दरभंगा:जून में ही बाढ़ की आहट से बढ़ी चिंता,कई गांवों का सड़क संपर्क टूटा
दरभंगा।कुशेश्वरस्थान पूर्वी :
बाढ़ की राजधानी के नाम से चर्चित कुशेश्वरस्थान में पिछले सात-आठ वर्षों के दौरान बाढ़ की स्थिति में काफी बदलाव आया है। कमला बलान नदी के पश्चिमी तटबंध के निर्माण के बाद कुशेश्वरस्थान प्रखंड की सभी 14 पंचायतें तथा कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड की नगर पंचायत सहित पांच पंचायतें बाढ़ के खतरे से काफी हद तक सुरक्षित हो गई हैं। इसके बावजूद पूर्वी प्रखंड के तटबंध के पूर्व स्थित इटहर, उसरी, उजुआ सिमरटोका एवं तिलकेश्वर पंचायत के लोगों को आज भी हर वर्ष बाढ़ की मार झेलनी पड़ती है।
इस वर्ष मानसून की शुरुआत के साथ ही मध्य जून में बाढ़ की आहट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण वीरपुर बराज के 22 फाटक खोल दिए गए हैं। इसके बाद कोसी एवं कमला बलान नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की जा रही है। बीते दो दिनों के दौरान दोनों नदियों के जलस्तर में करीब दो मीटर की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि अभी नदी का पानी दोनों किनारों के भीतर ही बह रहा है और आधिकारिक तौर पर बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है, लेकिन जलस्तर में लगातार वृद्धि से क्षेत्र के लोगों में संभावित बाढ़ को लेकर दहशत का माहौल है।
जलस्तर बढ़ने के कारण कमला बलान नदी का पानी इटहर पंचायत के चौकिया, लक्ष्मीनिया, बलथरवा सहित भिंडुआ पंचायत के गोबराही एवं भरैन मुशहरी गांवों को चारों ओर से घेर चुका है। इसके चलते इन गांवों का मुख्य सड़क मार्ग से संपर्क लगभग टूट गया है। करीब पांच हजार से अधिक आबादी प्रभावित हुई है और लोगों को दैनिक कार्यों, बाजार, अस्पताल, स्कूल तथा सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
इट हर के शिक्षक देवेन्द्रकुमार राय ,बिमल पंडित के अलावे मीणों का कहना है कि सरकारी स्तर पर अब तक नाव की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में उन्हें निजी नावों से सफर करने के लिए भाड़ा चुकाना पड़ रहा है। कई लोगों ने बताया कि सुबह से शाम तक जरूरी कामों के लिए नाव की प्रतीक्षा करनी पड़ती है, जिससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त हानि हो रही है। विशेषकर बुजुर्गों, महिलाओं, विद्यार्थियों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही खेत मे लगे मूंग क़ि फसल दुब गया है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि जलस्तर बढ़ने का यही सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। निचले इलाकों में पानी का फैलाव बढ़ने से और अधिक गांव प्रभावित हो सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से समय रहते नाव, राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि संभावित बाढ़ की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
इस संबंध में पूछे जाने पर प्रभारी अंचलाधिकारी राकेश सिंह यादव ने बताया कि अंचल प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अभी तक किसी पंचायत या क्षेत्र से सरकारी नाव उपलब्ध कराने की आधिकारिक मांग प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि मांग प्राप्त होते ही आवश्यकतानुसार नाव की व्यवस्था कराई जाएगी तथा बाढ़ से संबंधित सभी तैयारियां प्रशासनिक स्तर पर की जा रही हैं। प्रशासन स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
