समस्तीपुर में 105 लड़के-लड़कियों का रेस्क्यू:सरकारी नौकरी का झांसा देकर असम,बंगाल से बुलाया..
समस्तीपुर में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट और जिला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। असम, पश्चिम बंगाल समेत बिहार के अलग-अलग जिलों के105 लड़के और लड़कियों का मुफस्सिल थाना क्षेत्र से रेस्क्यू किया है। सभी को सरकारी विभाग में नौकरी का झांसा देकर बुलाया गया था। हाउस अरेस्ट करके रखा था। इसमें 38 लड़कियां शामिल हैं।जानकारी के मुताबिक शहर के भोला टॉकीज रेलवे गुमटी के पास मार्केटिंग से जुड़ी एक कंपनी की ओर से सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर इंटरव्यू लिया गया था। दो महीने की ट्रेनिंग के नाम पर मार्केटिंग का काम कराया जाता था। ट्रेनिंग के बाद सरकारी नौकरी नहीं मिलने पर शिकायत पुलिस के साथ ही ह्यूमन राइट्स के पास पहुंची थी। जिसके बाद बुधवार रात धरमपुर, मुसापुर समेत कई जगहों पर छापेमारी की गई।
पुलिस के अनुसार, नौकरी दिलाने के नाम पर इन युवक-युवतियों को अलग-अलग स्थानों पर बंधक बनाकर रखा गया था। मामले की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इसके पीछे कौन-कौन शामिल है। यह गिरोह कब से एक्टिव था। नाबालिग बच्चों को बाल कल्याण समिति(सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया जाएगा। इसके बाद उनके परिजनों को बुलाकर सौंपा जाएगा। वहीं, बालिग युवक-युवतियों को सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद घर भेजा जाएगा। पूरे मामले में मानव तस्करी और धोखाधड़ी के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है।
रेड के बाद शहर के मार्केटिंग परिसर स्थित कार्यालय में ताला लगाकर कंपनी के स्टाफ फरार हो गए। पुलिस टीम संचालक की गिरफ्तारी के लेकर छापेमारी कर रही है। हर बच्चे से पूछताछ की जा रही है कि किस तरह से यहां लाया गया और उनसे किस तरह का काम करवाया जा रहा था।
‘हर दिन टारगेट मिलता था’
कटिहार जिले के रहने वाले रमेश कुमार ने बताया कि मैंने मैट्रिक तक पढ़ाई की है। कृषि विभाग में फोर्थ ग्रेड स्टाफ के तौर ज्वॉइनिंग की बात कही गई थी। नौकरी दिलाने के लिए 27000 रुपए लिए भी गए थे। कंपनी के स्टाफ ने बताया था कि पहले दो महीने की ट्रेनिंग होगी। कंपनियों के प्रोडक्ट्स बाजार में घूम-घूम कर बेचने का काम मिला था। टारगेट भी दिया जा रहा था। कहा गया था कि किसी भी प्रोड्क्ट को कम से कम 5000 में बेचना होगा, अन्यथा आपकी नौकरी फाइनल नहीं होगी।वहीं, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी निवासी आरती ने बताया कि उनका परिवार काफी गरीब है। एक कंपनी द्वारा समस्तीपुर में सरकारी नौकरी दिलाने की जानकारी मिली। अपने एक दोस्त के माध्यम से कार्यालय पर पहुंची। सबसे पहले 25 हजार रुपए जमा करने को कहा। रुपए जमा करने के बाद कॉस्मेटिक आइटम घूम-घूमकर बेचने को कहा गया।
हमलोगों को बताया गया कि ये ट्रेनिंग का हिस्सा है। कंपनी की ओर से अलग-अलग मकान में रखा जाता था। खाने में सिर्फ चावल और सोयाबीन की सब्जी दी जाती थी। विरोध करने पर धमकी दी जा रही थी कि नौकरी से हटा देंगे। डर से लोग चुप हो जाते थे।
इस संबंध में एएसपी संजय पांडेय ने बताया कि लगातार मिल रही सूचना के आधार पर नगर और मुफस्सिल थाना क्षेत्र में छापेमारी की गई है। जहां से लड़के और लड़कियों को रिकवर किया गया है। ह्यूमन राइट्स की टीम भी उनके साथ थी। इसमें कई किशोर भी शामिल है। सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर यहां सभी को रोका गया था। गिरोह में शामिल लोगों की तलाश की जा रही है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
