श्रीमद्भागवत कथा:सुदामा चरित्र मित्रता के साथ त्याग, समर्पण व विश्वास का प्रतीक
समस्तीपुर।मोहिउद्दीननगर।प्रखंड क्षेत्र की कल्याणपुर बस्ती पुरब पंचायत के लखनपुर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ भव्य समापन हो गया। समापन दिवस पर श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही कथा स्थल पर भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा।एक माह से चल रहे अखंड रामनाम धुन में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। समापन दिवस पर वृंदावन से पधारे प्रख्यात कथावाचक पंडित गीता ठाकुर ने श्रीमद्भागवत महापुराण के अंतिम प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित की मुक्ति तथा भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की महिमा पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि सुदामा चरित्र केवल मित्रता की कथा नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण, विश्वास और निष्काम भक्ति का अनुपम उदाहरण है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने निर्धन बाल सखा सुदामा का जिस प्रकार सम्मान किया, वह दर्शाता है कि प्रभु भक्तों के बाहरी वैभव को नहीं, बल्कि उनके निर्मल हृदय और सच्ची श्रद्धा को देखते हैं।उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में सुदामा चरित्र मनुष्य को सादगी, संतोष और सच्चे संबंधों का महत्व सिखाता है।
भगवान के प्रति अटूट विश्वास रखने वाला व्यक्ति कभी निराश नहीं होता। प्रभु अपने भक्तों की आवश्यकताओं को बिना मांगे भी पूरा कर देते हैं। कथावाचक ने राजा परीक्षित और शुकदेव जी महाराज के संवाद का वर्णन करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण मनुष्य को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय स्वयंसेवकों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बावजूद पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन और व्यवस्था बनी रही। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि कथा के प्रत्येक दिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और समापन दिवस पर यह संख्या अपने चरम पर पहुंच गई। महायज्ञ की सफलता पर रणजीत कुमार सिंह, सुरेन्द्र कुमार राय, विष्णुदेव सिंह, अमरेश सिंह, श्रवण सिंह, शंकर महतो, सतीश सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रद्धालु एवं आयोजन समिति के सदस्यों ने लोगों का धन्यवाद किया। ग्रामीणों ने इस धार्मिक आयोजन को क्षेत्र में आध्यात्मिक जागृति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को सुदृढ़ करने वाला बताया तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की अपेक्षा व्यक्त की।”
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