वैज्ञानिक डॉ गोपालजी त्रिवेदी को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान दिया गया
मुजफ्फरपुर।बंदरा, प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ गोपालजी त्रिवेदी को मरणोपरांत सोमवार को पद्मश्री सम्मान दिया गया.सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उनके पुत्र डॉ रमन कुमार त्रिवेदी को सम्मान प्रदान किया.
डॉ. त्रिवेदी (96की उम्र) का 12 मई को निधन हो गया था.कृषि विज्ञान एवं इंजीनियरिंग (कृषि) क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को लेकर गणतंत्र दिवस के अवसर पर पद्मश्री के लिये उनके नाम की घोषणा हुई थी.सम्मान पा कर उनके पुत्र डॉ रमन कुमार त्रिवेदी ने बताया कि यदि आज बाबूजी जीवित रहते और स्वयं यह सम्मान ग्रहण करते, तो यह पल पूरे परिवार और क्षेत्र के लिए और भी गौरवपूर्ण होता. एक ओर पद्मश्री मिलने की खुशी है, तो दूसरी ओर बाबूजी के निधन का गहरा दुख भी. यह बातें कहते-कहते डॉ रमन
त्रिवेदी भावुक हो गये. डॉ गोपालजी त्रिवेदी ने बिहार में ‘मक्का क्रांति’ की शुरुआत की थी. उन्होंने शाही लीची के बेहतर प्रबंधन के लिए नई तकनीक दी.उन्होंने ‘बाबा’ संस्था के माध्यम से ताउम्र किसानों को आधुनिक खेती के लिए जागरूक किया. बिहार में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को नई दिशा दी.यह सम्मान उनके वैज्ञानिक तप की सच्ची श्रद्धांजलि है.
लीची उत्पादन में कैनोपी प्रबंधन तकनीक, जलजमाव वाले क्षेत्रों में खेती की नई तकनीक विकसित करने में डॉ. त्रिवेदी का योगदान अतुलनीय माना जाता है. वे वर्ष 1988 से 1991 तक पूसा कृषि
विश्वविद्यालय के कुलपति रहे.कुलपति के पद पर रहते हुए उन्होंने कृषि तकनीक को खेत से जोड़ने के लिये कृषि वैज्ञानिकों को किसानों के खेत तक उतारा, जिसका परिणाम बहुत ही सार्थक रहा.सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने शहर में रहने के बजाए गांव को चुना.वे हमेशा किसानों को आधुनिक खेती की जानकारी देने के लिए लगातार कार्य किया. कृषि क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उन्हें बिहार में ‘मक्का क्रांति के जनक’ के रूप में भी जाना जाता था.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
