दरभंगा में 61 करोड़ से बनेगी ISRO की स्पेस गैलरी:तारामंडल परिसर में होगा निर्माण
दरभंगा में अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) की स्पेस गैलरी और स्पेस इनोवेशन सेंटर स्थापित किया जाएगा।दरभंगा तारामंडल सह ज्ञान-विज्ञान संग्रहालय परिसर में दो एकड़ जमीन पर बनने वाली इस परियोजना पर करीब 61 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसमें से 36 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है।
शुक्रवार को इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की टीम ने प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद दरभंगा परिसदन में सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई।
स्पेस गैलरी और इनोवेशन लैब के लिए जमीन का निरीक्षण
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने बताया कि इसरो के क्षमता निर्माण कार्यक्रम कार्यालय के वरिष्ठ वैज्ञानिक वंशीधर सहित विशेषज्ञों की टीम ने तारामंडल परिसर का निरीक्षण किया।
टीम ने स्पेस गैलरी, प्रदर्शनी स्थल, इनोवेशन लैब और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी आधुनिक सुविधाओं की स्थापना के लिए उपलब्ध जमीन और आधारभूत संरचनाओं का जायजा लिया।उन्होंने बताया कि परियोजना की कुल लागत 61 करोड़ रुपए है। इसमें 36 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिल चुकी है। शेष राशि की मंजूरी भी जल्द मिलने की उम्मीद है।
बैठक में परियोजना की तकनीकी रूपरेखा, जमीन, निर्माण से जुड़ी सुविधाओं और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए इसरो की तकनीकी टीम और संबंधित विभागों के बीच तालमेल बनाने पर सहमति बनी।
प्रस्तावित स्पेस गैलरी में भारत के प्रमुख अंतरिक्ष अभियानों की जानकारी मॉडल और प्रदर्शनी के माध्यम से दी जाएगी। यहां प्रक्षेपण यानों के थ्री-डी मॉडल के साथ चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-एल1 और गगनयान जैसे अभियानों के मॉडल रखे जाएंगे।विद्यार्थियों और आम लोगों को वर्चुअल रियलिटी (वीआर), ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर), स्पेस वॉक सिमुलेशन और डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान को समझने का मौका मिलेगा। इन सुविधाओं से लोग अंतरिक्ष अभियानों और वैज्ञानिक गतिविधियों को करीब से जान सकेंगे।
रॉकेट्री, रोबोटिक्स और कोडिंग की मिलेगी ट्रेनिंग
स्पेस इनोवेशन सेंटर में स्कूली बच्चों, कॉलेज के विद्यार्थियों और इंजीनियरिंग के युवाओं के लिए विशेष इनोवेशन लैब बनाई जाएगी। यहां रॉकेट बनाने की तकनीक (रॉकेट्री), छोटे उपग्रह (मिनी सैटेलाइट), रोबोटिक्स, सेंसर टेक्नोलॉजी, कोडिंग और वैज्ञानिक प्रयोगों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।इसके अलावा कार्यशालाएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम और दूसरी शैक्षणिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य बच्चों और युवाओं में वैज्ञानिक सोच और नई तकनीक विकसित करने की रुचि बढ़ाना है।
मिथिला के स्टूडेंट्स को स्थानीय स्तर पर मिलेगा अवसर
सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि इस केंद्र के बनने से दरभंगा सहित पूरे मिथिला क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवाओं को आधुनिक अंतरिक्ष विज्ञान और तकनीक सीखने का अवसर मिलेगा। उन्हें ऐसी सुविधाओं के लिए बेंगलुरु, अहमदाबाद या देश के दूसरे बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।उन्होंने इसे मिथिला की नई पीढ़ी को अंतरिक्ष अनुसंधान और वैज्ञानिक नवाचार से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल बताया।
बैठक में शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि भी शामिल
समीक्षा बैठक में इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक वंशीधर और अन्य विशेषज्ञों के साथ दरभंगा अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य चंदन कुमार, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ. जमशेद आलम, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान की प्राचार्या नेहा कुमारी और विश्वविद्यालय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक मौजूद रहे।इसके अलावा तारामंडल के प्रभारी पदाधिकारी मयंक कुमार सिंह, तकनीकी अधिकारी अंकित कुमार सहित जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
