विभूतिपुर में दुर्लभ प्रजाति के सांप पकड़ने का मामला:सपेरों पर लोगों ने की कार्रवाई की मांग
समस्तीपुर।नागपंचमी पर्व नजदीक आते ही समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर प्रखंड में सांपों के साथ कथित क्रूरता और वन्यजीव कानूनों के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। सिंघियाघाट, नरहन, देसरी और आलमपुर कोदरिया सहित कई ग्रामीण इलाकों में सपेरों द्वारा दुर्लभ प्रजाति के सांपों को पकड़कर अमानवीय तरीके से रखने का आरोप लगाया जा रहा है।
दुर्लभ प्रजाति के सांपों को पकड़ने का आरोप
स्थानीय लोगों के अनुसार, जंगलों और खेतों से गेहुअन (कोबरा), करैत और धामन जैसी प्रजातियों के सांपों को पकड़कर मिट्टी के घड़ों और बोरों में बंद रखा जाता है। आरोप है कि कई दिनों तक उन्हें भोजन और पानी नहीं दिया जाता, जिससे उनकी हालत गंभीर हो जाती है।
नागपंचमी मेले में क्रूरता के आरोप
बताया जा रहा है कि नागपंचमी के अवसर पर बूढ़ी गंडक नदी तट पर लगने वाले मेले में इन सांपों के साथ क्रूरता की जाती है। आरोप है कि सपेरे जहरीले दांत निकालने, लार ग्रंथियों को नुकसान पहुंचाने और कई मामलों में सांपों का मुंह सिलने जैसी अमानवीय हरकतें करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सांपों को दूध पिलाना उनके लिए प्राकृतिक आहार नहीं है और इससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत सांपों को पकड़ना, बंधक बनाना या उनके साथ क्रूरता करना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में 3 से 7 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। पिछले वर्ष विभूतिपुर थाना क्षेत्र में ऐसे मामलों में कई लोगों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी भी दर्ज की गई थी।
वन विभाग की कार्रवाई पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस वर्ष अब तक वन विभाग की ओर से न तो प्रभावी गश्त की जा रही है और न ही संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की गई है। मामले में डीएफओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। वहीं, विभागीय सूत्रों का कहना है कि जल्द ही विशेष अभियान चलाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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