दुर्गापूजा:8 सौ वर्ष पहले शादी के चार दिन बाद ही सती हुई थीं माता,होती है विशेष पूजा,मनोकामना होती है पूरी
समस्तीपुर.मोरवा.प्रखंड क्षेत्र के सारंगपुर व तिसवारा गांव के सीमांचल पर जमुआरी नदी के तट पर स्थित माता सती स्थान सिद्ध शक्ति के लिए काफी प्रसिद्ध है। शारदीय नवरात्र की संपूर्ण अवधि में यहां शक्ति साधना को लेकर अनुष्ठान होते रहते हैं। श्रद्धालु पंचकलश के समक्ष विकृत भावनाओं को त्याग शक्ति स्वरूपा मां की अराधना में दिन-रात लीन रहते हैं। और फिर माता सती से मनोवांछित फल की प्राप्ति की कामना करते हैं।देश के सुविख्यात संत मौनी बाबा को पहली सिद्धि और ईश्वरीय कृपा इसी माता सती के गर्भगृह में प्राप्त हुई थी।इसके बाद ही इन्होंने संपूर्ण देश में घूमघूम कर दो दर्जन से अधिक भक्तिधाम की स्थापना की थी।लोक मान्यता है कि यहां शुद्ध मन से मांगी गई हर दुआएं पूरी होती है।यह स्थल तिसवारा गांव के ग्रामीणों के लिये पुण्य स्थली भी है इस वर्ष आचार्य पं रंजन झा के वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच ऋषिकेश कुमार राहुल संकल्प ले कर उक्त पवित्र स्थल पर माता सती के परिसर में शारदीय नवरात्र कर रहे हैं।
जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर मुसरीघरारी हाजीपुर पासवान चौक जानेवाली एनएच 322 से सटे 1 किलोमीटर पूरब मां के इस पवित्र स्थल पर दूसरे जिले से भी लोग अपनी मन्नतें मांगने आते हैं। मन्नत पूरी होने पर उसे उतारने भी आते हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार करीब आठ सौ वर्ष पूर्व तिसवारा गांव वासी ईश्वर के परम उपासक लक्ष्यराम ठाकुर का विवाह के मात्र चौथे दिन ही देहावसान हो गया था। उस समय बाढ़ के कारण उनके अंत्येष्टि को लेकर गंगाघाट जाना असंभव देख ग्रामीणों ने जमुआरी नदी के तट पर ही चिता में अग्नि दी गई। लेकिन अथक प्रयास के बाद भी उस चिता की अग्नि प्रज्जवलित नहीं हो पाई। यह बात नव विवाहिता पतिव्रता भक्तमती पत्नी वैष्णवी के कानों तक पहुंची। तत्क्षण वह श्मशान घाट पहुंचकर अपने पति के पार्थिव शरीर को अपनी गोद में लेकर अग्नि को समर्पित कर दी। सती ने ग्रामीणों को यह वरदान दी कि इस गांव को कभी भी प्राकृतिक आपदा का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही इस गांव के लोगों को मृत्युपरांत गंगा लाभ इसी स्थान पर मिलेगा। उस समय से आज तक तिसवारा गांव के मृतकों का दाह संस्कार इसी स्थल पर होता आ रहा है।
5 कलशों के साथ तांत्रिक विधि से होती है पूजा-अर्चना अब तक बिहार ही नहीं संपूर्ण देश के लाखों लोग माता सती की कृपा से अपने जीवन में कल्याण की प्राप्ति कर चुके हैं। इसीलिए माता सती के भक्तों का प्रतिदिन सालों भर यहां आना जाना लगा रहता है।यूं तो सालों भर यहां श्रद्धालुओं का आगमन होता रहता है विशेषकर चारों नवरात्र में यहां की रौनक और बढ़ जाती है।
शारदीय नवरात्र में सर्वाधिक पांच कलशों के साथ तांत्रिक विधि से यहां की जा रही पूजा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।उक्त सती स्थान लगभग 800 वर्ष से भी पुरानी है। लोगों की मान्यता है इस स्थान में आकर मन्नत मांगने वाले व पूजा अनुष्ठान करने वाले की माता मनोकामना पूर्ण करती हैं।माता सती के सेवक व श्रद्धालु भक्तों में अनिल कुमार ठाकुर, मंदिर के पुजारी सच्चिदानंद ठाकुर, घनश्याम ठाकुर, सुशील ठाकुर,नवीन कुमार ठाकुर, सीताराम ठाकुर, धनंजय कुमार ठाकुर,सरोज पाठक,विजय ठाकुर को समेत ग्रामीण पूजा संपन्न कराने में पूरी सक्रियता से योगदान करते आ रहे हैं।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
