NEET:बिहार की जेलों से बाहर आए 350 छात्र:बोले- अपराधियों जैसा व्यवहार हुआ, पुलिस वाले गाली देते थे
पटना.‘जेल में हालत बहुत खराब थी। मुझे पीटा गया, परेशान किया गया। छात्रों को अपराधियों के साथ रखा गया। यह सही नहीं है। सरकार ने हमें छोड़ा है। मुझे ये भी नहीं पता कि मुझ पर क्या आरोप लगाए गए। पुलिस की 18 गाड़ी आई थी और मुझे घर से उठाकर ले गई।’
पटना विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष शांतनु शेखर इतना कहकर थोड़ी देर के लिए चुप जाते हैं। उनकी आंखों में पटना के बेऊर जेल में बिताए गए खौफनाक पलों की यादें ताजा हैं। फिर कहते हैं, ‘22 तारीख से हमलोग जेल में थे। यहां सभी छात्रों को अलग-अलग रखा गया था।’ शांतनु शेखर बुधवार को बेऊर जेल से बाहर आए। यहां 144 प्रदर्शनकारी बंद थे। सभी को छोड़ दिया गया। पूरे राज्य में 350 छात्र जेल से बाहर आए हैं। रिहा हुए छात्रों ने बताया कि हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार हुआ। पुलिसवालों ने गाली दी, कहा कि जिंदगी बर्बाद कर देंगे।
मेरा बेटा परीक्षा की तैयारी कर रहा है, पुलिस ने पकड़ लिया
पटना के बेऊर जेल के बाहर खड़े वैशाली के राजापाकड़ के मिथिलेश राय ने कहा, ‘मेरा बेटा मनीष कुमार सरकारी नौकरी के लिए तैयारी करता है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बहुत परेशान हूं।’वैशाली के अर्जुन राय ने कहा, ‘मेरा 24 साल का बेटा कुणाल कुमार राज लॉ की पढ़ाई कर रहा है। अभी प्रथम वर्ष में है। पुलिस ने उसे पकड़कर जेल भेज दिया।’
निखत ने कहा, ‘मेरा बेटा शादाब मलिक जेल में है। पुलिस गिरफ्तार कर ले जा रही थी तब वह लगातार रो रहा था। जाते-जाते कहा कि मां अपना ख्याल रखना। समय पर खाना खा लेना।’विधायक संदीप सौरभ को बुधवार देर रात जेल से रिहा किया गया। जेल के बाहर उनके समर्थक जुटे थे। फूलों की माला पहनाकर उनका स्वागत किया गया।इससे पहले जेल पहुंची उनकी पत्नी दिव्या बेउर जेल पहुंचीं। उन्होंने कहा, ‘छात्रों के साथ किया गया व्यवहार लोकतंत्र के खिलाफ है। सरकार को इस कार्रवाई का राजनीतिक परिणाम भुगतना पड़ेगा।’
पटना से बेउर जेल पहुंचे मोहम्मद वसीर ने बताया, ‘बिहार बंद के दौरान मेरा ममेरा भाई क्लीनिक से बाहर निकल रहा था। पुलिस जबरन उसे उठा ले गई। जेल भेज दिया।’सीतामढ़ी से अपने बेटे को जेल से रिहा कर ले जाने पटना पहुंचे राज कुमार ने बताया, ‘बिहार में 25 जुलाई को हुए प्रोटेस्ट में मेरे बेटे को गिरफ्तार किया गया था। वह कोचिंग से वापस लौट रहा था तभी पुलिस ने उठाकर बेउर जेल भेज दिया। जानकारी मिली थी कि मंगलवार रात को जेल से रिहा होगा। बुधवार सुबह से ही जेल के पास खड़ा होकर इंतजार कर रहा हूं।’
दरभंगा में जेल भेजे गए सभी 15 लोग रिहा
दरभंगा में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें 15 वयस्क और 18 नाबालिग शामिल थे। नाबालिगों को बॉन्ड पेपर भरवाकर छोड़ दिया गया।15 बालिग को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया था। इनमें से दो को मंगलवार और 13 को बुधवार को रिहा किया गया। बुधवार को सुबह से शाम तक जेल गेट के बाहर परिजन जुटे रहे।
जेल के बाहर मौजूद सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के अमित चौधरी ने बताया, ‘मैं अपने दोस्त अर्जुन साह के साथ दवा खरीदने दरभंगा आया था। हमलोग प्रदर्शन स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर दवा दुकान के पास थे। इसी दौरान पुलिस आई और लोगों को पकड़ने लगी। भगदड़ मच गई।’
‘मैं एक गली में भागकर बच गया, लेकिन मेरा दोस्त अर्जुन साह पुलिस के हत्थे चढ़ गया। मेरा मोबाइल भी उसी के पास था, जो अब तक जब्त है। पिछले तीन घंटे से जेल गेट पर खड़ा होकर उसके बाहर आने का इंतजार कर रहा हूं।’अर्जुन प्रदर्शन में शामिल नहीं था, फिर भी जेल जाना पड़ा। केस वापस लेना सरकार का अच्छा फैसला है, लेकिन निर्दोष लोगों को जेल भेजना उचित नहीं है। इस पूरे मामले में परिवार के हजारों रुपए खर्च हो गए।’
मेरा भाई गिरफ्तार हुआ, खड़गपुर से आया हूं
कोतवाली थाना क्षेत्र के सकमा पुल के पास रहने वाले इरफान की गिरफ्तारी हुई थी। उनके भाई इरशाद ने बताया, ‘इरफान रिश्तेदारी से लौट रहा था तभी रास्ते में पुलिस गिरफ्तार कर लिया। मैं बीटेक करने के बाद नौकरी कर रहा हूं। भाई की गिरफ्तारी की सूचना मिली तो खड़गपुर से आया हूं। मेरा भाई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है।’
छपरा मंडल कारा के बाहर जुटे रहे परिजन
छपरा मंडल कारा के बाहर जेल में बंद छात्रों के परिजन बुधवार को दिन भर रुके रहे। देर रात सभी को रिहा कर दिया गया। इससे पहले परिजनों ने भास्कर से अपनी पेरशानी शेयर की।छपरा के रहने वाले उदय राय ने बताया, मेरे बेटे रोहित के कान का ऑपरेशन हुआ था। इसी ऑपरेशन के लिए वह दवा लेने घर से बनारस की ओर जा रहा था। तभी प्रदर्शन में फंस गया और पुलिस ने उसे पकड़ लिया। हम 2 दिनों से उसे छुड़ाने के लिए जेल के बाहर आ रहे हैं, कोई पुलिसकर्मी जानकारी नहीं दे रहा है कि कब छूटेगा।
छपरा के जगजीवन राम ने बातया कि मेरे बेटे का नाम अमरेश राम है। वह मैट्रिक में पढ़ता है। 25 जुलाई की आधी रात पुलिस यह कहकर उसे उठा ले गई कि वह प्रदर्शन में था। वह उस दिन दवाई लेने घर गया था और थोड़ी देर बाद घर लौट आया था।छपरा की असरूनिशा ने बताया, मेरे बेटे का नाम मंजूर आलम है। उसकी उम्र 22 साल है। वह 25 जुलाई को दवा लेने घर से निकला था, उसके पास 3 हजार रुपए थे। डॉक्टर से दिखाने की पर्ची भी थी उसके पास।’
FIR से छात्रों के जेल से रिहाई तक, चली ये प्रक्रिया
NEET-UG पेपर लीक को लेकर दो दिनों के प्रदर्शन में पटना समेत 20 जिलों में कुल 64 FIR दर्ज की गई थी। सोमवार को राज्य सरकार की तरफ से गृह विभाग ने सारे केस खत्म करने और गिरफ्तार सभी लोगों को छोड़ने की घोषणा की थी।इसके तुरंत बाद पुलिस मुख्यालय हरकत में आया। सोमवार को ही जिलावार FIR की लिस्ट गृह विभाग को भेज दिया। सरकार ने उसे राज्य के एडवोकेट जनरल एसडी संजय कुमार को भेजा।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
