बेगूसराय में गंगा में समाई 300 एकड़ जमीन:हर दिन 200 मीटर कटाव…
बेगूसराय.गंगा नदी का जलस्तर अभी भले ही खतरा के निशान से नीचे है। लेकिन गंगा अपने सबसे रौद्र और विनाशकारी रूप में नजर आ रही है।बेगूसराय के मटिहानी प्रखंड क्षेत्र स्थित महेंद्रपुर गांव में गंगा के भीषण कटाव ने भारी तबाही मचा रखी है। नदी की उफनती धारा देखते ही देखते किसानों की उपजाऊ जमीन को अपने आगोश में लेती जा रही है।कटाव स्थल का वीडियो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। जिसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि नदी किनारे की हरी-भरी जमीन ताश के पत्तों की तरह ढहकर पानी में विलीन होती दिख रही है।गंगा का बहाव कितना उग्र और जानलेवा हो चुका है। नदी के किनारे हरी घास से ढकी जमीन में पहले बड़ी-बड़ी दरारें पड़ती हैं।
किसानों का भविष्य अंधकारमय हो गया
उसके बाद महज 5 से 10 सेकंड के भीतर मिट्टी का विशालकाय टीला कटकर उफनती नदी में समा जाता है। पानी के प्रचंड वेग के कारण कटाव की रफ्तार इतनी तेज है कि देखते ही देखते कई फीट जमीन का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है। स्थानीय ग्रामीण इस भयानक तबाही को देखकर खौफ और लाचारी जता रहे हैं।
महेंद्रपुर गांव सहित आसपास के गांव और मटिहानी प्रखंड के किसान हर साल गंगा के इस तांडव का दंश झेलने को मजबूर हैं।उपजाऊ कृषि भूमि के नदी में समा जाने से स्थानीय किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
सैकड़ों बीघा लहलहाती और उपजाऊ जमीन गंगा के पेट में समा चुकी है, जिससे किसानों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
कटाव की जद में रिहायशी मकान भी आ सकते हैं
कटते खेत के कारण पशुपालकों के सामने चारे की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है। कटाव की रफ्तार अगर इसी तरह जारी रही, तो जल्द ही कटाव की जद में गांव की घनी आबादी और रिहायशी मकान भी आ सकते हैं, जिससे ग्रामीणों को पलायन करना पड़ सकता है।इस खौफनाक मंजर के बाद महेंद्रपुर समेत मटिहानी के तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के बीच भारी दहशत और आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग,
स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री, बेगूसराय जिला प्रशासन और विधायक से तत्काल प्रभाव से बचाव कार्य चलाने की मांग की है। कटाव स्थल पर तुरंत मिट्टी से भरे जियो-बैग और पत्थरों की पिचिंग कराई जाए।
जल संसाधन विभाग की टीम को मौके पर
नदी की धारा को आबादी से दूर मोड़ने के लिए आपातकालीन स्पर्स का निर्माण किया जाए। जल संसाधन विभाग की टीम को मौके पर तैनात कर 24 घंटे स्थिति पर पैनी नजर रखी जाए।गंगा किनारे खड़े बिजली के टावर भी सीधी तबाही की जद में आ चुके हैं। समय रहते कटाव को नहीं रोका गया, तो ये टावर नदी में जमींदोज हो सकते हैं। जिससे विद्युत आपूर्ति ठप होने का खतरा है।राहुल कुमार बताते हैं कि गंगा की धारा महेंद्रपुर को इस तरह से कमजोर कर रही है कि रात-दिन डर के साए में गुजारने को मजबूर हैं। हर दिन 200 मीटर कटाव हो रहा है।हम सबकी ऐसी स्थिति है कि है रात दिन सो नहीं पा रहे हैं। हमेशा देखते रहते हैं कि पता नहीं घर की बारी कब आ जाए। किसान अपना खून पसीना एक करके घर बनाते हैं, वह घर कटाव में गिर जाएगा।
गंगा के कटाव से कृषि योग्य भूमि नदी में समा रहा
हमारे गांव की रोजी-रोटी खेती किसानी पर निर्भर है। यहां रात दिन गंगा के कटाव से कृषि योग्य भूमि नदी में समा रहा है। देखने वाला कोई नहीं है,भारत सरकार और बिहार सरकार किसानों के समर्थन में बार-बार योजना की बात करती है। लेकिन यहां किसानों की लहलहाती फसल गंगा में समा रही है।लेकिन कोई देखने वाला नहीं है, हम लोगों का घर चार बार कट चुका है और पांचवीं बार भी कटाव सकता है।हमारे अंदर दर्द और डर दोनों चीज बना हुआ है कि पता नहीं कब क्या हो जाएगा। चुनाव के समय जो चुनकर जनप्रतिनिधि जाते हैं, वह देखने सुनने के लिए नहीं आते हैं कि गांव की क्या स्थिति है।
चार दिन पहले विधायक बोगो सिंह आए थे, देखकर चले गए। कोई देखने तैयार नहीं है कि जनता किस तरह दर्द झेल रही है।कार्यपालक अधिकारी सहित अन्य पदाधिकारी आए थे। आश्वासन देकर गए की कटाव रोका जाएगा। लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा है।
कटाव की स्थिति भयंकर, रात में नींद भी नहीं होता
ग्रामीण अजय प्रताप सिंह कहते हैं कि कटाव की स्थिति बहुत भयंकर है। दहशत में जी रहे हैं, रात में भी नींद नहीं होता है। दौड़ दौड़ कर देखने आते हैं की कटाव की स्थिति कहां तक पहुंची है।यहां पहले भी बोल्डर पीचिंग किया गया था, लेकिन वह कहीं धंसा हुआ है, तार का जाल टूट चुका है, जिसके कारण ग्रामीण और परेशान हैं। किसान इस देश की रीढ़ हैं, कोरोना काल में भी इस देश को बचाने वाला किसान ही है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
