न्याय के मंदिर में मिला आशीर्वाद:जजों ने समझाया तो माता-पिता ने रिश्ते को माना,विदा हुई दुल्हन
पटना हाईकोर्ट का कोर्ट रूम गुरुवार को एक बेहद भावुक और खुशनुमा पल का गवाह बना, जहां कानूनी दलीलों के बीच एक प्रेम कहानी को अपनी मंजिल मिल गई। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और जजों की पहल के बाद, प्रेम विवाह करने वाले गोलू के साथ उसकी पत्नी अदालत परिसर से ही मुस्कुराते हुए अपनी ससुराल के लिए विदा हुई।
दरअसल, गोलू ने अपनी पत्नी को वापस पाने के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और कुमार मनीष की खंडपीठ ने जब मामले की सुनवाई शुरू की, तो कोर्ट रूम में दूल्हा-दुल्हन के साथ दोनों पक्षों के माता-पिता भी मौजूद थे। माहौल में तनाव था, लेकिन जजों ने कानूनी रुख अपनाने के बजाय एक अभिभावक की तरह दोनों परिवारों को समझाया। जजों की इस संवेदनशील पहल का असर यह हुआ कि दोनों परिवार इस रिश्ते के लिए राजी हो गए।
जजों के सामने ही मिला आशीर्वाद
कोर्ट ने कहा कि दोनों बालिग हैं और अपनी मर्जी से शादी कर चुके हैं। जब दोनों साथ रहना चाहते हैं, तो माता-पिता को भी उनके फैसले का सम्मान करना चाहिए। इसके बाद दोनों के माता-पिता ने कोर्ट रूम में ही नवदंपती को आशीर्वाद दे दिया। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को निष्पादित कर दिया।
सास-ससुर ने कोर्ट में लिया संकल्प
लड़की अपने पति और सास-ससुर के साथ ससुराल के लिए विदा हो गई। उसके सास-ससुर ने हलफनामा दायर कर जिम्मेदारी ली कि वे बहू को सम्मान के साथ रखेंगे और उसे कोई तकलीफ नहीं होने देंगे। वहीं, कोर्ट ने लड़की के पिता को भी आश्वस्त किया कि यदि भविष्य में उनकी बेटी को कोई परेशानी होती है, तो वे सूचित कर सकते हैं, जिस पर तत्काल उचित आदेश दिया जाएगा। कानून के मंदिर से मिला यह अनोखा आशीर्वाद दोनों परिवारों के लिए एक नई और सुखद शुरुआत लेकर आया है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
