बेगूसराय- ब्रह्मदेव साह हत्याकांड में 4 दोषियों को उम्रकैद:2023 में दिवाली के दिन हुई थी हत्या
बेगूसराय के डंडारी थाना क्षेत्र स्थित कटरमाला गांव में करीब ढाई साल पहले हुए ब्रह्मदेव साह हत्याकांड में अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ऋषिकांत की अदालत ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार का जुर्माना भी लगाया। जुर्माना नहीं देने पर दोषियों को नियमानुसार अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
सजा पाने वाले सभी दोषी डंडारी थाना क्षेत्र के कटरमाला गांव के रहने वाले विकास कुमार, राजीव कुमार, राजेंद्र साह एवं कैलाश पासवान उर्फ सतीश है। चारों ने मिलकर जमीन विवाद में ब्रह्मदेव साह की हत्या को अंजाम दिया था।
12 नवंबर 2023 की शाम हुई थी हत्या
ब्रह्मदेव साह की कटरमाला चौक के पास ही बाइक रिपेयरिंग की दुकान थी। घटना 12 नवंबर 2023 दीपावली की शाम करीब 7 बजे हुई थी। ब्रह्मदेव साह अपने बेटे संतोष कुमार के साथ दुकान बंद कर घर लौट रहे थे। इसी दौरान कटरमाला गांव स्थित बजरंगबली स्थान के पास पहले से घात लगाए बैठे चारों आरोपियों ने उन्हें घेर लिया था।
राजेंद्र और कैलाश ने ब्रह्मदेव साह को पकड़ लिया था, जबकि राजीव कुमार के उकसाने और आदेश देने पर मुख्य आरोपी विकास कुमार ने अपनी कमर से पिस्टल निकालकर ब्रह्मदेव साह पर गोली चला दी थी। गोली सीधे उनके सीने में जा लगी, जिससे मौके पर ही तड़पकर गिर पड़े। ग्रामीणों के सहयोग से परिजन की ओर से अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई।
मृतक की पत्नी जगतारिणी देवी और बेटा संतोष कुमार।
प्रत्यक्षदर्शी बेटे की शिकायत पर दर्ज हुई थी FIR
घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। मृतक के पुत्र संतोष कुमार के बयान के आधार पर डंडारी थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक टीम और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर निष्पक्ष जांच पूरी करते हुए चारों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक संतोष कुमार सिन्हा एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद मंसूर आलम ने पैरवी की। अभियोजन ने अदालत के समक्ष 6 गवाहों को प्रस्तुत किया। जिनमें 4 चश्मदीद (आंखों देखे) गवाह, जांच अधिकारी और पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक शामिल थे।
अभियोजक पक्ष ने दलील दी कि उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान हत्या की घटना को सिद्ध करते हैं। समाज में कड़ा संदेश देने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दोषियों को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने चारों को धारा 302/120बी IPC के तहत दोषी करार दिया।
अदालत ने मुख्य आरोपी विकास कुमार को IPC की धारा- 302 के तहत आजीवन कारावास के साथ-साथ आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार अतिरिक्त जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, अन्य तीनों दोषियों को आर्म्स एक्ट के आरोपों से साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। लेकिन हत्या की साजिश और मुख्य अपराध में संलिप्तता के लिए उम्रकैद की सजा दी गई।
पीड़ित परिवार ने जताया न्यायपालिका पर विश्वास
न्यायालय का फैसला आने के बाद मृतक की पत्नी जगतारिणी देवी ने भावुक होते हुए कहा कि घर में दीपावली पूजा की तैयारी की जा रही थी। उसके पहले ही देर शाम मेरे पति और बेटे पर बेरहमी से हमला किया गया था। पति की हत्या कर दी गई, आज अदालत के इस फैसले से हमें सुकून मिला है और हमारा न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
