Patna

बिहार की बहू लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गोसाई ने रचा इतिहास, 26 हजार समुद्री मील की विश्व परिक्रमा पूर

पटना।भागलपुर की एक बहू ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिस पर सिर्फ शहर या बिहार ही नहीं बल्कि पूरा देश गर्व कर रहा है. भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गोसाई ने दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण समुद्री मार्गों को पार करते हुए करीब 26 हजार समुद्री मील की विश्व जल-परिक्रमा पूरी कर इतिहास रच दिया है. तीनों सेनाओं की महिला अधिकारियों के इस ऐतिहासिक अभियान में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व करने वाली वह एकमात्र अधिकारी थीं. उनकी इस उपलब्धि के बाद भागलपुर के भीखनपुर से लेकर शाहकुंड तक खुशी और गर्व का माहौल है.

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समुद्र की लहरों पर लहराया तिरंगा, दुनिया ने देखा भारत का सामर्थ्य

 

भारतीय नौसेना की लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गोसाई ने “समुद्र प्रदक्षिणा” अभियान के तहत विश्व जल-परिक्रमा सफलतापूर्वक पूरी की है. यह अभियान सिर्फ एक नौकायन यात्रा नहीं था, बल्कि दुनिया के महासागरों में भारत की क्षमता, महिला शक्ति और सैन्य कौशल का प्रदर्शन भी था.इस ऐतिहासिक अभियान में नौ सदस्यीय महिला टीम शामिल थी, जिसमें भारतीय नौसेना की ओर से प्रियंका गोसाई अकेली अधिकारी थीं. अभियान ने यह संदेश दिया कि भारतीय महिलाएं अब दुनिया के सबसे कठिन समुद्री अभियानों का नेतृत्व करने में भी सक्षम हैं.

 

भागलपुर से जुड़ा है प्रियंका का खास रिश्ता

 

प्रियंका गोसाई मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के भटकोट गांव की रहने वाली हैं. विवाह के बाद उनका रिश्ता भागलपुर से जुड़ गया. उनके पति राज भारतीय नौसेना में कार्यरत हैं.भागलपुर के आरसीएमएस रोड, भीखनपुर गुमटी नंबर-2 निवासी राजेंद्र प्रसाद सिंह और मित्र कुमारी उनके सास-ससुर हैं. परिवार का कहना है कि प्रियंका की उपलब्धि केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि भागलपुर, बिहार और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है.

 

उनकी सफलता की खबर मिलते ही भीखनपुर और शाहकुंड के नारायणपुर गांव में लोगों ने खुशी जताई. परिवार से जुड़े लोगों ने इसे नई पीढ़ी की बेटियों के लिए प्रेरणा बताया.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 11 सितंबर 2025 को मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया से “समुद्र प्रदक्षिणा” अभियान को रवाना किया था.

 

टीम स्वदेश निर्मित 50 फीट लंबे भारतीय नौकायन पोत “आईएनएसवी तारिणी” पर सवार होकर विश्व यात्रा पर निकली थी. करीब 26 हजार समुद्री मील की इस यात्रा को पूरा करने में कई महीने लगे और टीम कुछ दिन पहले भारत लौट आई.यह दुनिया का पहला ऐसा महिला विश्व जल-परिक्रमा अभियान माना जा रहा है, जिसमें भारतीय थल सेना, नौसेना और वायुसेना की महिला अधिकारियों ने संयुक्त रूप से भाग लिया.

 

दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों को किया पार

 

इस अभियान की सबसे बड़ी चुनौती दुनिया के सबसे कठिन समुद्री क्षेत्रों को पार करना था.

 

यात्रा के दौरान टीम ने दो बार भूमध्य रेखा को पार किया. इसके अलावा केप हॉर्न, केप ऑफ गुड होप और केप ल्यूविन जैसे प्रसिद्ध समुद्री मार्गों से गुजरते हुए दक्षिणी महासागर और ड्रेक पैसेज जैसे बेहद चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी नौकायन किया.समुद्र की ऊंची लहरों, तेज हवाओं और कठिन मौसम के बीच यह अभियान भारतीय महिला अधिकारियों के साहस और प्रशिक्षण की बड़ी परीक्षा था.

 

कई देशों में फहराया तिरंगा, भारतीय समुदाय से भी किया संवाद

विश्व यात्रा के दौरान टीम ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अर्जेंटीना और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों के बंदरगाहों पर पहुंची.हर जगह भारतीय तिरंगा लहराया गया और वहां रह रहे भारतीय समुदाय से मुलाकात कर भारत की समुद्री परंपरा, महिला नेतृत्व और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता का संदेश दिया गया. इस अभियान ने वैश्विक स्तर पर भारत की सकारात्मक छवि को भी मजबूत किया

Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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