समस्तीपुर:प्राकृतिक खेती बना बिहार के किसानों के लिए वरदान:बीरेंद्र पासवान
समस्तीपुर जिला अंतर्गत डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा के अधीनस्थ कृषि विज्ञान केंद्र बिरौली के प्रांगण में प्राकृतिक खेती को बढ़वा देने के विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला हुई। जिसकी अध्यक्षता करते हुए प्रधान वैज्ञानिक डॉ आरके तिवारी ने किसान सहित सभी मंचासीन अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रशिक्षण के विषय वस्तु पर विस्तार के साथ प्रकाश डाला। प्रशिक्षण सत्र में बतौर मुख्य अतिथि रोसरा विधायक बीरेंद्र पासवान ने कहा कि बिहार के किसानों के लिए प्राकृतिक खेती वरदान साबित हो रहा है। दुनिया के सभी देशों की बात करें तो भारत के पूसा का मिट्टी सबसे उपजाऊ है। विवि क्षेत्र के किसान चल रहे नवीनतम अनुसंधान का भरपूर लाभ लेकर कृषि को समुन्नत बनाने की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहे है। जो किसान खेती करते उनके पास मवेशी नहीं होते, जो किसान मवेशी पालते उनके पास खेती नहीं होता है। वास्तविक रूप में देखा जाए तो यह गैप प्रगतिशील किसानों के लिए बहुत बड़ी विडंबना है। भारत देश में कृषि एवं किसानों को बहुत प्रमुखता के साथ देखी एवं सुनी जाती है।
देश के 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आधारित है। आज भी सरकार की तरफ से संगठित क्षेत्रों में महज 4 प्रतिशत लोगों को नौकरी दी जाती है। जबकि असंगठित क्षेत्रों से आने वाले 96 प्रतिशत लोगों को सरकार तकनीकी रोजगार एवं व्यवसाय से जोड़ने के लिए सतत प्रयासरत है। इसके लिए कई सरकारी एवं निजी संगठनों की सहयोग से देश के जाने मानें कृषि संस्थानों से प्रशिक्षित करने का कार्य करती है। दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में समस्तीपुर जिला अव्वल रहा है। सब्जी उत्पादन में जिला को हब के रूप में सम्मानित किया जा चुका है। प्राकृतिक खेती को बढ़वा देने में क्षेत्र के पोखरा एवं कुआं का महत्वपूर्ण स्थान है। जो वर्षों पूर्व से बिलुप्त होते जा रहा है। इसे बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों को जल संरक्षण एवं पोखरा व कुआँ को संरक्षित करने की दिशा में अनुसंधान करने की जरूरत हैं। कार्यशाला को संबोधित करते हुए भाजपा जिला उपाध्यक्ष मधुमाला ने कहा कि परंपरागत कृषि ही प्राकृतिक खेती का रूप है। किसानों को रसायनिक खादों के प्रयोग को छोड़कर प्राकृतिक संसाधनों के सहारे खेती करना होगा।
वैज्ञानिक डॉ राजीव कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि धरती पर जन्म लेने वाले बच्चें प्राकृतिक रूप से ही अवतरित होते है। जबकि धरती पर आने के बाद उन्हीं बच्चों को अप्राकृतिक बना दिया जाता है। किसानों को अपने सोच में प्राकृतिक खेती को लाना होगा। प्राकृतिक खेती मूलरूप से जैविक एवं रासायनिक खेती से बिल्कुल अलग है। इसे समझने की जरूरत है। प्राकृतिक खेती सामुदायिक स्तर पर ही संभव हो पाता है। डॉ मो अब्बास अहमद ने कहा कि किसानों को धीरे धीरे रासायनिक खेती को छोड़ते हुए प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा।
वैज्ञानिक भारती उपाध्याय ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों से ही खेती करने की आवश्यकता है। इसमें मुख्यरूप से अंतर्वर्ती खेती ज्यादा लाभकारी होता है। आईसीएआर नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ केशव ने भी किसानों को प्राकृतिक खेती से जुड़े कई अहम मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा किया। संचालन वैज्ञानिक बिनीता कश्यप ने की। धन्यवाद ज्ञापन वैज्ञानिक डॉ धीरू कुमार तिवारी ने किया। मौके पर अनुमंडल कृषि पदाधिकारी संतोष कुमार सहनी, भाजपा नेता कृष्ण कुमार मेघु, कृषि व्यवसाई पूजा सिंह, आदि मौजूद थे।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
