सिंघाड़ा में मां दुर्गा के पट खुले:250 साल पुरानी बकरे की बलि की परंपरा जारी,व्यंजनों का भोग
वैशाली के महुआ प्रखंड स्थित गोविंदपुर सिंघाड़ा गांव के देवी शक्तिपीठ मां दुर्गा मंदिर के पट खोल दिए गए हैं। पट खुलने के साथ ही मां दुर्गा की पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। यहां 250 सालों से चली आ रही बकरे की बलि की परंपरा इस बार भी निभाई गई।मंदिर में मां को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। पट खुलते ही मां दुर्गा के दर्शन के लिए 10,000 से अधिक भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। यह परंपरा पंचमी के दिन से शुरू होती है, जहां मां के पट खुलने के बाद बलि दी जाती है।
मां के पट खुलते ही दी जाती है बकरे की बलि
भक्तों के अनुसार, माता दुर्गा की 64 जोगिनियों को प्रसन्न करने के लिए मां के पट खुलते ही बकरे की बलि दी जाती है। इससे जोगिनियां प्रसन्न होती हैं। शक्तिपीठ के दरबार में पूरे बिहार के विभिन्न जिलों से लाखों श्रद्धालु पूजा और दर्शन के लिए आते हैं।
पंचमी के दिन स्कंद माता की विशेषता
मेला आयोजक सोहन सिंह और मोहन सिंह ने बताया कि पंचमी के दिन स्कंद माता की विशेषता होती है और इसी दिन मां दुर्गा के पट खोले जाते हैं। उन्होंने कहा कि पट खुलते ही मां की 64 जोगिनियों को खुश करने के लिए बकरे की बलि दी जाती है। सामान्य दिनों में 100 से 150 बकरों की बलि दी जाती है, जबकि नवरात्र में पंचमी से नवमी तक प्रतिदिन 2,000 बकरों की बलि दी जाती है।
कुम्हारों को दिया जाता है बलि का प्रसाद
प्रथम पंचमी के दिन दी गई बलि का प्रसाद उन कुम्हारों को दिया जाता है जो माता दुर्गा की प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं। इस दौरान स्थानीय विधायक मुकेश रौशन ने भी पूजा-अर्चना की। बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर माता का आशीर्वाद लिया।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
