दानापुर-मां ने अस्पताल में 8 दिन की बच्ची को छोड़ा:घंटों बाद नानी के साथ लौटी
पटना.दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में गुरुवार को एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। यहां एक मां अपनी महज आठ से दस दिन की नवजात बच्ची को अस्पताल के दवा वितरण केंद्र के बाहर स्लैब पर कपड़े में लपेटकर छोड़ गई।मासूम बच्ची कुछ देर तक उसी स्लैब पर रोती रही। जब भीड़ कम हुई, तो एक सफाईकर्मी की नजर स्लैब पर पड़ी। पास जाकर देखा तो कपड़े में लिपटी नवजात बच्ची रो रही थी। बच्ची को अकेला देखकर अस्पतालकर्मी हैरान रह गए।
इसकी जानकारी तुरंत अनुमंडल अस्पताल के डीएस को दी गई। अस्पताल कर्मियों ने परिसर में बच्ची की मां को ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिली। इसके बाद डीएस ने सफाई सुपरवाइजर स्वाति देवी को बच्ची की देखभाल करने के लिए कहा। स्वाति ने बच्ची को अपनी गोद में उठाया और उसे दूध पिलाया, जिसके बाद बच्ची शांत हो गई।
अस्पताल कर्मियों ने पुलिस को खबर दी। दानापुर पुलिस अस्पताल पहुंची और बच्ची के बारे में जानकारी इकट्ठा की। पुलिस जांच कर ही रही थी कि शाम को एक बुजुर्ग महिला और एक युवती अस्पताल आईं।
बुजुर्ग महिला ने बताया कि बच्ची उसकी नातिन है और युवती उसकी मां नीतू देवी है। बुजुर्ग महिला मनेर थाना क्षेत्र के ब्रह्मचारी गांव की रहने वाली है। उसकी बेटी नीतू देवी की करीब एक साल पहले सनोज राय से कोर्ट मैरिज हुई थी। नीतू ने पांच सितंबर को मनेर थाना क्षेत्र के एक अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया था।नीतू ने पुलिस के सामने जो वजह बताई, वह वहीं बच्ची की मां बताई जा रही नीतू ने पुलिस के सामने जो वजह बताई, वह और भी चौंकाने वाली है। उसका कहना है कि वह अपने पति के डर से बच्ची को छोड़ गई, यह जांच का विषय है।
फिलहाल दानापुर पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। बच्ची वास्तव में नीतू की है या मामले में कोई और सच्चाई छिपी है, इसका खुलासा पुलिसिया जांच और आवश्यक सत्यापन के बाद ही होगा। लेकिन इस घटना ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है। जिस मां की गोद में एक नवजात को दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह मिलनी चाहिए थी, आखिर वह मासूम अस्पताल के स्लैब पर अकेली क्यों छोड़ दी गई.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
