दो साल से कार्यालयों का चक्कर काट रहा दिव्यांग,नहीं मिली साईकिल
समस्तीपुर : सरकारी दावों और धरातल की हकीकत में कितना बड़ा फासला होता है, इसका जीता-जागता उदाहरण एक बार फिर सामने आया है एक बेबस दिव्यांग पिछले दो साल से एक नई ट्राईसाइकिल के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर है, लेकिन उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. अधिकारी आते-जाते हैं, आश्वासन मिलते हैं, लेकिन इस लाचार दिव्यांग की जिंदगी व्हीलचेयर और बैसाखी के अभाव में एक ही जगह सिमट कर रह गई है. ये दर्द है दोनों पैर से दिव्यांग महमदपुर सकरा के रंजीत पासवान का. सोमवार को दिव्यांग सबसे पहले सामाजिक सुरक्षा कोषांग गया, जहां उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला, छह महीने बाद आने को कहा गया,उसके बाद किसी उसे सिविल सर्जन कार्यालय जाने की सलाह दी.चिलचिलाती धूप में लाचार दिव्यांग सिविल सर्जन कार्यालय पहुंचा, जहां उसे समाहरणालय जाने की सलाह दी गई.
पांच साल पहले मिली ट्राईसाइकिल हो चुकी है कबाड़
मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित दिव्यांग को करीब पांच साल पहले समाज कल्याण विभाग की ओर से एक ट्राईसाइकिल दी गई थी. लंबे समय तक इस्तेमाल होने और उचित रखरखाव व मरम्मत के अभाव में वह ट्राईसाइकिल पूरी तरह सड़-गल चुकी है और अब चलने लायक नहीं बची है. ट्राईसाइकिल खराब होने के बाद से ही दिव्यांग की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है.
दो साल से सिर्फ मिल रहा है आश्वासन
अपनी लाचारी को दूर करने और एक अदद नई ट्राईसाइकिल की आस में पीड़ित पिछले दो वर्षों से लगातार संबंधित विभागीय कार्यालयों और अधिकारियों की चौखट पर दस्तक दे रहा है. आवेदन देने और गुहार लगाने के बावजूद विभागीय उदासीनता के कारण उसे सिर्फ तारीख और आश्वासन ही मिल रहे हैं.पीड़ित ने कहा कि पांच साल पहले जो गाड़ी मिली थी, वो पूरी तरह सड़ चुकी है.पिछले दो साल से पैर घिसटकर कार्यालय आता हूं कि शायद कोई साहब मेरी सुन लें, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन देकर लौटा दिया जाता है.
सवालों के घेरे में सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
सरकार दिव्यांगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं चलाती है. लेकिन इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और सामाजिक सुरक्षा सेल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक दिव्यांग को अपने ट्राईसाइकिल के लिए दो साल तक दर-दर भटकना पड़े, तो दावों की पोल खुलना लाजिमी है.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
