बिहार में मातृभाषा में होगी कक्षा पांचवीं से आठवीं तक के बच्चों की पढ़ाई
पटना।राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी-2020) के तहत अब एक अहम बदलाव होने जा रहा है। कक्षा 5 से 8 तक के बच्चों को अब उनकी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़ना है। इससे एक आत्मनिर्भर और गौरवशाली पीढ़ी का निर्माण होगा।
एनईपी के एक शोध में यह बात सामने आई है कि बच्चे स्थानीय बोली में कठिन बातों को जल्दी सीखते हैं। इससे स्कूल और घर के माहौल के बीच की दूरी कम होती है। अब पांचवीं से आठवीं तक की पढ़ाई इसी आधार पर होगी। बच्चों को राज्य की क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों में पढ़ाया जाएगा। इनमें मुख्य रूप से मैथिली, भोजपुरी, अंगिका, बज्जिका और मगही शामिल हैं।
मातृभाषा से मजबूत होगी शिक्षा: मंत्री
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने इस नीति पर अपनी गहरी प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने कहा कि बच्चा मां के आंचल में सबसे सुरक्षित महसूस करता है। ठीक उसी तरह मातृभाषा में पढ़ने से उसकी समझ बेहतर होती है। इससे बच्चों की मौलिक सोच का भी विकास होता है।
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