100 फीसदी कचरे काे करना होगा रियूज, प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग ही इसके प्रभाव से बचने का उपाय : डीएम
समस्तीपुर।
जिला के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में प्लास्टिक उपयोग के रोक व इसके रियूज को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए कलेक्ट्रेट सभागार में गुरुवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। “रूरल व अर्बन लैंडस्केप फ्री ऑफ ड्राई व प्लास्टिक वेस्ट’ के विजन को लेकर जिला व नगर प्रशासन के साथ मिलकर सेंटर फॉर इन्वायरमेंटल एडुकेशन सीईई की ओर से कार्यशाला आयोजित थी। इस अवसर पर डीएम योगेन्द्र सिंह ने कहा कि हमें सौ फीसदी कचराें का रियूज करना होगा। पहले से अब कचराें की तादाद के साथ ही उसकी भिन्नता बढ़ी है। इससे चुनौती भी बढ़ी है। आज के समय में हम प्लास्टिक पर पूरी तरह से निर्भर हो चुके हैं।
प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग को लेकर प्रत्येक नागरिक जागरूक हों
प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग ही इसके प्रभाव से बचने का उपाय है। इसको लेकर हमें हरएक नागरिक को जागरूक करना आवश्यक है। आज सड़कों पर बड़े-बड़े डस्टबिन खाली खड़े हैं जबकि उससे कहीं अधिक कचरा उसके आसपास फेंका जाता है। प्लास्टिक रिसाइक्लिंग को लेकर यहां प्लांट बैठाया जा रहा है। जहां शहर से गांव तक से आए प्लास्टिक को रियूज लायक बनाया जाएगा। मौके पर डीडीसी अखिलेश कुमार सिंह, डीपीआरओ ऋषव राज, सीईई के एसपीओ अरविन्द कुमार, स्वच्छताकर्मी व पूरी टीम मौजूद थी।
शहर के धरमपुर स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड में एक माह में प्लास्टिक का रिसाइक्लिंग शुरू हो जाएगा। इसके बारे में सीईई के एसपीओ अरविन्द कुमार ने बताया कि यहां राज्य का दस एमटी क्षमता वाला पहला यूनिट खुल रहा है। उन्होंने बताया कि ज्यादा प्लास्टिक आने पर दो शिफ्ट में प्रतिदिन 20 एमटी प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग होगी। सीईई के प्रोजेक्ट मैनेजर ने प्लास्टिक के रियूज को जनभागीदारी आंदोलन में बदलने की बात कही। जिसके माध्यम से इसके प्रभाव से मुक्ति मिल सकती है। वहीं 90 फीसदी कचरा का यूज होगा।
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