बेटा परीक्षा देने गया था, पुलिस वालों ने पकड़ लिया’:अगले दिन छात्र का एग्जाम भी छूटा
बेगूसराय.‘मेरा बेटा अभिषेक सीधा-साझा लड़का है। पढ़ाई-लिखाई के अलावा किसी चीज पर ध्यान नहीं देता है। 23 जुलाई को वो परीक्षा देकर घर लौट रहा था। इसी दौरान रास्ते में पुलिस ने उसे पकड़ लिया। मेरी मांग है कि बेटे को छोड़ दिया जाए। प्रदर्शनकारियों और परीक्षार्थियों के बीच फर्क समझाना चाहिए।’
ये बातें अभिषेक की मां कह रही है। परिवार का कहना है कि 24 जुलाई को भी अभिषेक की परीक्षा थी, जो छूट चुकी है।
दरअसल, बेगूसराय में 23 जुलाई को उग्र छात्र आंदोलन और प्रदर्शन के बाद नगर थाना में 2 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं। पुलिस ने 6 नामजद सहित 2500 से अधिक अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। इसमें कई ऐसे छात्र भी बताए जा रहे हैं, जिनका इस आंदोलन से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था।
अभिषेक कुमार झा ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के आरसीएस कॉलेज मंझौल में बीएससी सेकेंड सेमेस्टर का छात्र है। उसका परीक्षा केंद्र एसकेएम महिला कॉलेज बेगूसराय बना था। 23 जुलाई को उसकी द्वितीय पाली (2nd Sitting) में Ethics & Values in Ancient Indian Tradition विषय की परीक्षा थी।परीक्षा देने के बाद शाम को वह पैदल ही पावर हाउस बस स्टैंड की ओर जा रहा था। जिससे अपने गांव जाने के लिए बस पकड़ सके। इसी दौरान ट्रैफिक चौक के पास प्रदर्शन के बीच पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
बेटे का आंदोलन से कोई मतलब नहीं- पिता
वीरपुर थाना क्षेत्र स्थित डीहपर गांव के रहने वाले अभिषेक के पिता संतोष कुमार झा ने बताया कि वे 10 से 12 हजार रुपए की मामूली प्राइवेट नौकरी करते हैं। उसी सीमित आय से पूरे परिवार का खर्च और तीन बच्चों की पढ़ाई-लिखाई चलती है।मेरा बेटा परीक्षा देने गया था। उसका किसी भी आंदोलन या उग्र प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं था। वह तो परीक्षा खत्म होने के बाद घर लौटने के लिए बस स्टैंड जा रहा था। पुलिस ने उसे जबरदस्ती उठा लिया। वह पूरी तरह निर्दोष है, सरकार और प्रशासन से हमारी गुहार है कि उसे अविलंब छोड़ दिया जाए।
एग्जाम छूटने से भविष्य खतरे में है- भाई
अभिषेक के छोटे भाई अभिनव कुमार ने बताया कि हम तीन भाई हैं। अभिनव भी स्नातक (B.Sc.) द्वितीय वर्ष का छात्र है और 23 जुलाई को उसका भी परीक्षा केंद्र तेघड़ा के तेयाय स्थित कॉलेज में था।
23 जुलाई को हम दोनों भाई अपनी-अपनी परीक्षा देने गए थे। मेरा सेंटर तेघड़ा था और बड़े भाई का महिला कॉलेज। 23 तारीख की शाम को पुलिस ने भाई को उठा लिया, जिस कारण 24 जुलाई को होने वाली उसकी Personality Development & Communication की अगली परीक्षा भी छूट गई। शैक्षणिक भविष्य अब खतरे में पड़ गया है।
परिजन बोले, प्रदर्शनकारियों और आम परीक्षार्थियों के बीच फर्क समझें
परिजन का कहना है कि अभिषेक का Roll No- 251044020094 है और 23 जुलाई को उसकी परीक्षा द्वितीय पाली में दर्ज थी, जो इस बात का प्रमाण है कि वह उस दिन परीक्षा केंद्र पर उपस्थित था।जिला प्रशासन-पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करे और निर्दोष अभिषेक को बिना शर्त तुरंत रिहा करे। प्रदर्शनकारियों और आम परीक्षार्थियों के बीच फर्क समझा जाए, जिससे किसी पढ़ाई करने वाले छात्र का करियर खराब न हो।
राजनीतिक गतिविधियों में नहीं था
परिवार के अनुसार अभिषेक किसी भी राजनीतिक या छात्र संगठन की गतिविधियों में पहले से एक्टिव नहीं था। परिजनों को उसके किसी आंदोलन में जाने की कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि वह केवल परीक्षा देने गया था।पुलिस की जल्दबाजी में निर्दोष छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है। 24 जुलाई का पेपर छूटने से अभिषेक का एक साल खराब होने की नौबत आ गई है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
