वैशाली में कागजों में तीन साल पहले मौत,मृतक’ पहुंचा बैंक, बोला- मैं मरा नहीं साहब, जिंदा हूं
वैशाली से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। लालगंज स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक वृद्ध पेंशनधारी बैंक में पैसा निकालने पहुंचा। उसे सरकारी रिकॉर्ड में तीन साल पहले ही मृत घोषित कर दिया गया था।
मथुरापुर कुशदे गांव निवासी नित्यानंद सिंह दिव्यांग हैं और देख नहीं सकते। जब नीतीश सरकार की पेंशन राशि बढ़ाकर 1100 रुपए किए जाने की खबर सुनी तो वह भतीजे के साथ बैंक पहुंचे। बैंक कर्मचारियों ने बताया कि उनका खाता बंद हो चुका है, पहले केवाईसी अपडेट करना होगा।
केवाईसी हुआ, खाता खुला… लेकिन पैसे का पता नहीं
नित्यानंद ने किसी तरह केवाईसी पूरा करवाया और खाता दोबारा सक्रिय हुआ। लेकिन जब उन्होंने खाता चेक करवाया तो उसमें एक भी पैसा नहीं था। बैंक ने उन्हें प्रखंड कार्यालय भेजा, जहां से असली झटका लगा।
प्रखंड कार्यालय का जवाब- “आप तो मर चुके हैं बाबा”
जब वे अपने भतीजे के साथ प्रखंड कार्यालय पहुंचे, तो वहां के कर्मियों ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु तीन साल पहले दर्ज हो चुकी है। इसी कारण उनकी पेंशन रोक दी गई है।
नित्यानंद ने बार-बार कहा, “मैं जीवित हूं साहब”, लेकिन रिकॉर्ड की ताकत के आगे उनकी जिंदा मौजूदगी भी सबूत नहीं बन सकी। वे बीते 15 दिनों से खुद को ‘जिंदा’ साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
सिस्टम की लापरवाही, आम आदमी की परेशानी
यह कोई पहला मामला नहीं है जब किसी जीवित व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया हो। लेकिन यह मामला एक बार फिर सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करता है। जहां कागज पर मौत का मतलब असल जीवन से भी बड़ा सच बन जाता है।नित्यानंद के लिए अब खुद को जीवित साबित करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना यह है कि सरकारी रिकॉर्ड में नित्यानंद कब फिर से ‘जीवित’ होंगे।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
