Muzaffarpur

यूक्रेन से सलामत वतन वापसी पर मां ने बेटे को सीने से लगाया

मुजफ्फरपुर।

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रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच से निकल कर शहर का लाल उज्ज्वल गुरुवार रात सकुशल घर लौट आया। मेडिकल का छात्र उज्ज्वल जब बैरिया स्थित अपने घर पहुंचा ताे देखते ही मां ने सीने से लगा लिया। आरती उतार उसका स्वागत किया। उसके आने का इंतजार परिवार के सदस्य के साथ शुभचिंतकाें काे भी था। युद्ध शुरू हाेने से पहले यूक्रेन छाेड़ने के लिए हिदायत मिल रही थी।

 

उस वक्त मेरे ओडेसा सिटी में बहुत ज्यादा खाैफ का माहाैल नहीं था। ओडेसा नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से काेई छात्र नहीं निकला ताे मैं भी रुका रहा। जब 24 फरवरी से युद्ध शुरू हुआ तब लगा कि गलत हाे गया। डर से हमलाेग सप्ताह भर का राशन खरीद घराें में कैद हाे गए थे। स्टूडेंट काउंसिल से संपर्क कर हमलाेगाें ने बस का इंतजाम कर लिया।

 

 

तीन बसाें से 250 छात्र राेमानिया पहुंचे तब लगा कि नई जिंदगी मिल गई। एनजीओ के सदस्य रास्ते में चाय-नास्ता का इंतजाम भी कर रहे थे। नंबर आने पर पहले दिल्ली फिर फ्लाइट से देर शाम पटना पहुंचे। कुछ दिन और यूक्रेन से निकलने में देरी हाेती ताे शायद बहुत देर हाे जाती। आ ताे गए, लेकिन खाैफनाक मंजर से उबरना अब भी मुश्किल है। उधर, बिहार भाजपा ओबीसी माेर्चा के प्रदेश प्रवक्ता साहू भूपाल भारती ने कहा कि उज्ज्वल की वापसी में राेमानिया से लेकर केंद्र सरकार सभी की अहम भूमिका रही।

 

ट्रेसलेस 12 छात्राें का पता चला दो अब भी खारकीव में फंसे हैं

 

यूक्रेन में रूसी हमले के बाद ट्रेसलेस 12 छात्राें के बारे में पता चल गया है। सभी सुरक्षित हैं, जिनके वतन वापसी का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन, 2 छात्र अब भी युद्ध में खासा प्रभावित खारकीव में फंसे हैं। इनमें श्यामल मणि एवं विवेक प्रियम शामिल हैं। परिजनाें के साथ ही प्रशासन के अधिकारियाें ने भी दाेनाें से बात की है।

 

छात्राें ने बताया कि बमबारी हाेने के कारण डरे-सहमे ताे हैं ही, सुरक्षा के लिए बंकर में छिपे हैं। खाने-पीने की भी दिक्कत हाे रही है। इस बीच, राहत की बात यह रही कि गुरुवार काे भी 4 छात्राें की वतन वापसी हाे गई। इस तरह कुल 44 में से अब तक 17 की वापसी हाे चुकी है। जबकि, शेष 27 में से 3 ऋषि करण, यशस्वी, मनाेज कुमार पाेलैंड में, 2 चेकाेस्लाेवाकिया में एवं 20 राेमानिया में हैं।

 

 

यूक्रेन से मुशहरी के आनंद मोहन व कांटी के योगेश सकुशल आए

 

मुशहरी/कांटी/मीनापुर | रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच 72 घंटे का सफर तय कर गुरुवा की शाम एमबीबीएस द्वितीय वर्ष का छात्र आनंद मोहन मुशहरी प्रखंड अंतर्गत सुतीहारा गांव पहुंचा। घर पहुंचने से पहले उसने पास के ही गांव बादुर छपरा स्थित बाबा दूधनाथ महादेव मंदिर में माथा टेका।

 

मां अनीता देवी और दादी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आनंद मोहन ने बताया कि यूक्रेन में आपातकाल लागू होने के बाद वहां की स्थिति काफी भयावह हो चुकी है। बस से 13 घंटे में करीब 650 किमी की दूरी तय कर यूक्रेन-रोमानिया बाॅर्डर से 10 किलोमीटर पहले पहुंचा।

 

 

भाई-बहन रितुराज व ऋचा सिंह वतन लौटे

 

साहेबगंज | यूक्रेन से युद्ध की विभीषिका झेल कर वापस अपने वतन लौटे रितुराज एवं ऋचा सिंह काफी खुश हैं।

 

पोलैंड से दिल्ली सुबह 11 बजे पहुंचे दोनों भाई-बहन ने बताया कि भारत में आकर काफी अच्छा महसूस कर रहे हैं। दोनों भाई-बहन ने बताया कि अभी 5-6 माह यूक्रेन जाने का कोई प्रोग्राम नहीं है। बाकी बता नहीं सकते, कब जाना होगा।

 

 

गोली की आवाज से डर बढ़ता जा रहा था

 

यूक्रेन में फंसे एमबीबीएस छात्र योगेश कुमार गुरुवार की शाम अपने घर पहुंचे। योगेश ने बताया कि अब भी सैकड़ों छात्र यूक्रेन में फंसे हैं। रोमानिया एयरबेस में बिताए 4 दिनों के बारे में चर्चा करते हुए योगेश ने बताया कि बॉर्डर के उस पार से लगातार गोली-बारूद की आवाजें आ रही थीं, जिससे डर बढ़ता जा रहा था।

 

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Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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