Patna

अमृत राजकुमार बने सेना में लेफ्टिनेंट, भारत-चीन सीमा के पास स्पीति वैली में होगी पहली तैनाती

नालंदा के बिहारशरीफ स्थित बड़ी पहाड़ी के रहने वाले अमृत राजकुमार ने अपनी मेहनत और लगन से परिवार का सपना साकार किया है. 5 सितंबर को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी की पासिंग आउट परेड के बाद अमृत को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन मिला. बेटे के कंधों पर सेना के सितारे सजे तो परिवार के लिए यह पल गर्व और भावुकता से भर गया. साधारण परिवार से निकलकर सैनिक स्कूल और दिल्ली विश्वविद्यालय तक का सफर तय करने वाले अमृत ने बचपन में ही सेना में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था.

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11 महीने की कठिन ट्रेनिंग के बाद मिली नई जिम्मेदारी

अमृत राजकुमार ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई में 11 महीने की कठिन सैन्य ट्रेनिंग पूरी की. इसके बाद 5 सितंबर को आयोजित पासिंग आउट परेड में उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन प्रदान किया गया. सैन्य वर्दी में बेटे को देखकर परिवार के सदस्यों की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे. अमृत की इस उपलब्धि को परिवार उनके दादा के सपने के पूरा होने के रूप में देख रहा है.

 

अमृत की मां ने कहा कि बेटे को सेना में भेजना एक मां के लिए आसान नहीं होता, लेकिन उन्हें अपने बेटे पर बहुत गर्व है. उन्होंने बताया कि अमृत बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छा रहा है. जब उसका सैनिक स्कूल में दाखिला हुआ, तभी से उन्हें लगने लगा था कि बेटा आगे चलकर कुछ बड़ा करेगा.

 

 

 

लेफ्टिनेंट अमृत राज कुमार।

भारत-चीन सीमा के पास होगी पहली तैनाती

लेफ्टिनेंट बनने के बाद अमृत राजकुमार की पहली तैनाती हिमाचल प्रदेश की स्पीति वैली में होने जा रही है. यह इलाका भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित है. करीब 20 दिनों की छुट्टी के बाद अमृत अपनी पहली सैन्य जिम्मेदारी संभालने के लिए रवाना होंगे. परिवार के लिए यह गर्व का क्षण होने के साथ भावुक विदाई का समय भी होगा.

 

अमृत की दादी ने कहा कि उनका पोता बचपन से ही मेहनती रहा है. उन्होंने गर्व के साथ कहा कि बाबू देश की सेवा करेगा, इसी भावना के साथ उसने लगातार मेहनत की है. परिवार को भरोसा है कि अमृत पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ देश की सेवा करेंगे.

 

सैनिक स्कूल से ही तय कर लिया था लक्ष्य

लेफ्टिनेंट अमृत राजकुमार ने बताया कि सभी पेशों के माध्यम से देश की सेवा की जा सकती है, लेकिन उन्हें सैनिक स्कूल के समय से ही अपना उद्देश्य मिल गया था. वहीं से उन्होंने सेना में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और लगातार उसी दिशा में आगे बढ़ते रहे.

 

अपनी मां और दादी के साथ लेफ्टिनेंट अमृत राज कुमार।

उन्होंने बताया कि देश के बलिदानियों की कहानियों ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया. उनकी फैमिली में पहले से कोई सेना में नहीं है. संयुक्त परिवार में रहने वाले अमृत ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार के सभी सदस्यों को दिया. उन्होंने कहा कि परिवार के हर सदस्य ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और उनका हौसला बढ़ाया.

 

परिवार के सहयोग से हासिल किया मुकाम

अमृत ने कहा कि सेना में लेफ्टिनेंट बनना उनके लिए सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि पूरे परिवार की मेहनत और सहयोग का परिणाम है. परिवार के लोगों ने हर कदम पर उन्हें मोटिवेट किया. सैनिक स्कूल से शुरू हुआ उनका सफर अब भारतीय सेना तक पहुंच चुका है.

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Pargati Singh

न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।

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