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बिहार में गुंडा बैंकर्स की समानांतर सत्ता, कर्ज दे जबरिया लिखा ले रहे जमीन-मकान

 

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कौशल किशोर मिश्र, भागलपुर। रेशम नगरी भागलपुर, मधेपुरा, पूर्णिया, कोसी व सीमांचल के दियारा क्षेत्र में आज भी अघोषित रूप से गुंडा बैंकर्स का राज कायम है। जरायम की दुनिया से निकल कर महाजन बन बैठे अपराधियों ने न खाता न बही, जो फरमान सुना दिया वही सही के तर्ज पर बाकायदा लोकल बैंक खोल रखे हैं जो स्थानीय स्तर पर गुंडा बैंक के नाम से कुख्यात हो गया। जहां आठ से दस फीसद महीने की ब्याज दर पर कर्ज मिलता है। ब्याज और मूल की वसूली के लिए कर्जदारों के शरीर से खाली डिस्पोजल सीरिंज के जरिये खून निकाला जाता है। गुंडा बैंक संचालकों की तरफ से कर्ज के बोझ तले लोगों से ब्याज के पैसे लेने के लिए यातनाएं दी जाती है। बैंकर्स के गुंडों के यातनाओं का दौर इतना भयानक होता है कि रूह कांप जाए। कई लोगों की हत्या तक हो चुकी है। थानों में 20 सालों के दौरान अबतक चार सौ से अधिक मामले गुंडा बैंकर्स की ज्यादतियों से संबंधित दर्ज हो चुके हैं।

भागलपुर जिले के नवगछिया अनुमंडल के दियारा इलाके, सबौर, नाथनगर अंचल के मधुसूदनपुर्, पूर्णिया, मधेपुरा, कोसी-सीमांचल इलाकों में गुंडा बैंक खुलेआम चलाये जा रहे है। बताया जाता है कि लोकल बैंक चलाने की सोच वर्षों पूर्व सबसे पहले तिनटंगा दियारा के सिकंदर नामक एक चर्चित शख्स ने अपने लोगों के सामने रखी थी। उसमें यह समझ तब हुए सूबे के एक चर्चित घोटाले के पैसे आने के बाद विकसित हुई थी। घोटाले में लिप्त बड़े ओहदेदारों ने उसे बैंक चलाने के लिए तब एकमुश्त रकम दी थी। शर्त यह थी कि बैंक के जरिये उनके दो नंबर के पैसे ब्याज पर लगाएं। पहले तीन रुपये सैकड़े की दर से बैंक संचालक को घोटाले का पैसा मिला था जिसे उसने चार रुपये की दर से लोगों को कर्ज तब बांटा था। इसमें प्रत्येक माह ब्याज न देने पर ब्याज की रकम मूलधन में जुट जाती है। इसे यहां कट्ठी का नाम दिया गया है।(यह चक्रवृद्धि ब्याज की तरह है)। देखते ही देखते सरस्वती, शारदा, बीणापानी, सहारा, मां विषहरी विकास बैंक, शिवशंकर बैंक समेत सैकड़ों की संख्या में गुंडा बैंक उग आए। बैंक के संचालकों में अधिकांश की पृष्ठभूमि आपराधिक है। कर्ज और ब्याज में ना नुकुर करने का अंजाम मौत होती है। कटिहार जिले के कुर्सेला निवासी लकड़ी व्यवसायी संजय चिरानियां का अपहरण तीन जनवरी 2006 को गुंडा बैंक के रुपए न लौटाने पर किया गया था। व्यवसायी ने गुंडा बैंक से 16 लाख कर्ज लिए थे। उसकी बरामदगी पांच दिनों बाद कटिहार, पूर्णिया और भागलपुर पुलिस की संयुक्त छापेमारी में नवगछिया के तिनटंगा दियारे में अवधेश मंडल के यहां से हुई थी।

इसके बाद ही गुंडा बैंक का पर्दाफाश हुआ था। अवधेश के घर से कंप्यूटर, सीडी समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए थे। त्वरित अदालत में एक अभियुक्त कारेलाल मंडल को तीन साल की सजा हुई थी। गुंडा बैंक से कर्ज लेने के बाद न लौटाने पर भागलपुर के नारायणपुर प्रखंड स्थित जयपुर चोरहर गांव निवासी महेश चंद्र मंडल के शरीर से सीरिंज के जरिये तब तक खून निकाला गया जब तक वह बेहोश नहीं हो गया। वर्तमान समय में गुंडा बैंकर्स की सूद की राशि आठ से दस रुपये प्रतिमाह सैकड़ा की दर से कर्जदारों को दिया जाता है। यही नहीं कर्जदारों को कर्ज देते समय ही सूद की रकम पहले माह की काट कर दी जाती है। एक बार इन सूदखोरों से सूद की रकम ली तो मानो उसके जाल में ही फंस गए। भागलपुर और नवगछिया में सूदखोरों से पीड़ित लोगों की संख्या सैकड़ों की तादात में है। उनसे कर्ज लेने वाले कंगाल होते चले गए जबकि सूदखोरों ने अकूत चल-अचल संपत्तियों के मालिक बन बैठे।

केस स्टडी : नाथनगर थाने में 21 अगस्त 2022 को स्टेशन रोड बाजार लेन, नाथनगर निवासी गोपाल कृष्ण साह ने सूदखोर दबंगों के विरुद्ध् केस दर्ज कराते हुए दो लाख 50 हजार रुपये का कर्ज तीन साल पूर्व करेला निवासी प्रिंस यादव से लेने की बात कही। कर्ज के एवज में वह चार लाख 50 हजार रुपये अबतक लौटा चुका है। उसे सूदखोर महाजन ने धमकी दी कि वह अभी और रकम दे। उसे प्रापर्टी डीलर बिजय यादव के गैराज में बुलाकर मारपीट की गई। हथियार का भय दिखा उसकी जमीन जबरन लिखवाने का प्रयास किया गया।

Kunal Gupta

9 साल का पत्रकारिता का अनुभव।प्रभात खबर में कार्यरत, साथ ही बिहार न्यूज tv, आज अख़बार, दैनिक भास्कर में कार्य का अनुभव।कंटेट राइटर, एडिटिंग का कार्य,पत्रकारिता की हर विधा को सीखने की लगन।

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