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चहक मॉड्यूल:सूबे के 19.3 प्रतिशत स्कूलों में ही बच्चों ने खेल-खेल में पढ़ाई के तरीके सीखे

चहक मॉड्यूल;पहली कक्षा में पढ़ाई कर रहे बच्चों को बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान में दक्ष बनाने वाले चहक मॉड्यूल को लागू करने में सूबे के प्राथमिक विद्यालय पिछड़ रहे हैं। अब तक राज्य में महज 19.3 फीसदी स्कूल के बच्चों को ही इसका लाभ मिल सका है। चहक मॉड्यूल से नव नामांकित बच्चों को खेल – खेल में पढ़ाई और जॉयफुल लर्निंग के तरीके बताए जाते हैं। चहक मॉड्यूल का लागू करने में मुजफ्फरपुर को सूबे में 15 वां रैंक मिला है। यहां 3021 प्राथमिक स्कूलों में से अब तक महज 790 स्कूलों ने इसे लागू किया है।

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यानी कुल संख्या का महज 26.2 फीसदी। इस मामले में शिवहर की स्थिति तिरहुत प्रमंडल में सबसे बेहतर है। यहां के 43.8 फीसदी विद्यालयों ने चहक मॉड्यूल को लागू किया है। सूबे में शेखपुरा को पहली रैंक मिली है। यहां के कुल 480 स्कूलों में 330 में चहक मॉड्यूल से पढ़ाई कराई जा रही है। करीब 68.8 फीसदी स्कूलों में बच्चों को इसका लाभ मिल रहा है। सूबे के 69243 स्कूलों में एनसीईआरटी की ओर से विकसित विद्या प्रवेश निर्देशिका स्कूल रेडीनेस मॉड्यूल चहक को लागू किया जाना है।

अब तक महज 13332 स्कूलों में ही बच्चों ने इसे जाना है। औरंगाबाद के एक भी प्राथमिक स्कूल में इसे शुरू नहीं किया जा सका है। इसी तरह लखीसराय के 1 विद्यालय, गोपालगंज के 11, गया के 14 स्कूलों में इसकी चर्चा हुई है। तिरहुत प्रमंडल में वैशाली में अब तक 9.5 फीसदी, पूर्वी चंपारण में 13.1 फीसदी, पश्चिम चंपारण में 17.4 फीसदी, सीतामढ़ी में 26 फीसदी ही लक्ष्य पूरा किया जा सका है। बीईपी के गुणवत्ता शिक्षा संभाग प्रभारी सुजीत कुमार ने बताया कि सभी बीईओ को चहक मॉड्यूल लागू कराए जाने का निर्देश दिया जा चुका है। इसके लिए अभ्यास पुस्तिकाओं का भी वितरण किया गया है।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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