10-10 हजार रुपए बांट कर जीत गई NDA:चुनाव आयोग ने भी नहीं लगाई रोक
पटना।क्या NDA की रिकॉर्ड 202 सीटों के जीतने के पीछे चुनाव आयोग का एक फैसला है? फैसला-आचार संहिता के बावजूद बिहार की महिलाओं को 10-10 हजार रुपए बंटने देना। जबकि, 2004 के बाद कम से कम 5 राज्यों में ऐसी 10 योजनाओं पर आचार संहिता के नाम पर रोक दिया गया।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के नाम से राज्यभर में 10 हजार करोड़ रुपए बांटे गए। इसकी शुरुआत तो 26 सितंबर को पहली किश्त बांट कर की गई थी, लेकिन 6 अक्टूबर को आचार संहिता लगने के बाद भी 5 बार 10-10 हजार रुपए बांटे गए। एक किश्त तो चुनावों की घोषणा वाले दिन यानी आचार संहिता के ऐलान वाले दिन ही जारी की गई।
यही नहीं, नीतीश सरकार ने अक्टूबर में प्रदेश के सभी बड़े अखबारों में विज्ञापन देकर भुगतान की तारीख दिसंबर तक तय कर दी। ये विज्ञापन देखिए-
अब सवाल है कि आखिर देश के अलग-अलग राज्यों में एक जैसे नियमों के बावजूद फैसले अलग क्यों हुए? आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में जानिए, कहां-कहां चुनाव आयोग ने योजनाओं को रोका, वहां चुनाव में क्या हुआ…।
पॉइंट-1ः 5 राज्यों में रोका तो 3 में सरकार बदल गई
राजस्थान: इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना रोक
राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने अक्टूबर 2023 में मुफ्त स्मार्टफोन बांटने के लिए ‘इंदिरा गांधी स्मार्टफोन योजना’ लॉन्च किया। जिसे चुनाव आयोग ने आचार संहिता का हवाला देकर रोक दिया।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि स्मार्टफोन जैसी चीजों का मुफ्त बांटना आचार संहिता के दौरान सीधे मतदाताओं को लुभाने की श्रेणी में आता है। आयोग ने अपने आदेश में तर्क दिया कि भले ही योजना पहले से लागू हो, लेकिन निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने और चुनाव में सबके लिए समान अवसर को बनाए रखने के लिए, इस पर रोक आवश्यक है।
नतीजा- कांग्रेस की मौजूदा सरकार चली गई और भाजपा स्पष्ट बहुमत से लौटी।
तेलंगाना में रायथु बंधु योजना पर रोक
यह योजना PM-KISAN जैसी ही है। 10 मई 2018 को इसे तत्कालीन सीएम केसीआर ने लॉन्च की। इसमें किसानों को हर साल दो बार पैसा दिया जाता था। 2018 में जब यह योजना शुरू की गई थी तब 50.25 लाख किसान जुड़े थे।
तेलंगाना में विधानसभा चुनाव नवंबर 2023 में होने थे। 26 नवंबर 2023 को तेलंगाना के वित्त मंत्री टी. हरीश राव ने कहा कि रायथु बंधु योजना की राशि 28 नवंबर तक (वोटिंग से ठीक दो दिन पहले) दे दी जाएगी।
ECI ने मंत्री के इस बयान को आचार संहिता की शर्तों का उल्लंघन माना और योजना को आचार संहिता हटने तक स्थगित कर दिया।
नतीजा– चुनाव हुआ तो केसीआर की सरकार चली गई। कांग्रेस स्पष्ट बहुमत से लौटी।
आंध्र प्रदेश में YSR चेयुथा सहित 6 योजनाओं पर रोक
चुनाव आयोग ने आंध्र प्रदेश में विधानसभा-लोकसभा चुनाव से दो दिन पहले 9 मई 2024 को YSR चेयुथा सहित छह अन्य DBT योजनाओं के भुगतान को तुरंत रोक दिया।
अगस्त 2020 में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन सीएम वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने YSR चेयुथा योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत आंध्र प्रदेश की सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यक समुदाय के 45-60 साल की महिलाओं को आर्थिक सहायता देनी थी।
आयोग के अनुसार, इन योजनाओं में भुगतान 11-12 मई 2024 मतदान से ठीक पहले करने की योजना थी। चुनाव की घोषणा के बाद सत्ता पक्ष की सरकार को किसी भी नई वित्तीय घोषणा या जनहित सहायता का वितरण नहीं करना चाहिए।
YSR चेयुथा योजना के लिए ₹5,060.49 करोड़ का निर्धारण 7 मार्च 2024 को किया गया था, जिसे चुनाव प्रचार खत्म होने से ठीक पहले सरकारी बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाना था।
इसी तरह वाईएसआर आसरा और जगनन्ना विद्या दीवेना योजनाओं को भी चुनाव आयोग ने रोक दिया।
इसमें विद्या दीवेना योजना पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप के वितरण से संबंधित थी। इस योजना के तहत, सरकार लाभार्थी छात्रों की माताओं के बैंक अकाउंट में स्कूल फीस सीधे भेजने वाली थी।
वहीं, YSR आसरा योजना, बिहार के जीविका योजना की तरह ही स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिला सदस्यों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की थी। इन पर भी चुनाव आयोग ने रोक लगा दी।
नतीजा- जगनमोहन रेड्डी की सरकार चली गई। 175 में से चंद्रबाबू नायडू की पार्टी ने 135 सीटें जीत लीं। भाजपा भी सरकार में सहयोगी है।
ओडिशा: कालिया योजना पर रोक
ओडिशा सरकार ने दिसंबर 2018 में ‘कृषक सहायता आजीविका और आय संवर्धन’ योजना की शुरुआत की। 2019 विधानसभा चुनाव के दौरान रोक दिया गया था। इस योजना को ECI ने आचार संहिता का उल्लंघन माना।
KALIA एक नकद सहायता योजना थी, जिसमें खेती करने वाले प्रत्येक परिवार को ₹10,000 हर साल दिया जाता था। साथ ही 2 लाख रुपए का जीवन बीमा कवर और 57 लाख परिवारों के लिये 2 लाख रूपए का अतिरिक्त व्यक्तिगत दुर्घटना कवरेज भी शामिल था।
बीजद (बीजू जनता दल) ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया कि इसी तरह की योजना पीएम-किसान निधि के पैसे मिलने जारी हैं, लेकिन उनकी योजना रोक दी गई। इस पर चुनाव आयोग का तर्क था कि पीएम किसान निधि केंद्रीय बजट में पहले से ही आवंटित थी और यह एक पुरानी योजना थी। कालिया योजना की किस्त का वितरण एक नई घोषणा थी, इसलिए उसे आदर्श आचार संहिता के तहत रोक दिया गया।
नतीजा- पटनायक सरकार बरकरार रही, लेकिन भाजपा मजबूत हुई।
तमिलनाडु: 2004,2011 में रोकी गई दो योजनाएं
साल 2004 में लोकसभा चुनाव के ठीक पहले AIADMK (ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) की सरकार बिजली बिल भुगतान की योजना लेकर आई। इसमें छोटे किसानों को बिजली बिल के भुगतान की भरपाई के लिए मनी ऑर्डर से पैसे भेजे जाते थे। आयोग ने चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद मनी ऑर्डर के वितरण पर रोक लगा दी थी।
साल 2006 में तमिलनाडू की DMK (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) सरकार ने रंगीन टीवी बांटने की योजना बनाई। यह पांच साल तक चलती रही, लेकिन 2011 में चुनाव कार्यक्रम जारी होने के तुरंत बाद, चुनाव आयोग ने जिला कलेक्टरों को चुनाव समाप्त होने तक मुफ्त टीवी सेट बांटने पर रोक लगा दिया।
नतीजा- 2011 विधानसभा चुनाव में AIADMK गठबंधन ने 234 सीटों में लगभग 203 सीटें जीत लीं।
इस योजना पर ₹4000 करोड़ से अधिक खर्च हुए जिसमें 1.6 करोड़ से अधिक टीवी सेट वितरित किए गए
पॉइंट-2ः 2 राज्यों में कैश ट्रांसफर नहीं रोका, सरकार लौटी
बिहार में चुनाव के ऐलान के बाद भी महिलाओं को दिया पैसा
बिहार में 6 अक्टूबर को चुनाव की आचार संहिता लग गई। आचार संहिता के लागू होने के बाद भी नीतीश सरकार ने महिलाओं के अकाउंट 10-10 हजार रुपए भेजे हैं। इसकी शिकायत RJD ने चुनाव आयोग से की थी, लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुआ।
नतीजा- नीतीश सरकार दो तिहाई से ज्यादा बहुमत से सरकार में लौटी है।
झारखंड में वोटिंग से एक रात पहले आया मंईयां सम्मान योजना का पैसा
झारखंड में विधानसभा चुनाव से ठीक 4 महीने पहले हेमंत सोरेन सरकार ने मईयां सम्मान योजना शुरू की। इसमें 18 से 50 साल तक की महिलाओं को 2500 रुपए हर महीने दिया गया।
भाजपा ने आरोप लगाया कि वोटिंग की एक रात पहले तक सरकार ने चुपके से महिलाओं के अकाउंट में पैसा भेजा। भाजपा ने इसकी लिखित शिकायत आयोग से की, लेकिन रोक नहीं लगी।
नतीजा- हेमंत सोरेन की सरकार रिपीट हुई। JMM गठबंधन में दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाई।
एक्सपर्ट बोले- यह ठीक नहीं…
पॉलिटिकल एनालिस्ट अभिरंजन कुमार कहते हैं, अगर यह पैसा चुनाव के बीच में जाते रहे तो NDA 200 की बजाय 240 सीट भी जीते तो इसे अनफेयर ही कहा जाएगा। चुनाव के दौरान डायरेक्ट पैसा देना लोकतंत्र को कमजोर करने की प्रैक्टिस है। चुनाव से पहले ये सब करने से जनमत प्रभावित होता है और पांच साल के परफॉर्मेंस का आकलन नहीं हो पाता है।सोर्स:दैनिक भास्कर.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
