समस्तीपुर के लाल वैभव सूर्यवंशी ने ने फिर लिखा इतिहास,11 गेंदों में बनाया अर्धशतक
समस्तीपुर: बिहार का एक किशोर आज विश्व क्रिकेट के आसमान पर चमकता सितारा बन गया है। समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड की धरती से निकले 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने श्रीलंका-ए के खिलाफ ट्राई सीरीज के फाइनल मुकाबले में ऐसी तूफानी पारी खेली, जिसे क्रिकेट जगत वर्षों तक याद रखेगा. दांबुला के रणगिरि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में इंडिया-ए की ओर से बल्लेबाजी करते हुए वैभव ने मात्र 11 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर लिस्ट-ए क्रिकेट इतिहास का सबसे तेज अर्धशतक बनाने का विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया.
इस ऐतिहासिक कारनामे के दौरान उन्होंने एक भी सिंगल नहीं लिया, बल्कि पांच चौके और पांच गगनचुंबी छक्कों के सहारे गेंदबाजों की धज्जियां उड़ा दीं. वैभव ने श्रीलंका के कौशल्या वीरारत्ने के 12 गेंदों में बनाए गए 20 वर्ष पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय बल्लेबाज सरफराज खान के 15 गेंदों वाले भारतीय रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। हालांकि वह शतक से महज छह रन दूर रह गए, लेकिन 29 गेंदों में 10 चौकों और 8 छक्कों की मदद से 94 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीत लिया. वैभव की इस ऐतिहासिक उपलब्धि की खबर जैसे ही उनके गांव पहुंची, पूरा इलाका खुशी से झूम उठा. ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटी, आतिशबाजी कर अपनी खुशी का इजहार किया और एक-दूसरे को बधाई दी. खेल प्रेमियों ने कहा कि वैभव की यह उपलब्धि बिहार के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं. एक समय था जब बिहार की खेल प्रतिभाओं को पहचान के लिए संघर्ष करना पड़ता था, लेकिन आज वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया का ध्यान बिहार की ओर आकर्षित कर रहे हैं.
उनकी यह ऐतिहासिक पारी सिर्फ रिकॉर्ड बुक में दर्ज नहीं होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सपनों में भी हमेशा जीवित रहेगा
* प्रारंभिक कोच ब्रजेश झा ने कहा, “वैभव बचपन से ही असाधारण प्रतिभा का धनी रहा है। उसकी मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण ने आज उसे इस मुकाम तक पहुंचाया है। हमें पूरा विश्वास है कि वह आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट का एक बड़ा सितारा बनेगा.
* बीसीए ए-ग्रेड अंपायर सुभीत कुमार सिंह ने कहा, “वैभव की यह पारी केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि बिहार की खेल संस्कृति और संघर्ष की जीत है.
इतने कम उम्र में विश्व स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना हम सभी बिहारवासियों के लिए गर्व का क्षण है. उम्मीद है कि उसका यह सफर भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा.
* बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव तरुण कुमार ने कहा, “वैभव ने साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती. गांव की गलियों से निकलकर विश्व रिकॉर्ड बनाना हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणादायक संदेश है. यह सफलता बिहार के खेल जगत में नई ऊर्जा का संचार करेगी.
न्यूज़ टू बिहार में कई सालो में काम करने के साथ,कंटेट राइटर, एडिटिंग का काम कर रही।3 साल का पत्रकारिता में अनुभव।
