18 से गूंजने लगेगी शहनाई, बनारसी पंचांग में 13 तो मिथिला में 10 मुहूर्त
Patna :सनातन धर्मावलंबियों के सभी प्रमुख पर्व-त्योहार बीत गए हैं। अब शादी-ब्याह का दौर शुरू होगा। कार्तिक शुक्ल एकादशी को श्रीहरि विष्णु के चार महीने बाद योगनिद्रा से जागृत होने से मांगलिक कार्य आरंभ होंगे। 16 नवंबर को सूर्य तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। इसके बाद शादी-विवाह का दौर शुरू होगा। चातुर्मास की समाप्ति के बाद शुभ मुहूर्त 18 नवंबर से शुरू होंगे। इस वर्ष में कुल 13 शुभ लग्न मुहूर्त होंगे। बनारसी पंचांग के अनुसार नवंबर में नौ और दिसंबर में चार वैवाहिक लग्न हैं। जबकि मिथिला पंचांग के मुताबिक नवंबर में सात एवं दिसंबर में तीन शुभ विवाह मुहूर्त है। पिछले साल नवंबर और दिसंबर में दोनों पंचांग को मिलाकर 18 शुभ मुहूर्त थे।
नए साल में 4 फरवरी से शुरू होंगे विवाह : नए साल 2026 के पहले मास जनवरी में खरमास की समाप्ति के बाद भी शुक्र ग्रह के अस्त होने से शादी-ब्याह नहीं होंगे। 1 फरवरी की शाम 6 बजे पश्चिम दिशा से शुक्र पुनः उदित होंगे। इसके बाद नए साल में शादी-ब्याह का सिलसिला शुरू होगा।
वैवाहिक शुभ मुहूर्त
मिथिला पंचांग के मुताबिक
नवंबर: 20, 21, 23, 24, 26, 27, 30 { दिसंबर : 1, 4, 5 { जनवरी: 29 {फरवरी: 5, 6, 8, 15, 19, 20, 22, 25, 26 {मार्च: 4, 9,11,13
बनारसी पंचांग के अनुसार
नवंबर: 18, 19, 21, 22, 23, 24, 25, 29, 30 { दिसंबर: 1,4,5,6 {फरवरी: 4,5,6,7,8,10,11,12,13,14,15,19,20,21,24,25,26 { मार्च: 2,4,5,7,8,9,10,11,12,13,14
शादी के शुभ लग्न व मुहूर्त निर्णय के लिए वृष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु एवं मीन लग्न में से किन्ही एक का होना जरूरी है। वहीं नक्षत्रों में से अश्विनी, रेवती, रोहिणी, मृगशिरा, मूल, मघा, चित्रा, स्वाति, श्रवण, हस्त, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुन, उत्तरा भाद्रपद व उत्तराषाढ़ा में किन्ही एक का रहना जरूरी है। अति उत्तम मुहूर्त रोहिणी, मृगशिरा या हस्त नक्षत्र में से किन्ही एक की उपस्थिति रहने पर बनता है। पंडित राकेश झा ने बताया कि यदि वर और कन्या दोनों का जन्म ज्येष्ठ मास में हुआ हो तो उनका विवाह ज्येष्ठ में नहीं होगा। तीन ज्येष्ठ होने पर विषम योग बनता है। ये वैवाहिक लग्न में निषेध है। विवाह माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ एवं अगहन मास में हो तो अत्यंत शुभ होता है।
शादी में ग्रहों की शुभता जरूरी
शादी-विवाह के लिए शुभ मुहूर्त का होना बड़ा महत्वपूर्ण होता है। वैवाहिक बंधन को सबसे पवित्र रिश्ता माना गया है। इसलिए इसमें शुभ मुहूर्त का होना जरूरी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के शुभ योग के लिए बृहस्पति, शुक्र और सूर्य का शुभ होना जरूरी है। रवि गुरु का संयोग सिद्धिदायक और शुभफलदायी होते हैं। इन तिथियों पर शादी-विवाह को बेहद शुभ माना गया है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
