प्रतिमा का निर्माण गांव के ही रूदल सिंह वर्षों से करते आ रहे है। उन्होंने कहा कि करीब 40 साल से लगातार प्रतिमा का निर्माण कर रहे हैं। इसके पहले मेरे पूर्वज करते थे। अब अपने परिवार के तीन सदस्यों के साथ काली पूजा के दो माह पूर्व से ही निर्माण मे जुट जाते हैं।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
