बेगूसराय में बाढ़ का पानी घटा, अब बीमारियों का खतरा:बांध से ही मुआयना कर अफसर लौट रहे
बेगूसराय,गंगा नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे कमी हो रही है, लेकिन बेगूसराय क्षेत्र में गंगा अभी भी खतरे के निशान से 1.5 मीटर से अधिक ऊपर बह रही है। पानी घटने की शुरुआत के बावजूद बाढ़ पीड़ितों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मटिहानी प्रखंड के बलहपुर पंचायत में बाढ़ की स्थिति अत्यंत भयावह बनी हुई है। जलस्तर कम होने से अब घरों में कीचड़, दलदल और संक्रामक बीमारियों का नया खतरा पैदा हो गया है।
गलियों में 3 फीट तक पानी भरा हुआ है और आवागमन का एकमात्र सहारा नाव ही बनी हुई है। गांवों में जिन घरों से पानी बाहर निकला है, वहां स्थिति रहने लायक नहीं बची है। घरों के भीतर गाद और दलदल जम चुका है। सीलन के कारण कच्चे मकानों के गिरने का खतरा लगातार बना हुआ है। इसके साथ ही पानी घटने के बाद सड़न, बदबू, कीड़े-मकोड़े और सांप-बिच्छू जैसे जहरीले जीवों का प्रकोप बढ़ गया है।
गांव के लोगों ने कहा कि अगर समय रहते चूना और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं किया गया तथा मेडिकल कैंप नहीं लगाए गए, तो इलाके में डायरिया और त्वचा संबंधी बीमारियां महामारी का रूप ले सकती है। दैनिक भास्कर की टीम डेंगी नाव (हाथ से चलने वाले छोटे नाव) से बलहपुर पंचायत-1 के सिंहपुर गांव पहुंची। जहां लोगों ने अपनी परेशानी साझा किया।
बलहपुर के पंचायत समिति सदस्य चंदन कुमार ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि हम लोग पिछले 15 दिनों से बाढ़ की विभीषिका झेल रहे हैं। पानी घटने के बाद घरों में दलदल जम गया है। भोजन बनाने तक की जगह नहीं बची है। सबसे विकट समस्या शौच की है; लोगों को नाव चलाकर बांध (तटबंध) पर जाना पड़ता है, तब जाकर शौच की व्यवस्था हो पाती है।
वार्ड नंबर-7 में 3-4 कच्चे मकान अचानक ढह गए। गनीमत रही कि लोग जब सो रहे थे, तब मलबा गिरने पर उनकी जान बच गई, लेकिन उनका आशियाना पूरी तरह तबाह हो गया। हादसे के 4 दिनों बाद अंचलाधिकारी (CO) के निर्देश पर राजस्व कर्मचारी जांच के लिए पहुंचे। अधिकारी बांध से नीचे उतरकर गांव का हाल देखने की जहमत तक नहीं उठाते हैं।
2016 से ही बाढ़ के दौरान मध्य विद्यालय बलहपुर में आपदा राहत शिविर और कम्युनिटी किचन (सामुदायिक रसोई) चलाया जाता था। इसमें बेघर हुए 40 से 50 परिवार शरण लेकर भोजन करते थे। इस बार अंचल प्रशासन की लापरवाही के कारण मात्र 3 दिन कम्युनिटी किचन चलाने के बाद ठेकेदार ने एंट्री रद्द होने का बहाना बनाकर रसोई बंद कर दी।
वर्तमान में मध्य विद्यालय में शरण लिए 40-50 परिवार दाने-दाने को तरस रहे हैं। यदि स्थानीय जनप्रतिनिधि या ग्रामीण आपस में सहयोग कर भोजन भेजते हैं तो उनका पेट भरता है, अन्यथा वे भूखे सोने को मजबूर हैं। मध्य विद्यालय बलहपुर में शरण लिए 40-50 परिवारों के लिए अविलंब सरकारी स्तर पर भोजन की व्यवस्था होना बहुत जरूरी है।बाढ़ पीड़ित विशुनदेव सहनी ने कहा कि हम 15 दिनों से बाढ़ की नरकीय जिंदगी जी रहे हैं। सरकार की ओर से न तो सूखा राशन (चूड़ा, शक्कर) दिया जा रहा है और न ही कोई राहत सामग्री मिल रही है। जब बारिश होती है, तो हम राहत शिविर तक खाना लेने भी नहीं जा पाते हैं और घर में ही भूखे कैद रहने को मजबूर होते हैं।
सरकारी अधिकारी और नेता आते तो हैं, लेकिन वे सिर्फ बांध पर खड़े होकर फोटो खिंचवाते हैं और वहीं से लौट जाते हैं। कोई भी अधिकारी पानी में उतरकर गांव की गलियों में नहीं आता कि देखे लोग किस हाल में जी रहे हैं। बीमारी की हालत में हमें खुद नाव चलाकर सरकारी अस्पताल तक दवा लेने जाना पड़ता है।गंगा की तेज धारा ने तटीय इलाकों को जोड़ने वाली संपर्क सड़कों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। कई जगह से सड़कें बह गई है। दुकानें पानी में डूबी हुई हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियां पूरी तरह ठप पड़ चुकी हैं। लोगों का कहना है कि वे बीते 15 दिनों से हर दिन प्रशासनिक उपेक्षा और बाढ़ की मार झेल रहे हैं। प्रशासन द्वारा किए जा रहे राहत और बचाव कार्यों के दावे धरातल पर पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना था कि दूर-दराज के जलमग्न टोलों तक चूड़ा, गुड़, माचिस, मोमबत्ती और तिरपाल पहुंचाना बहुत जरूरी है। बाढ़ का पानी घटने के साथ फैलने वाली संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए मेडिकल टीमों की तैनाती और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जाए। ध्वस्त हुए मकानों के पीड़ितों को तत्काल आपदा मुआवजा राशि दिया जाए।
DM रिची पांडेय ने बताया कि गंगा के जलस्तर में कमी दर्ज की जा रही है, जिससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति के धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है। जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर रहने के कारण प्रशासन सतर्कता के साथ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वर्तमान जलस्तर 42.89 मीटर दर्ज किया गया है। जिला प्रशासन राहत, बचाव एवं पुनर्वास कार्य पूरी मुस्तैदी और संवेदनशीलता के साथ कर रही है।
प्रशासन की विभिन्न टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार सक्रिय हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन, राहत सामग्री के परिवहन तथा बचाव कार्यों के लिए 269 नावों का परिचालन किया जा रहा है, जिसमें 23 सरकारी एवं 246 निजी नावें शामिल हैं। प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा एवं बचाव कार्यों को प्रभावी बनाने के लिए एसडीआरएफ तथा एनडीआरएफ की तैनाती की गई है।
प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराने के लिए 189 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित हैं। 12 सितंबर को 145 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित थे, जबकि 44 केंद्र बंद रहे थे। अब तक सामुदायिक रसोई के माध्यम से 1030163 लोगों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त प्रभावित परिवारों के बीच अब तक 350 ड्राई राशन पैकेट वितरित किए गए हैं।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
