मम्मी-पापा के झगड़े से बेटी परेशान,बोलीं- प्लीज प्यार मत बांटिए,जज ने फैसला करने अपनी कुर्सी पर बच्ची को बिठाया
बेगूसराय जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने एक अनोखा प्रयोग करते हुए 11 साल की बच्ची को जज की कुर्सी पर बैठाकर फैसला करने का निर्देश दे दिया। इस दौरान बच्चों ने जब कहा कि हमें अलग-अलग नहीं, बल्कि माता-पिता का सामूहिक रूप से एक साथ प्यार मिलना चाहिए। इस बात पर सभी की आंखें नम हो गई।
यह अनोखा प्रयोग जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव-सह-न्यायाधीश करुणानिधि प्रसाद आर्या ने माता-पिता के झगड़ों से परेशान बच्चों को देखकर लिया। माता-पिता के बीच चल रहे विवाद के समाधान के लिए उनकी बच्ची को ही न्याय करने के लिए अपनी कुर्सी पर बिठा दिया।न्यायाधीश करुणानिधि प्रसाद आर्या ने बताया कि कुछ दिन पहले एक पति-पत्नी का मामला जिला विधिक सेवा प्राधिकार में सुलह के लिए आया। इसमें पत्नी का आरोप है कि उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है। इससे वह काफी परेशानी का सामना कर रही हैं। बच्चे भी माता-पिता की लड़ाई को देखकर काफी परेशान रह रहे हैं।
पति का कहना था कि पांचवें वर्ग में पढ़ने वाली 11 वर्षीय बेटी और 6 साल के बेटा को मैं दूसरी पत्नी सहित अपने पास रखूंगा। जबकि पत्नी का कहना था कि दोनों बच्चों पर हक हमारा है, दोनों के झगड़ा से बच्चे भी काफी परेशान थे। बच्चों को पिता और मां दोनों का प्यार चाहिए था। लेकिन यह संभव नहीं हो रहा था।
अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी
जज ने जब दोनों पक्ष को सुना तो बच्चों से ही फैसला करवाने का निर्णय लिया। इसी के लिए बच्चों को शुक्रवार को कोर्ट बुलाया गया। जहां जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव न्यायाधीश करुणा निधि प्रसाद में खुद अपनी कुर्सी पर बच्ची को बैठाया। बच्ची ने माता-पिता को समझाने का प्रयास किया।जज की कुर्सी पर बैठी बेटी ने कहा कि आपके झगड़े में हम दोनों भाई-बहन की जिंदगी परेशान और बर्बाद हो रही है। इसलिए आप दोनों आपस में सुलह करें और बच्चों की बातों को सुनें। बेटी की बात सुनकर माता और पिता सुलह की ओर अग्रसर हुए हैं। अब 15 अक्टूबर को फिर मामले की सुनवाई होनी है जिसमें बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद है।
बच्ची की बात का मां-पिता पर पड़ा प्रभाव
वहीं, जिला विधिक प्राधिकार के सचिव करुणानिधि प्रसाद आर्या ने बताया कि हमने बस एक प्रयास किया, इस प्रयास का असर दिखा है। यह बताने की कोशिश किया है कि माता-पिता के झगड़ों को बच्चे सुलझा सकते हैं। पति-पत्नी दोनों बच्चों पर हक जता रहे थे। मेडिएटर के माध्यम से हमने बच्चों को बुलाया सोचा कि बच्चे की मर्जी को ही जाना जाए।
बच्चे माता और पिता दोनों के साथ रहना चाहते थे। दोनों बच्चों ने कहा कि मां-पिता के झगड़ा में हम बर्बाद हो रहे हैं, यह संदेश है कि छोटी-छोटी बातों को लेकर आपस में झगड़ा नहीं हो। बच्चों का उत्तर बहुत ही मार्मिक था। कहीं न कहीं कठिन घड़ी आ जाती है जब बच्चे कहते हैं कि दोनों हमें प्यारे हैं और मां बाप साथ रहने को तैयार नहीं हैं।ऐसे में न्यायालय के समक्ष फैसला लेना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए मां-बाप के झगड़े का फैसला करने के लिए बेटी को ही चुना। बच्ची की बात का मां-बाप दोनों पर प्रभाव पड़ा है, दोनों भावुक हुए हैं। अंत में फैसला में बच्ची का कहना था कि मैं मां के साथ जाऊंगी और पिता भी मेरे लिए प्यारे हैं। अब 15 अक्टूबर को इस पर अंतिम निष्कर्ष होगा.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
