समस्तीपुर:श्रीमद्भागवत में अनंत शक्तियों का भंडार है, जो पाया उसका जीवन धन्य
समस्तीपुर।खानपुर.कण-कण में व्याप्त ईश्वर परम सत्य हैं।ईश्वर हर जगह हैं। जब कोई भी मनुष्य ईश्वर की आराधना में लीन होते हैं तो भगवान उसके हर मार्ग को आसान कर उसके जीवन मे मिठास घोलते हैं। श्रीमद्भागवत कथा पुराण से लोगों के जीवन संवर जाते हैं। मानव जीवन को धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्रदान में पूर्ण समर्थ है। मानव जीवन का मूल मंत्र भागवत में समाहित है। ये बातें वृंदावन धाम से आई कथा वाचिका साध्वी प्राची ने कही।
वे रामनगर रंजीतपुर स्थित मां वैष्णवी चैती दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह ज्ञान यज्ञ के छठे दिन मंगलवार को भक्तों के बीच कथा परोस रही थे। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ही साक्षात नारायण हैं। कथा के छठवें दिन भगवान के मंगलमय रुक्मिणी-कृष्ण विवाह महोत्सव, भगवान के धनुष भंग लीला, कुब्जा पर भगवान की कृपा, द्वारिका नगरी का निर्माण, उद्धव गोपी संवाद प्रसंग पर चर्चा की गई। उन्होंने प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भगवान के विवाह पर कई प्रश्न चिन्ह लगाए गए। किंतु जो मनुष्य धर्म ग्रंथों का अध्ययन कर लेंगे, तो वे स्वयं की भगवान की लीलाओं को समझ जाएंगे।
भगवान श्री कृष्ण मैया रुक्मिणी से विवाह रचाए। मैया रुक्मिणी विदर्भ देश की राजकुमारी थी। उन्होंने कहा कि मैया रुक्मिणी बालपन से ही भगवान के गुणों और प्रताप को सुन-सुन कर भगवान से प्रेम बढ़ा की। रूक्मिणी स्वयं मैया लक्ष्मी की अवतार थी। उन्होंने बताया कि जब विवाह योग्य हुई तो मैया रुक्मिणी ने भगवान को पत्र लिखकर अपने भावों को भगवान के चरणों में अर्पण की। रुक्मिणी की भाव से प्रभावित होकर भगवान विदर्भ देश पहुंचे जहां, मैया रुक्मिणी प्रतीक्षा में थी। और भगवान ने रुक्मिणी की भाव स्वीकार कर द्वारिका नगरी में विवाह किए।
उन्होंने कहा कि अनेक प्रकार की लीलाओं से भगवान भक्तों को आनंद प्राप्त कराते हैं।मथुरा में पधारकर प्रभु ने भक्तों को आनंदित करते हुए दुष्ट कंश का वध कर उद्धार किया। भगवान श्री कृष्ण जब द्वारिकाधीश बने तो पहले बलराम का विवाह रैवत राजा की पुत्री रेवती से हुआ। वहीं ठाकुर जी का 16 हजार 1 सौ 8 विवाह हुई।वास्तव में प्रभु सम्पूर्ण चराचर के एक मात्र पति हैं। उन्होंने भक्तों को कथा परोसते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मानव का जीवन धन्य हो जाता है।
जहां भगवान का ध्यान नियमित होता है, वहां सुख, समृद्धि व शांति बनी रहती है। जिसके जीवन में किसी प्रकार का भी सत्कर्म नहीं है, उन जीवों को भी मुक्ति प्रदान करने की शक्ति श्रीमद्भागवत सप्ताह में विद्यमान है। यह पुराण अनंत शक्तियों का भंडार है। पूजा व यज्ञ की सफलता में पूजा कमेटी के अध्यक्ष दिनेश ठाकुर, रामाकांत मिश्र, शोभाकांत मिश्र, पंडित मनोरंजन झा, विनोद मिश्र, अनिल कुमार मिश्र, गुलाब देवी, राम सगुन झा, महेंद्र नारायण झा उर्फ कन्हैया झा, सुरेंद्र मिश्र, श्याम कुमार मिश्र, राज कुमार राय, धर्मेंद्र राय, अमित ठाकुर, नरेंद्र मिश्र, मनोज झा सहित समस्त ग्रामीण जुटे हैं।
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