10 से 17 जुलाई तक लंगोट मेला:उमड़ेगी लाखों श्रद्धालुओं की भीड़
पटना.नालंदा.पंचाने नदी के तट पर स्थित बाबा मणिराम अखाड़ा एक बार फिर आस्था के महाकुंभ की तैयारी में जुट गया है। बिहार शरीफ शहर के दक्षिणी भाग में पवित्र स्थल पर 10 से 17 जुलाई तक आयोजित होने वाले लंगोट मेले को लेकर व्यापक तैयारियां चल रही हैं।
मंदिर परिसर में लिपाई-पुताई का काम पूरा हो चुका है। श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न प्रकार के झूले और दुकानें सजाई जा रही हैं। यह मेला केवल एक सामान्य आयोजन नहीं, बल्कि 700 वर्षों से भी अधिक पुरानी अटूट आस्था का जीवंत प्रतीक है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इस दरबार से कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता।सदियों पुरानी मान्यता के अनुसार, मेले की औपचारिक शुरुआत पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से बाबा की समाधि पर प्रथम लंगोट चढ़ाने के साथ होगी। इसी पल से “बाबा मणिराम की जय” के जयघोष से पूरा शहर गुंज उठेगा। अगले सात दिनों तक न केवल जिले के कोने-कोने से, बल्कि प्रदेश भर से लाखों श्रद्धालु बाबा की समाधि पर लंगोट चढ़ाकर अपनी मनोकामनाएं मांगेंगे।
राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री तक पहुंचे हैं यहां
इस पवित्र स्थल की महिमा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां मनोकामना पूर्ति के लिए आने वालों में पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे कई राष्ट्रीय नेता शामिल हैं। यह तथ्य इस स्थान की व्यापक स्वीकार्यता और धार्मिक महत्व को दर्शाता है।
785 साल पुराना इतिहास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, संत शिरोमणि बाबा मणिराम का आगमन 1238 ईस्वी में अयोध्या से इस स्थान पर हुआ था। उन्होंने पिसत्ता घाट को अपनी तपोस्थली बनाया और “स्वस्थ मन के लिए स्वस्थ तन” का संदेश देते हुए कुश्ती का अखाड़ा स्थापित किया। वर्ष 1300 में उन्होंने यहीं पर जीवित समाधि ली थी। इस प्रकार यह स्थान 785 वर्षों से निरंतर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
13 वर्षों से जल रही अखंड ज्योति
मंदिर परिसर की एक विशेष बात यहां 13 वर्षों से अनवरत जल रही अखंड ज्योति है। श्री बाबा मणिराम अखाड़ा न्यास समिति के उपाध्यक्ष अमरकांत भारती ने बताया कि वर्ष 2012 में अयोध्या की बड़ी छावनी से यह पवित्र ज्योति लाई गई थी, जो तब से निरंतर प्रज्ज्वलित है। यह ज्योति निरंतरता और आस्था के अटूट रिश्ते का प्रतीक बन गई है।
इस बार होंगे विशेष आकर्षण
न्यास समिति के उपाध्यक्ष अमरकांत भारती ने बताया कि इस वर्ष मेले को और भी भव्य बनाने की व्यापक तैयारी की गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस मेले का उद्घाटन करने की संभावना है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष पंडाल, ठहरने की उचित व्यवस्था और 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।सुरक्षा की दृष्टि से पूरे मेला क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया गया है। मेले की समाप्ति पर पहली बार बनारस के पंडितों द्वारा भव्य गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा, जो एक नया आकर्षण होगा।
मनोरंजन और व्यापार की व्यवस्था
श्रद्धालुओं के मनोरंजन के लिए बच्चों के लिए ड्रैगन, ब्रेक डांस और टावर झूले लगाए जा रहे हैं। महिलाओं के लिए श्रृंगार की विविध दुकानें और स्थानीय व्यंजनों के लिए तरह-तरह के चाट-पकौड़ों के स्टॉल भी व्यापक रूप में स्थापित किए जा रहे हैं।मेले का संपूर्ण प्रबंधन अनुमंडलाधिकारी की अध्यक्षता वाली न्यास समिति द्वारा किया जाता है। यह समिति प्रत्येक वर्ष श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम करती है और मेले की सफलता सुनिश्चित करती है।आस्था के इस महाकुंभ में शामिल होने के लिए देश भर से श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। 700 से अधिक वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत और प्रासंगिक है, जितनी कभी थी।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
