Begusarai

बेगूसराय- 10.82 करोड़ का दिनकर घाट गंगा में समाया,15 साल देख-रेख का दावा करने वाली एजेंसी गायब

बेगूसराय के सिमरिया धाम स्थित श्मशान घाट के पास बना दिनकर घाट 2 साल के अंदर ही गंगा नदी की तेज धारा और जलस्तर में वृद्धि के कारण पूरी तरह ध्वस्त होकर नदी में समा गया है। करीब 10 करोड़ 82 लाख रुपए की भारी-भरकम लागत से निर्मित इस स्थाई स्नान घाट के नीचे से मिट्टी का कटाव इतनी तेजी से हुआ कि इसका बड़ा हिस्सा ढह गया।

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हालत ये है कि जिस स्थान पर कभी भव्य सीढ़ियों वाला घाट चमकता था, वहां केवल कंक्रीट का मलबा ही नजर आ रहा है। हरिद्वार के प्रसिद्ध हर की पौड़ी की तर्ज पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विकसित किए गए इस प्रोजेक्ट के हाल को लोग सरकारी धन की बर्बादी बता रहे हैं। स्थानीय लोग इसे निर्माण एजेंसियों की लापरवाही और संवेदनहीनता बता रहे हैं।

 

 

 

फरवरी 2023 में दिनकर घाट का पूरा हुआ था निर्माण कार्य

 

नमामि गंगे योजना के तहत इस स्थाई स्नान घाट का निर्माण पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के सीएसआर (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) फंड से कराया गया था। इसके निर्माण की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की महारत्न निर्माण एजेंसी नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (एनबीसीसी) इंडिया लिमिटेड को सौंपी गई थी। फरवरी 2023 में इसका निर्माण कार्य पूरा हुआ।अनुबंध की शर्तों के अनुसार निर्माण के बाद अगले 15 साल तक इस घाट की मरम्मत, सुरक्षा और देख-रेख की पूरी जिम्मेदारी इसी कार्यकारी संस्था एनबीसीसी की थी। विडंबना ये कि निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद से लेकर आज तक एनबीसीसी का कोई भी अधिकारी या इंजीनियर घाट की स्थिति जानने या इसकी सुध लेने कभी सिमरिया नहीं पहुंचा।

 

फरवरी 2024 में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने किया था लोकापर्ण

 

फरवरी 2024 में स्थानीय सांसद सह केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने इस घाट का लोकार्पण किया था। लेकिन लोकार्पण के कुछ ही महीनों बाद ये पूरा ढांचा गंगा की गोद में विलीन हो गया। 63 मीटर लंबे और 25 मीटर चौड़े इस स्थाई स्नान घाट के निर्माण की शुरुआत से ही स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि इसके स्थान चयन, डिजाइन और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाते रहे थे।स्थानीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि एनबीसीसी द्वारा घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और घटिया निर्माण कार्य किया गया। जिस समय घाट की सीढ़ियां और सुरक्षा दीवारें बनाई जा रही थी, उस समय भी स्थानीय लोगों ने घटिया निर्माण का कड़ा विरोध जताया था। लेकिन न तो ठेकेदार ने इस पर ध्यान दिया और न ही एनबीसीसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच करने की जहमत उठाई।

 

 

‘निर्माण के दौरान पारदर्शिता का नामो-निशान नहीं था’

 

बीहट नगर परिषद के उप मुख्य पार्षद ऋषिकेश कुमार ने बताया कि जिस समय सिमरिया धाम में नमामि गंगे के तहत इस घाट का निर्माण हो रहा था, उस समय क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और आम लोग बेहद उत्साहित होकर निर्माण कार्य देखने जाया करते थे। सिमरिया धाम बेगूसराय और पूरे बिहार के लिए एक ऐतिहासिक और पवित्र स्थल माना जाता है, जहां हर पर्व-त्योहार पर लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं।लगा था कि केंद्र सरकार की योजना के तहत सिमरिया में एक अभूतपूर्व और आधुनिक घाट बनने जा रहा है, जिससे यहां आने वाले तीर्थयात्रियों को असीम सहूलियत मिलेगी। लेकिन निर्माण के दौरान पारदर्शिता का नामो-निशान नहीं था। जब भी स्थानीय लोग या जनप्रतिनिधि वहां जाकर काम की जानकारी मांगते थे, तो वहां मौजूद कर्मी और ठेकेदार के लोग भगा देते थे।

 

कहते थे कि अभी इंजीनियर नहीं हैं, आप लोग यहां से जाइए। लोगों ने सोचा कि चलो सीढ़ीदार घाट बन रहा है, तो फायदा जनता को ही होगा। लेकिन संवेदक और एनबीसीसी ने जिस संवेदनहीनता के साथ काम किया, उसका परिणाम आज सबके सामने है। कई दशकों बाद जब इस बार गंगा के जलस्तर में इतना भारी इजाफा हुआ और पानी का दबाव बढ़ा, तो घटिया नींव पर टिका यह पूरा निर्माण कार्य ध्वस्त होकर नदी में विलीन हो गया।उन्होंने कहा कि गंगा नदी या उसके पानी का बहाव इस तबाही का कारण नहीं है, क्योंकि नदियां तो अपने कुदरती नियम से बहती ही रहेंगी। इसके लिए पूरी तरह से निर्माण एजेंसी और उसका संवेदक दोषी है, जिन्होंने बिना सुरक्षा मानकों का पालन किए केवल कागजों पर काम पूरा कर अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया।

 

 

दिनकर घाट से 500 मीटर दूर बना घाट पूरी तरह सुरक्षित

 

उप मुख्य पार्षद ने बताया कि इसी स्थान से महज 500 मीटर की दूरी पर बिहार सरकार के जल संसाधन विभाग द्वारा एक अन्य घाट का निर्माण कराया गया है, जो आज भी गंगा की उफनती धारा के बीच पूरी तरह सुरक्षित और ज्यों का त्यों खड़ा है।घाट निर्माण के दौरान विभाग के सचिव, डीएम और तकनीकी अधिकारियों की मौजूदगी में जल कटाव से बचाव के लिए ठोस उपाय किए गए थे। उस घाट में पानी के कटाव को रोकने के लिए 50 से 60 फीट गहरे से सेफ्टी पायलिंग कराया गया, जो नदी के प्रचंड वेग को सहने में सक्षम है।

 

लेकिन एनबीसीसी ने बनाए गए दिनकर घाट में इस तरह का कोई तकनीकी सुरक्षा चक्र या पायलिंग कार्य नहीं किया गया। घटिया और उथली नींव होने के कारण जैसे ही गंगा की धारा ने घाट के नीचे की मिट्टी को काटना शुरू किया, पूरा ढांचा नीचे से खोखला होकर गिर गया।बीहट नगर परिषद के उप मुख्य पार्षद ऋषिकेश कुमार ने कहा कि घाट की दुर्दशा के लिए पूरी तरह से निर्माण एजेंसी और उसका संवेदक दोषी हैं।

घाट के मलबे में बदलने से कार्तिक कल्पवास मेले पर मंडरा रहा खतरा

 

ऋषिकेश कुमार ने बताया कि बेगूसराय की यह पावन धरती राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है। राष्ट्रकवि दिनकर के प्रति सम्मान व्यक्त करने के उद्देश्य से ही इस प्रथम स्थाई स्नान घाट का नामकरण दिनकर घाट किया गया था। छठ में यहां श्रद्धालु गंगा के पवित्र जल में खड़े होकर अस्ताचलगामी और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं।लोग कल्पना करते थे कि हरिद्वार के हर की पौड़ी की तरह वे भी दिनकर घाट की सुंदर सीढ़ियों पर बैठकर गंगा स्नान करेंगे, तस्वीरें खिंचवाएंगे और रील बनाएंगे। लेकिन संवेदक की लापरवाही ने स्थानीय लोगों की इन तमाम आकांक्षाओं और सांस्कृतिक भावनाओं पर पानी फेर दिया। इस घाट के ध्वस्त होने से सबसे बड़ा संकट आने वाले कार्तिक कल्पवास मेले पर मंडरा रहा है।

 

अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में शुरू होगा कल्पवास मेला

 

सिमरिया धाम में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से ऐतिहासिक कल्पवास मेला शुरू होने वाला है, जिसमें पूरे बिहार और देश के कोने-कोने से हजारों कल्पवासी और साधु-संत महीने भर के कठिन व्रत और कल्पवास के लिए जुटते हैं। कल्पवासियों के ठहरने के मुख्य स्थल से यह दिनकर घाट मात्र 150 मीटर की दूरी पर स्थित था, जिससे बुजुर्गों और श्रद्धालुओं को स्नान करने में बहुत आसानी होती।कल्पवासियों को उम्मीद थी कि इस बार वे इसी सुंदर और सुलभ घाट पर गंगा स्नान करेंगे। अब घाट के पूरी तरह तबाह हो जाने के कारण कल्पवासियों की उम्मीदें टूट चुकी हैं और उन्हें विवश होकर दूर के घाटों पर जाना पड़ेगा। फिलहाल घाट ध्वस्त होने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा एनबीसीसी और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग किया है।

Anaya

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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