हवाई जहाज की तरह अब रेलवे में भी मिलेगी कर्टसी और प्रोफेशन्लिज़्म, रेलवे ने तैयार किया 51 हज़ार ‘रेल कर्मयोगी’
नई दिल्ली। रेल पैसेंजर्स को मजबूरी की यात्रा से निकाल कर उत्साह भरी यात्रा करवाने के लिए रेल मंत्रालय ने मिशन कर्मयोगी का अनोखा रास्ता अपनाया है. दरअसल रेलवे ने अपने फ़्रंटलाइन कर्मचारियों के लिए एक इंटर्नल पर्सनालिटी डेवलपमेंट कोर्स शुरू किया है. इस कोर्स का नाम ‘कर्मयोगी’ है. एक हफ़्ते की ये व्यवस्थित ट्रेनिंग रेलवे के सभी स्टेशन मास्टर, टिकट कलेक्टर, टिकट काउंटर के कर्मचारी और यात्री सेवाओं से सीधे जुड़े अन्य सभी कर्मचारियों को दी जा रही है.
फिलहाल सी ग्रेड के सभी फ्रंटलाइन कर्मचारियों को कर्मयोगी का कोर्स करना अनिवार्य है. रेलवे ये इंटर्नल ट्रेनिंग पूरी तरह मुफ़्त दे रही है. इसे करने के लिए ऑफ़िस से छुट्टी लेने की ज़रूरत नहीं पड़ती. इस ट्रेनिंग के दिनों को भी ड्यूटी के अंतर्गत ही गिना जाता है.
इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ रेलवे ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट (इरटम) को इस ट्रेनिंग का ज़िम्मा सौंपा गया है. इरटम की डीजी चंद्रलेखा मुखर्जी ने एबीपी न्यूज़ को बताया की इस ट्रेनिंग का उद्देश्य ये है कि रेलवे के वो कर्मचारी जिनका रेल यात्रियों से रोज़ाना सीधा इंटरैक्शन होता है उन कर्मचारियों के इंटरैक्शन की क्वालिटी को और बेहतर बनाया जा सके.
822 मास्टर ट्रेनर दे रहे हैं ट्रेनिंग
पहले 822 मास्टर ट्रेनर को ट्रेन किया गया फिर इन मास्टर ट्रेनरों को रेलवे की अलग-अलग डिवीज़न में भेज दिया गया. इन डिवीज़नों में अब तक कुल 51 हज़ार फ़ील्ड ट्रेनरों को ट्रेंड किया जा चुका है.
मिशन रेल कर्मयोगी का कंटेंट
इस कोर्स को आठ मोड्यूल में बांटा गया है जिनके अंतर्गत सेवा भाव के आयाम समझाए जाते हैं. इससे रेलवे को क्या फ़ायदा है और यात्रियों को क्या फायदा है ये भी पढ़ाया जाता है. ये कोर्स ऑनलाइन पढ़ाया जाता है पर दीक्षांत समारोह में सभी को व्यक्तिगत रूप से सर्टिफिकेट दिया जाता है. हर फ़ील्ड ट्रेनी को प्रत्येक दो मोड्यूल के बाद एक टेस्ट देना होता है. यानी कुल चार टेस्ट पास करना होता है. इस पढ़ाई के लिए सभी को सम्बंधित एप पर खुद को रजिस्टर करना पड़ता है. मास्टर ट्रेनर की क्वालिटी और फील्ड ट्रेनी की पढ़ाई पर नज़र रखने के लिए एक एनलिटिकल ऑन लाइन चार्ट भी बनता है.
यात्रियों को किस तरह से फायदा होगा
इन रेल कर्मयोगियों का काम होगा कि यात्रियों का स्वागत करें. उनकी समस्याओं को समझें और हल करें. अगर किसी यात्री को रिज़र्वेशन फ़ॉर्म भरने में दिक्कत हो रही है तो उसका फ़ॉर्म भरवा दें. किसी को ट्रेन का प्लेटफ़ॉर्म नहीं समझ आ रहा है तो उसकी मदद करें. यानी रेलवे स्टेशन परिसर में यात्रियों की सभी तरह की मदद करें. यहां तक कि कोई दुर्घटना, अपराध, चोरी, सामान गुम हो जाना जैसी बातों में रेलवे पुलिस के साथ मिल कर मदद करना भी रेल कर्मयोगी का नैतिक कर्तव्य होगा.